मेला तिरुवेंकटनाथापुरम मंदिर एक छोटे से गांव में स्थित है, जो इसी नाम से जाना जाता एक गांव भी है। यह स्थान तिरुन्नकोविल के रुप में भी जाना जाता है और एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। किंवदंती है कि महर्षि व्यास के छात्र बाबा पिलोर ने भी तामिरभरणी नदी के इसी तट पर तपस्या की थी।
उसकी तपस्या से संतुष्ट होकर महाविष्णु, प्रभु श्रीनिवास के रूप में उसके सामने प्रकट हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया। बाबा पिलोर के अनुरोध पर, भगवान स्थायी रूप से इसी स्थान पर उपस्थित होने के लिए राज़ी हो गए। इस मंदिर के निर्माण कार्य को शुरु करने की जिम्मेदारी इसी बाबा को जाती है, लेकिन आज जिस रुप में हम इस मंदिर को देखते हैं उसके निर्माण का श्रेय राजा वेंकटप्पा नायकर को जाता है।
मंदिर के पास तामिरभरणी नदी में स्थित स्नान क्षेत्र को श्रीनिवास तीर्था घाट के रूप में जाना जाता है। यहां मनाया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण त्योहार "गरूड़ सेवई" है। यह त्योहार तिरुवोनम के दिन एवं तमिल के वैसाखी महीने के हर शनिवार को मनाया जाता है, जो हर साल सितम्बर और अक्टूबर के बीच आता है। यह समय इस मंदिर की यात्रा करने के लिए सबसे अच्छा समय होगा।



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