हनुमान मंदिर तिरुपति के पास स्थित है तथा गोगर्भम बांध से 3 किमी. की दूरी पर स्थित है। ऐसा माना जाता है कि भगवान राम, सीता और लक्ष्मण तथा हनुमान के साथ यहाँ रुके थे। इस स्थान को जपाली भी कहा जाता है क्योंकि भगवान हनुमान ने यहां तपस्या की थी।
मंदिर के परिसर में एक कुंड भी है जिसे राम कुंड कहा जाता है। कहा जाता है कि इस स्थान को भगवान हनुमान का आशीर्वाद प्राप्त है क्योंकि उन्हें स्वयं इस स्थान पर मानसिक शांति प्राप्त हुई थी। ऐसा विश्वास है कि कोई भी व्यक्ति जो यहाँ प्रार्थना करता है उसे परम सत्य की प्राप्ति होती है।
मंदिर के प्रवेश द्वार पर एक वृक्ष है जिसका मूलाधार भगवान गणेश के समान है तथा ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश स्वयं यहाँ प्रकट हुए थे।



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