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  • 01मलाइकोट्टाई उचि पिल्लयार मन्दिर रॉक फोर्ट

    मलाइकोट्टाई उचि पिल्लयार मन्दिर रॉक फोर्ट

    भगवान गणेश के समर्पित मलाइकोट्टाई उचि पिल्लयार मन्दिर रॉक फोर्ट के ऊपर स्थित है। मन्दिर 7वीं सदी का निर्मित प्राचीन मन्दिर है। मन्दिर 83 मीटर ऊँचा है और मदुरै के नायकों द्वारा पूरा किया गया था। रॉक फोर्ट के मन्दिर वास्तुकला की दृष्टि से शानदार हैं और इनका रखरखाव...

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  • 02गुनासीलम विष्णु मन्दिर

    गुनासीलम विष्णु मन्दिर भगवान विष्णु को समर्पित मन्दिर है जो कावेरी नदी के तट पर स्थित है। ऐसा माना जाता है कि मन्दिर में मानसिक रूप से विक्षिप्त बच्चों को 48 दिनों के भीतर ठीक करने की क्षमता है इसलिये उन्हें इतने समय के लिये यहाँ छोड़ दिया जाता है। मन्दिर के मुख्य...

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  • 03वेक्कालीअम्मन मन्दिर

    वेक्कालीअम्मन मन्दिर

    वेक्कालीअम्मन मन्दिर त्रिची से 7 किमी की दूरी पर वोराईयूर में स्थित है। मन्दिर चोलों की वेदी के रूप में एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थान है। इस मन्दिर की प्रमुख विशेषता यह है कि इसके इष्टदेव के सिर पर छत नहीं है। ऐसा माना जाता है कि इसके पीछे यह कारण है कि देवी...

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  • 04विरालिमलाई मुरूगन मन्दिर

    विरालिमलाई मुरूगन मन्दिर

    विरालिमलाई मरुगन मन्दिर त्रिची शहर के केन्द्र में विरालिमलाई शहर पर स्थित है। मन्दिर तक 207 सीढ़ियों द्वारा पहुँचा जा सकता है। मन्दिर के रास्ते पर कई मण्डप हैं जो यात्रियों के लिये आराम करने के कमरे हैं। यहाँ किये जाने वाले अनुष्ठानों में भगवान दण्डायुधापाणि को...

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  • 05मुक्कोम्बू बाँध

    मुक्कोम्बू बाँध

    मुक्कोम्बू बाँध कावेरी और कोल्लडम नदियों पर बना है। यह बाँध 18 किमी की दूरी पर स्थित है। यह क्षेत्र शहर के नजदीक एक लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट बन गया है। यहाँ मनोरंजक पार्क, बच्चों का पार्क, मछली मारने और खेलकूद जैसे कई आकर्षण भी हैं। इसके कारण यह क्षेत्र एक लोकप्रिय...

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  • 06कल्लानाई बाँध

    कावरी नदी पर निर्मित कल्लानाई बाँध को ग्राण्ड अनीकट के नाम से भी जाना जाता है। बाँध 146.70 वर्ग किमी का क्षेत्र घेरता है। इस बाँध को चोल वंश के शासक करीकलन द्वारा पहली शताब्दी ईसा पूर्व में निर्मित कराया गया था और इसे विश्व के प्राचीनतम पानी नियन्त्रित करने वाली...

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  • 07वयालूर मुरूगन मन्दिर

    वयालूर मुरूगन मन्दिर

    वयालूर मुरूदन मन्दिर त्रिची से 9 किमी की दूरी पर है। यह मन्दिर भगवान मुरूगन को समर्पित है। यह मन्दिर 1200 साल पहले चोल वंश के शासनकाल में बना था। मन्दिर को आदि वयालूर, कुमारा वयालूर, वन्नी वयालूर और अग्नीश्वरम् नामों से भी जाना जाता रहा है। मन्दिर परिसर के अन्दर...

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  • 08सेन्ट जोसफ चर्च

    सेन्ट जोसफ चर्च

    सेन्ट जोसफ चर्च त्रिची के सबसे लोकप्रिय चर्चों में से एक है। 1792 ई0 में निर्मित यह चर्च भारत के सबसे पुराने गिरजाघरों में से एक है। ब्रिटिश गैरीसन की वित्तीय सहायता के साथ श्वार्ट्ज़ ने इस चर्च का निर्माण करवाया था। अंग्रेजों द्वारा चर्च को ईसाई धर्म को फैलाने के...

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