Search
  • Follow NativePlanet
Share
होम » स्थल » विदिशा » आकर्षण
  • 01सिरोंज

    सिरोंज

    सिरोंज को पहले सिरोंचा नाम से जाना जाता था। विदिशा से उत्तर-पश्चिम में पड़ने वाले सिरोंज का विशेष ऐतिहासिक महत्व है। बुंदेलखंड की सीमा पर पड़ने वाला सिरोंज कभी जैन तीर्थ स्थल का केन्द्र हुआ करता था। विदिशा से 85 किमी दूर स्थित सिरोंज तीर्थ स्थलों, मंदिरों और...

    + अधिक पढ़ें
  • 02सोला खंबी मंदिर

    सोला खंबी मंदिर

    ऐसा माना जाता है कि सोला खंबी मंदिर का संबंध गुप्त काल से है। यह मंदिर बदोह कस्बे के कुरवाई में स्थित है। एक स्थानीय झील के उत्तरी छोर पर स्थित यह मंदिर बेहद खूबसूरत दिखता है।

    मंदिर का छत सपाट है और इसमें 16 स्तंभ होने के कारण इसका नाम 16 खंभी मंदिर पड़ा।...

    + अधिक पढ़ें
  • 03जैन मूर्ति

    जैन मूर्ति

    विदिशा जिले के सिरोंज के पास धरमपूर में जैन मूर्ति पाए जाते हैं। विभिन्न मूर्तियों में आठवें जैन तीर्थंकर चंद्रनाथ की सबसे पुरानी प्रतिमा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह प्रतिमा 2 मीटर ऊंची और एक मीटर चौड़ी है। इस पर लिखा एक अभिलेख सन् 155 का है।

    यह प्रतिमा...

    + अधिक पढ़ें
  • 04खंबा बाबा

    खंबा बाबा को हेलियोडोरस स्तंभ भी कहा जाता है। पत्थर से बना यह स्तंभ विदिशा रेलवे स्टेशन से 4 किमी दूर है। यह एक स्वतंत्र रूप से खड़ा विशाल स्तंभ है। इस पर दर्ज अभिलेख में लिखा गया है कि इसे भगवानों के भगवान यानी वासुदेव के सम्मान में हेलियोडोरस द्वारा स्थापित किया...

    + अधिक पढ़ें
  • 05हिंडोला तोरण

    विदिशा के ग्यारसपुर में एक प्रचीन मंदिर के टुकड़े बिखरे पड़े हैं। उत्कृष्ट तरीके से नक्काशीयुक्त इस संरचना को हिंडोला तोरण नाम से जाना जाता है। हिंडोला का अर्थ होता है- झूलना और तोरण का अर्थ होता है- छोटा दरवाजा। लेकिन इस उत्कृष्ट निर्माण में झूलने जैसा कुछ भी...

    + अधिक पढ़ें
  • 06बाजरामठ मंदिर

    बाजरामठ मंदिर

    विदिशा के ग्यारसपुर में स्थित बाजरामठ मंदिर एक दुर्लभ व प्राचीन मंदिर है। मंदिर में तीन पवित्र स्थल है, जिसमें दिगंबर जैन की प्रतिमा रखी गई है। इसकी वास्तुशिल्पीय बनावट से पता चलता है कि इसे मूल रूप से हिंदू त्रिदेव को रखने के लिए बनाया गया था और बाद में दिगंबर...

    + अधिक पढ़ें
  • 07बीजामंडल

    विजयमंदिरा मंदिर के नाम से भी जाना जाने वाला बीजामंडल मंदिर विदिशा का प्रमुख आकर्षण है। 11वीं शताब्दी में बने इस मंदिर में परमार काल के एक बड़े मंदिर के अवशेष देखे जा सकते हैं। इसकी आधी अधूरी बनावट और आधारशिला को देखकर यह समझा जा सकता है कि इसका निर्माण कार्य पूरा...

    + अधिक पढ़ें
  • 08लोहंगी पीर

    लोहंगी पीर

    लोहंगी पीर का निर्माण चट्टानों से हुआ है, जो कि पूरे विदिशा में फैला हुआ है। इसका नामकरण शेख जलाल चिस्ती के नाम पर हुआ है, जिसे स्थानी लोग लोहंगी पीर के नाम से जानते हैं। इस ऊंचे चट्टान के टीले विदिशा में हर ओर देखे जा सकते हैं। चट्टान की यह संरचना 7 मीटर ऊंची है...

    + अधिक पढ़ें
  • 09मालादेवी मंदिर

    मालादेवी मंदिर

    विदिशा का मालादेवी मंदिर पहाड़ी की ढलान पर खूबसूरत लोकेशन के बीच स्थित है। मंदिर से घाटी का विहंगम नजारा मंत्रमुग्ध कर देने वाला होता है। यह मंदिर पहाड़ी के एक तरफ से कटे भाग के विशाल आधार पर स्थित है। मंदिर की वास्तुशिल्पी बनावट को देखकर यहां आने वाले पर्यटक हैरत...

    + अधिक पढ़ें
  • 10दशावतार मंदिर

    दशावतार मंदिर

    विदिशा का चर्चित दशावतार मंदिर एक तरह से छोटे-छोटे वैष्णव तीर्थ स्थान का समूह है। प्रत्येक तीर्थ स्थान विष्णु के अवतारों को समर्पित है। इसे स्थानीय लोग सधावतार मंदिर के नाम से भी जानते हैं। यह मंदिर विदिशा के पास कुरवाई के बडोह कस्बे में एक झील से उत्तर की दिशा...

    + अधिक पढ़ें
  • 11शालभंजिका

    शालभंजिका

    शालभंजिका पत्थरों से बनी एक महिला की दुर्लभ व विशिष्ट संरचना है, जो त्रिभंग मुद्रा में खड़ी है। ऐसा कहा जाता है कि ग्यारसपुर में पाई गई यह मूर्तियां 8वीं से 9वीं शताब्दी के बीच की है। इस उत्कृष्ट मूर्ति के बारे में कहा जाता है कि यह जंगल की देवी की है।

    ...
    + अधिक पढ़ें
  • 12उदयगिरि की गुफाएं

    उदयगिरि की गुफाओं में बेहद जटिल नक्काशी की गई है और 5वीं शताब्दी में गुप्त साम्राज्य के दौरान चंद्रगुप्त द्वितीय के शासन काल में इन गुफाओं पर फिर से काम किया गया। ये गुफाएं विदिशा से 6 किमी दूर बेतवा और वैस नदी के बीच में स्थित है। एकांत स्थान पर पहाड़ी पर स्थित...

    + अधिक पढ़ें
  • 13उदयेश्वर मंदिर

    उदयेश्वर मंदिर

    उदयेश्वर मंदिर बासौदा के उदयपुर गांव में स्थित है। मंदिर में कई पुराने संस्कृत के अभिलेख पाए गए हैं, जिससे यह पता चलता है कि इसे परमार राजा उदयादित्य ने 11वीं शताब्दी में 1059 से 1080 के बीच बनवाया था। यह मंदिर सड़क के जरिए विदिशा से अच्छे से जुड़ा हुआ है।

    ...
    + अधिक पढ़ें
  • 14गाडरमल मंदिर

    गाडरमल मंदिर

    गाडरमल मंदिर विदिशा से करीब 84 किमी दूर है। हालांकि विदिशा से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। विदिशा से पठारी के लिए नियमित बसें चलती है, जिससे यात्री गाडरमल मंदिर पहुंच सकते हैं। खुद पठारी कस्बे में भी मध्यकाल के कई मंदिरों के अवशेष देखे जा सकते हैं। इन सबके बीच...

    + अधिक पढ़ें
One Way
Return
From (Departure City)
To (Destination City)
Depart On
07 Sep,Mon
Return On
08 Sep,Tue
Travellers
1 Traveller(s)

Add Passenger

  • Adults(12+ YEARS)
    1
  • Childrens(2-12 YEARS)
    0
  • Infants(0-2 YEARS)
    0
Cabin Class
Economy

Choose a class

  • Economy
  • Business Class
  • Premium Economy
Check In
07 Sep,Mon
Check Out
08 Sep,Tue
Guests and Rooms
1 Person, 1 Room
Room 1
  • Guests
    2
Pickup Location
Drop Location
Depart On
07 Sep,Mon
Return On
08 Sep,Tue