कर्ण झील का नाम महान योद्धा और महाभारत में दाता के नाम से प्रसिद्ध कर्ण पर रखा गया, यह करनाल के मुख्य शहर से सिर्फ 13-15 मिनट की दूरी पर है। संयोग से, शहर खुद भी कर्ण के नाम पर है।
शास्त्रों के अनुसार प्रसिद्ध योद्धा कर्ण उन दिनों इसी झील में नहाते थे, जिसे आज कर्ण ताल या तालाब कहा जाता है। यहीं पर कर्ण ने इसी ताल में नहाने के बाद अपना प्रसिद्ध सुरक्षात्मक कवच भगवान इंद्र को दान कर दिया था, जो अर्जुन के पिता थे और अर्जुन शक्ति के मामले में उनका प्रतिद्वंद्वी एवं कट्टर दुश्मन था।
कर्ण झील एक पर्यटक स्थल है और सिर्फ करनाल जिले में ही नहीं बल्कि पूरे हरियाणा में प्रसिद्ध। एक विशेष पर्यटन विशेषता है कि यह ग्रैंड ट्रंक रोड के राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 1 के किनारे पर स्थित है और आसानी से कारों और पर्यटकों की वॉल्वो बसों का ध्यान आकर्षित करता है। इसलिए यहां ज्यादातर समय में भीड़ बनी रहती है।
झील के किनारे पेड़ों की कतारें और उत्कृष्ट भोजनालय और चारों तरफ सुंदर परिदृश्य और लॉन शहर व आसपास के लोगों को पिकनिक और पार्टी के लिये बार-बार आकर्षित करते हैं।



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