करनाल छावनी चर्च टॉवर क्षेत्र में सिख की बढ़ती सैन्य शक्ति की चुनौती का सामना करने के लिए वर्ष 1805 में ब्रिटिश सरकार द्वारा निर्मित छावनी में सेंट जेम्स चर्च का एक हिस्सा था।
जब इलाके मे मलेरिया की महामारी फैली तब ब्रिटिश सरकार ने छावनी छोड़ दी और 1843 ई. में इसे अंबाला स्थानांतरित कर दिया। इस्तेमाल की गयी सामग्री को ले जाने के लिये चर्च ध्वस्त कर दिया, लेकिन टॉवर को उसी जगह रेहने दिया जहां था, इसे लोगों की चाहत के विरुद्ध बनाया गया और जब ध्वस्त किया गया तब भी विरोध हुआ।
35 मीटर ऊंचा विशाल टॉवर इनफैंट्री परेड ग्राउंड और रेस कोर्स के बीच में स्थित है। ऊपर अच्छी सजावट वाला टॉवर ब्रिटिश वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है और आसपास की सात मील की दूरी से दिखता है। यह चार मंजिला है।
जहां इसकी पहली मंजिल इट्रस्केन प्लास्टर से कवर की गई है, वहीं सबसे ऊपर की मंजिल चूने की है। इसमें रोमन स्थापत्य शैली और एक शानदार चौखटा कलाकृति में अर्द्ध परिपत्र मेहराब की विशेषताएँ हैं। टावर में चर्च से हटायी हुई पटरियां भी हैं। यह शहर में प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है।



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