नीलांबुर के पास स्थित एक बड़ा पर्यटन आकर्षण, कन्नीमारा सागौन , वर्तमान समय में सबसे बड़े सागौन वृक्षों में से एक है। विशाल संरचना वाले इस पेड़ की परिधि 6.48मी. है। लगभग 400 साल पुराना माना जाने वाले यह वृक्ष लगभग 48.75मी. ऊँचा है।
इस इलाके में रहने वाले आदिवासी समूहों की मान्यताओं में यह वृक्ष मुख्य भूमिका निभाता है तथा इससे संबंधित अनेक कहानियाँ प्रचलित हैं। एक ऐयी ही कहानी के अनुसार, जब लोगों ने इस पेड़ को की कोशिश की तो इसके तने में से खून निकलने लगा। तब से स्थानीय आदिवासियों ने इस पेड़ को ’पवित्र पेड़’ के रूप् में पूजना आरंभ कर दिया और इसी प्रथा से इस पेड़ का नाम यह रखा गया।
’कन्नीमारा’ नाम दो मलयालम शब्दों से मिलकर बना हैः कन्नी(अर्थात् पवित्र) तथा मारा(अर्थात् पेड़)। यह अद्भुत पेड़ परमबिकुलम वन्यजीव अभयारण्य में पाया जाता है जो कि पलक्कड़ जि़ले में स्थित है। नीलांबुर शहर से लगभग 80कि.मी. दूर इस अभयारण्य तक सड़कमार्ग द्वारा पहुँचा जा सकता है। भारत सरकार ने इस वृक्ष को ’महावृक्ष पुरस्कार’ से सम्मानित किया है।



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