थिरूवाविननकुडी मंदिर को कुलनथाई वेलुथास्वामी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर इस क्षेत्र के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है, तथा भगवान मुरूगन का निवास माना जाता है। तिरू अविनाकुडी की पहाड़ी पर बसा यह मंदिर, गीतों व पुराणों में उल्लेखित तीन पडाइ-विडु में से एक है।
मंदिर से सटा हुआ एक पवित्र तीर्थम है तथा इसमें मोर पर बैठे हुए बाल रूप में मुरूगन भगवान की मूर्ति के दर्शन होते हैं। मंदिर के भीतर, एक बड़े आंवला वृक्ष के गर्भ-गृह में अरूणागिरिनथर तथा नागालिंग, देखने लायक हैं। वर्षों तक मंदिर नें कई पुनरूद्धार देखे हैं, जिनमें कंडनौर के के.पी.एस पालनजप्पा चेटिया तथा करईकुडी के एन.एम. सुब्रह्मनियम चेटियार द्वारा किये गये पुनरूद्वार भी शामिल हैं।



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