पंचकूला में स्थित कैक्टस गार्डन एशिया का सबसे बड़ा गार्डन है जिसमें कैक्टस की दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियों का विशाल संग्रह है। समान विकास और पीढ़ी से संबंधित कैकटस यहाँ रखे हुए हैं। ओपनशिया, फेरोकैक्टस, एगेव्स, स्तंभाकार कैक्टस, एकिनोसेरेस और मेमिलेरिया आदि कैक्टस की कुछ प्रजातियाँ इस बगीचे में देखी जा सकती हैं।
नेशनल कैक्टस और रसीला बाॅटनिकल गार्डन तथा रिसर्च सेंटर सेक्टर-5 में स्थित है। डा. जे.एस. सरकारिया इस बाग के मुख्य वास्तुकार थे। उन्होंने रसीले पौधों और कैक्टस का विशाल संग्रह इस बगीचे में दान किया था। शिक्षाप्रद विभाग में बोनसाई का एक संग्रह है।
इस बाग का उद्येश्य लुप्तप्राय प्रजातियों को बचाना और संरक्षित करना है जिसे अच्छी तरह से निभाया जा रहा है। जीनस कैरेल्यूमा भारतीय मूल की एक ऐसी नागफनी है जिसका पूरा संग्रह इस बगीचे में उपलब्ध है। कैक्टस और रसीले पौधों की 2500 से अधिक वैरायटी यहाँ उपलब्ध है।
कैक्टस से विशेष लगाव रखने वाले वनस्पति वैज्ञानिक और यात्री यहाँ आते हैं। पर्यटकों को इनके औषधीय गुण भी बहुत आकर्षित करते हैं। हर साल मार्च के महीने में कैक्टस शो आयोजित किया जाता है। इस समय देशभर से पर्यटक यहाँ आते हैं। इस बगीचे में नौ काँच के घर मौजूद हैं। यहाँ पौधें बेचे भी जाते हैं।



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