पुनलुर - दो राज्यों की कथा

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केरल और तमिलनाड़ु सीमा पर बसा पुनलुर, नैसर्गिक सौन्दर्य से भरा सुन्दर शहर है। जिसके बीच कल्लादा नदी बहती है। यहाँ स्थापित पुनलुर पेपर मिल से केरल में ओद्योगिक क्रांति की शुरुवात हुई। पुनलुर दो शब्दों को जोड़ने से बनता है, तमिल और मलयालम में "पुनल" का अर्थ है पानी और "ऊरू" का अर्थ है स्थान। जिसे जोड़ने से इसका अर्थ "पानी का शहर" बनता है। पश्चिमी घाटों का प्रशासनिक मुख्यालय पथन्पुरम तालुक में स्थित है, जिसे पश्चिमी घाटों के प्रवेश द्वार के रूप में भी माना जाता है। यह शहर " पश्चिमी घाटों की गोद" के रूप में भी जाना जाता है, और यह दक्षिण का पांचवां सबसे बड़ा शहर है।

पुनलुर की विशेषता

पुनलुर अपने अनानास, प्लाईवुड, काली मिर्च और इमारती लकड़ी के लिए प्रसिद्ध है। 19 वी सदी में अंग्रेजों द्वारा बनाया गया झूलता पुल इस स्थान को और भी श्रेष्ठ बनाता है। जिसे, यहाँ के अधिकारियों ने राष्ट्रिय स्मारक का दर्जा दिया है। भले ही आज यह पुल उपयोग में नहीं है, पर इसका नवीकरण कर इसे संरक्षित किया है। यहाँ मौजूद बायो-रिज़र्व अगस्थ्यामालै के नाम से भी जाना जाता है।

पुनलुर के पर्यटक स्थल

कल्लादा नदी के पास मौजूद कई सुन्दर स्थान यात्रियों को बहुत आकर्षक लगते हैं। उत्सवों के दौरान सबरीमला और श्री अयप्पा के दर्शन के लिए आए श्रद्धालू यहाँ जरुर आते हैं| शेन्थ्रुनी वन जो थेन्मला पारिस्थितिकी पर्यटन के अंतर्गत है, इस शहर का एक और आकर्षक स्थल है। एडवेंचर प्रेमी चाहे तो यहाँ लम्बी पैदल यात्री या माउंटेन बाइकिंग का लुफ्त उठा सकते हैं। इसके अलावा पलरुवी झरना और पुराना कुट्रालम झरना यहाँ के अन्य पर्यटक स्थल है। इनके साथ साथ यहाँ पट्टज़ी का प्राचीन पट्टज़ी देवी मंदिर भी मौजूद है।

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