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पालक्कड़ – धान के कटोरे में बीते युग का एहसास

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पालक्कड़, जिसे पूर्व में पालघाट के नाम से जाना जाता था, केरल का एक जिला है जो पश्चिमी घाट की सर्पीली पहाड़ियों में स्थित है। पालक्कड़ केरल के अन्य भागों से मुख्य रूप से अपने ग्रामीण परिवेश और लहलहाती धान की खेती के कारण अलग है। लम्बी कतार में पॉम के पेड़, हरे-भरे मैदान, घने ऊष्णकटिबंधीय जंगल और टेढ़े- मेढ़े पहाड़ी रास्ते पर्यटकों के लिये शानदार दृश्य प्रस्तुत करते हैं। केरल के धान उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान होने के कारण पालक्कड़ को 'केरल का धान का कटोरा' और 'केरल का अन्न भण्डार' नामक दो उपनामों से जाना जाता है।

परम्पराओं का भण्डार

पालघाट दर्रा पश्चिमी घाट में एक प्राकृतिक रास्ता है जो कि पालक्कड़ को केरल तथा पड़ोसी राज्य तमिलनाडु से जोड़ता है। केरल के अन्य जिलों से अलग यहाँ तमिल लोग रहते हैं जिसके कारण इस क्षेत्र में एक अनोखी संस्कृति का विकास हुआ है। तमिलनाडु से निकटता के कारण यहाँ की भोजन पद्धति अलग ही प्रकार की है जहाँ पर पारम्परिक केरल और तमिल स्वदों को प्राथमिकता दी जाती है।

पालक्कड़ के अनोखे सांस्कृतिक इतिहास में यहाँ के मन्दिरों के त्योहारों और अच्छी तरह से संरक्षित कर्नाटक संगीत ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कर्नाटक संगीत के प्रसिद्ध दो दिग्गज संगीतकारों चेम्बई वैद्यनाथ भागावतार तथा पालक्कड़ मणि अय्यर की जन्मस्थली होने के कारण पालक्कड़ देश भर से संगीत प्रेमियों का ध्यान आकर्षित करता है।

दर्शकों के लिये स्वर्ग

पालक्कड़ में किलों, मन्दिरों, बाँधों, वन्यजीव अभ्यारणों, जलप्रपातों, पार्कों और सुन्दर प्राकृतिक दृश्यों जैसे कई दर्शनीय विकल्प हैं। पालक्कड़ के किले और जैन मन्दिरों के ऐतिहासिक महत्व हैं जो साल भर पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। मनोरंजक पार्क के साथ-साथ क्षेत्र में स्थित मालमपुझा बाँध और बगीचे उत्कृष्ट पर्यटक स्थल के रूप में कार्य करते हैं।

नेलियमपत्थी हिल स्टेशन, साइलेन्ट वैली नैशनल पार्क और परम्बिकुलम वन्यजीव अभ्यारण्य प्रकृति एवं वन्यजीव प्रमियों के लिये छुट्टियों के शानदार अनुभव प्रदान करते हैं। कंजिरापुझा तथा धोनी जलप्रपात, ओट्टपलम तथा कोलेनगोडे महल और थेनकुरुस्सी कुछ अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं।

पालक्कड़ रेल तथा सड़क मार्गों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है तथा गर्मियों को छोड़कर यहाँ का मौसम वर्ष भर सुहाना रहता है। परम्पराओं का दुर्लभ मिश्रण, सुन्दर प्राकृतिक दृश्य, अभूतपूर्व दर्शनीय स्थलों के विकल्प तथा त्योहारों की खुशियाँ पालक्कड़ को दक्षिण भारत का एक लोकप्रिय पर्यटक स्थल बनाते है।

पालक्कड़ इसलिए है प्रसिद्ध

पालक्कड़ मौसम

घूमने का सही मौसम पालक्कड़

  • Jan
  • Feb
  • Mar
  • Apr
  • May
  • Jun
  • July
  • Aug
  • Sep
  • Oct
  • Nov
  • Dec

कैसे पहुंचें पालक्कड़

  • सड़क मार्ग
    पालक्कड़ सड़कमार्ग के माध्यम से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है और आसपास के जिलों तथा तमिलनाडु के कुछ शहरों से बसें आसानी से उपलब्ध हैं। कोयम्बटूर, कोच्ची, कालीकट और त्रिशूर जैसे शहरों के लिये केरल राज्य परिवहन और निजी बसें नियमित रूप से चलती हैं। तिरूवनन्तपुरम, बैंग्लोर और चेन्नई से पालक्कड़ के लिये लक्ज़री एवं वॉल्वो बसें उपलब्ध रहती हैं।
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  • ट्रेन द्वारा
    पालक्कड़ रेलवे जंक्शन, जिसे ओलवक्कोड जंक्शन भी कहते हैं, केरल का प्रमुख रेलवे स्टेशन है। यह केरल के सभी भागों और बैंग्लोर, चेन्नई, दिल्ली, मुम्बई और हैदराबाद जैसे प्रमुख भारतीय शहरों से जुड़ा हुआ है। रेलवे स्टेशन पर पहुँचने के बाद पर्यटक 3 किमी दूर स्थित कस्बे के लिये टैक्सियाँ या ऑटो-रिक्शॉ ले सकते हैं।
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  • एयर द्वारा
    पालक्कड़ में कोई हवाईअड्डा नहीं है। कोयम्बटूर का निकटतम हवाईअड्डा पालक्कड़ कस्बे से 50 किमी की दूरी पर स्थित है। कोयम्बटूर हवाईअड्डे से पालक्कड़ कस्बे के लिये टैक्सी सेवायें उपलब्ध हैं। जो लोग अन्य वायुमार्गों से आना चाहें वे कोच्ची अन्तर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे (160 किमी) और कालीकट अन्तर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे (110 किमी) के विकल्प भी ले सकते हैं।
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