कोट्टयम् - शब्‍दों का सुखद शहर

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कोट्टयम्, केरल का एक प्राचीन शहर है। यह कोट्टयम् जिले में ही स्थित है जो भगवान की स्‍वंय की भूमि पर बने जिलों में से एक है। शहर का प्रिंट मीडिया और साहित्‍य में एक बड़ा योगदान रहा है और इसीलिए इसे सही नाम अक्षरनगरी यानि "शब्‍दों के शहर" के नाम से पुकारा गया है। कोट्टयम् को अपना नाम शब्‍द कोट्ट से मिला जो एक मलयालम शब्‍द है जिसका अर्थ होता है "किला" और अकम शब्‍द का अर्थ होता "भीतर या अंदर", जो मिलकर शाब्दिक अर्थ बनाते है "किले के अंदर"।

कोट्टयम् के पुराने शहर को अभी कुन्‍नुपुरम कहा जाता है और यह एक पहाड़ी के चोटी पर स्थित है। वह किला जिससे शहर को अपना नाम मिल गया उसे थालीइल कोट्ट के नाम से जाना जाता है, इस किले को थेक्‍कूमकूर के राजा द्वारा बनवाया गया था। इस किले की दीवारों के भीतर एक गांव का विकास हुआ और बाद में यह शहर के रूप में परिवर्तित होकर कोट्टयम के नाम से सामने आया। कोट्टयम् के पूर्व में पश्चिमी घाट की सीमाएं फैली हुई हैं और कोट्टयम् के पश्चिम में यादगार वेमबानाड़ झील बहती है। यह एक लुभावने परिदृश्‍य वाली शानदार जगह है। किसी भी दिशा में जहां - जहां तक आपकी नजर जाती है, आप हरी भूमि, सुंदर पहाड़ यानि हाईलैंडस, प्राचीन पहाडि़यां और टीले देख सकते हैं जो आपकी सांसें थाम लेगें।

कोट्टयम् के आस पास के स्थान

अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध विरासत के कारण कोट्टयम् एक लोकप्रिय पर्यटन स्‍थल भी है। साल भर में हजारों पर्यटक यहां आराम करने आते हैं और केरल के भव्‍य सास्‍ंकृतिक मूल्‍यों का अनुभव करते हैं। पुंजार महल, केरल की समृद्ध विरासत का उदाहरण है। थिरूंक्‍कारा महादेव मंदिर, पल्‍लीप्‍पराथू कावू, थिरूवेरपू मंदिर और सरस्‍वती मंदिर, कोट्टयम् के निकट स्थित कुछ प्रसिद्ध मंदिर हैं। कोट्टयम् में स्थित सुब्रमण्‍यम स्‍वामी मंदिर, भगवान सुब्रमण्‍यम की पूजा करने वाले मंदिरों में से एक है। प्राचीन थझाथानगड़ी जुमा मस्जिद और पुराना सेंट मेरी आर्थोड़ाक्‍स चर्च कोट्टथवलम भी प्रतिदिन कई पर्यटकों को आकर्षित करता है।

कोट्टवलम में स्थित गुफा भी यहां का अन्‍य पर्यटक स्‍थल है। जब आप कोट्टयम् में हों तो सुंदर दृश्‍यों वाले नट्टकम और पानाचिकादू की सैर का भी प्रोग्राम बना लें। यह गांव आपके मन और आत्‍मा को शांति पहुंचाएंगे। इसके अलावा, कोट्टयम् की सैर करते हुए हिल स्‍टेशन इलावीझापुनचिरा जाना कतई न भूलें। कोट्टयम् से आप आसपास के स्‍थानों जैसे - मुन्‍नार, इराकुलम, पीरमाडे, थिक्‍काडे, मदुरई, वाईकॉम, सबरीमाला, ईट्टुमनुरऔर अन्‍य जगहों पर भी जा सकते हैं। कोट्टयम् में डेरा ड़ालना आपको ताजातरीन कर देगा और आपकी यादों को पिरोने का काम करेगा। यह जगह ट्रैकिंग और पानी के खेलों जैसे - बोटिंग, स्‍वीमिंग और मछली पकड़ने के लिए उत्‍तम है और फोटोग्राफी को जोड़ने की जरूरत ही नहीं क्‍यूंकि वो तो आप खुद से ही समझ जाएंगें।

रबड़ वृक्षारोपण, स्‍थानीय किंवदंतियां और उच्‍च साक्षरता दर और मनोरम झीलें, कोट्टयम् को शब्‍दों की भूमि, महापुरूष, लैटेक्‍स और झीलों के रूप में नवाजता है। कोट्टयम् शहर, अपने मसालों और कच्‍ची फसलों खासकर रबड़ की पैदावार के लिए भी प्रसिद्ध है। रबड़ बोर्ड के हेड क्‍वार्टर के अनुसार, भारत को सबसे ज्‍यादा रबड़ इसी स्‍थान से मिलती है। यह केरल के प्रिंट मीडिया का भी हब है और इस शहर से कई किताबें और मलयालम मनोरमा, मंगलम और दीपिका जैसे मासिक पत्र भी प्रकाशित होते हैं। कोट्टयम् ही पहला स्‍थान है जहां भारत ने 100 प्रतिशत साक्षरता दर हासिल की थी। दावा किया जाता है कि भारत में तम्‍बाकू मुक्‍त होने वाला पहला शहर भी कोट्टयम् ही है। कोट्टयम् को भारत में पहली बार पारिस्थितिकी शहर में तब्‍दील होने का खिताब भी मिल चुका है।

कैसे जाएं कोट्टयम् 

कोट्टयम्, केरल के सभी टाउन और शहरों से अच्‍छी तरह जुड़ा हुआ है। यहां तक हवाई मार्ग, रेल मार्ग, सड़क मार्ग और अंदरूनी जल मार्ग से भी पहुंच सकते हैं।

कोट्टयम् जाने का सबसे अच्छा समय

कोट्टयम् की सैर साल के किसी भी दौर में की जा सकती है। यघपि, यहां की सैर का सबसे अच्‍छा समय सर्दियों के दौरान होता है।

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