अल्बर्ट हेनरी ने 1877 में कल्लादा नदी पर यह पुनलुर का झूलता पुल बनाया। इसके निर्माण में 6 साल से ज्यादा का समय लगा। बड़े बड़े स्पैन्स से बने इस पुल का निर्माण वाहनों के चलन के लिए बनाया गया। इसके निर्माण के बाद इस पर चलने से लोग बहुत ड़ुरते थे, तो लोगों का विश्वास जीतने के लिए पुल के इंजिनियर ने पुल पर 6 हाथियों को चलाते हुए, अपने परिवार संग छोटी सी नाव में पुल के नीचे से गुजरा।
पुनलुर का एक हिस्सा घने जंगलों से घिरा हुआ था और यहाँ के वन्य प्राणियों को पुनलुर में आने से रोकने के उद्देश से इस झूलते पुल का निर्माण किया गया। कंक्रीट से बने पुल पर चलने में जानवरों को आसानी होती, पर झूलते पुल पर चलना इतना आसान नहीं।
क्यूंकि जैसे ही इस पर कोई चलने लगेगा यह हिलने लगेगा जिसके ड़र से जानवर इस पर नहीं चलेंगे। यह पुल, 4 100 फीट गहरे वेल्स की सहायता से खड़े है, और इसकी लोहे की रोड वेल्स पर लगे क्लिप्स से अच्छी तरह जुड़ी है।



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