तंजावुर इसी नाम के जिले में स्थित एक नगरपालिका है, जिसमें छः उप जिले हैं। चोल शासकों के समय तंजावुर एक महत्वपूर्ण स्थान के रूप में सामने आया, जब चोलों नें इसे अपनी राजधानी बनाया। 18 वीं शताब्दी के अंत में देश की संस्कृति का मुख्य केंद्र रहे, एवं अनेंकों आकृषक तीर्थ स्थलों की मौजूदगी से साल दर साल हजारो पर्यटकों को अपनी ओर आकृषित करने वाला तंजावुर बेहद प्रसिद्ध है।
इसका प्रमाण इससे मिलता है,कि इस महत्वपूर्ण आध्यात्मिक स्थल पर वर्ष 2009 में, 2,00,225 भारतीय तथा 81,435 विदेशी पर्यटक भ्रमण के लिए आए।
बेशकीमती वास्तुकला - तंजावुर तथा आसपास के पर्यटन स्थल
तंजावुर में सबसे अधिक भ्रमणशील स्थल बृहदीश्वर मंदिर है, जिसे 11 वीं शताब्दी में प्रसिद्ध चोल शासक,राज राजा चोल द्वारा बनवाया गया था। वर्ष 1987 में यूनेस्को विश्व विरासत स्थल के रूप में घोषित इस बृहदीश्वर मंदिर में भगवान शिव की आराधना होती है।
यहाँ एक अन्य लोकप्रिय गंतव्य स्थल तंजावुर मराठा पैलेस है। नायकों के शासन काल में बना यह महल,1674 ई. से 1855 ई.तक यहां के शासकों,भोंसले परिवार, के सरकारी निवास के रूप में उपयोग में आता रहा। यह बात दिलचस्प है कि जबकि अधिकतर तंजावुर मराठा राज्यों को ब्रिटिश राज नें 1799 में अपने में शामिल कर लिया था, लेकिन मराठों का इस महल और इसके आसपास के किलों पर अधिकार बना रहा।
सरस्वती महल पुस्तकालय इसी महल के अंदर स्थित है,और यहां कागज और खजूर के पत्तों पर लिखी गयी तीस हजार से अधिक भारतीय और यूरोपीय पांडुलिपियों का संग्रह है। इसके अलावा महल के अंदर राजराजा चोल आर्ट गैलरी भी है। गैलरी के अंदर, नौवीं से बारहवीं शताब्दियों तक की पत्थर एवं कांस्य की मूर्तियों का एक बड़ा संग्रह है।
सफरोजी द्वितीय नें 1779 में महल उद्यान परिसर में श्वार्ट्ज चर्च का निर्माण करवा कर डेनमार्क मिशन के रेवरेंड सीवी श्वार्ट्ज के प्रति अपने सम्मान को प्रकट किया है,एवं यह पर्यटकों के बीच एक खास लोकप्रिय स्थल है।
अलौकिकता से भरपूर एक रहस्यमयी इतिहास
कुछ विद्यानों का मानना है कि 'तंजावुर' नाम,तंजन 'शब्द से उत्पन्न हुआ है। हिंदू पौराणिक कथाओं में “तंजन” एक प्रमुख दानव को कहा गया है। माना जाता है कि हिंदू देवता, विष्णु नें इस राक्षस या असुर को, इसी स्थान पर जहां यह शहर है, मारा था। शहर का नाम उस राक्षस की आखिरी इच्छा के मुताबिक उसी के नाम पर रखा गया है।
इसके नाम के पीछे एक और मान्यता है कि यह शब्द 'थन-सेई-ऊर', अर्थात 'नदियों और हरे-भरे धान के खेतों से घिरे स्थान'से उत्पन्न हुआ है। “तंजम“ शब्द, इसके नाम की उत्पत्ति का एक स्रोत और है।' तंजम ' शब्द का मतलब “शरण” है; चोल शासक करिकालन को उस समय समुद्री बाढ़ आ जाने के कारण पूम्पुहार नाम से अपनी राजधानी को तंजावुर में स्थानान्तरित करने को मजबूर होना पड़ा था।
त्योहार एवं कला
जनवरी और फरवरी महीने के दौरान हर साल आयोजित होने वाले संगीत समारोह, याने त्यागराज आराधना, भी तंजावुर में आयोजित होता है।14 से 16 जनवरी तक यहां पोंगल त्यौहार भी मनाया जाता है। अन्नाई वेलनकानी त्योहार अगस्त व सितम्बर में आयोजित होता है, जबकि प्रतिवर्ष अक्टूबर में राज राजा चोल की जन्म दिन यहां साथिया थियुविजा' उत्सव में उत्साह के साथ मनाया जाता है।
कला प्रेमी, तंजौर चित्रकारी को देखकर अवश्य ही आनंदित हों उठेंगे। यह चित्रकारी शास्त्रीय दक्षिण भारतीय चित्रकला का एक प्रमुख अंग है। इसको इसी के नाम पर नामित किया गया है। यह शहर रेशम की बुनाई एवं संगीत वाद्ययंत्र के निर्माण का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां उत्पादित रेशमी साड़ियां अपनी गुणवत्ता और उत्कृष्टता के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध हैं।
क्या उम्मीद करें
तंजावुर के निवासियों का मुख्य व्यवसाय जो अब पर्यटन और सेवा है, पूर्व में मुख्य रूप से परम्परागत व्यवसाय कृषि रहा है। तमिलनाडु के ‘धान का कटोरा' के रूप में प्रसिद्ध तंजावुर में, धान, नारियल, जिंजली, केला, हरे चने की खेती, मक्का और गन्ने की खेती जैसी फसलों को खेती होती है। शहर तथा आसपास के प्रमुख आकर्षणों में संगीत महल, मनोरा किला, ब्रहदीश्वर मंदिर, आर्ट गैलरी, शिव गंगा मंदिर, श्वार्ट्ज चर्च, संगीत महल पुस्तकालय, विजयनगर किला तथा भगवान मुरुगन मंदिर शामिल हैं।
तंजावुर कैसे पहुंचे
कावेरी डेल्टा में स्थित,यह शहर 36 किलोमीटर तक फैला हुआ है। तंजावुर, इरोड, वेल्लोर, कोच्चि, ऊटी समेत अन्य मुख्य शहरों से अच्छी तरह से उत्कृष्ट सड़कों के माध्यम से जुड़ा हुआ है। एक उप नगरीय सार्वजनिक परिवहन प्रणाली शहर के अंदर संचालित हो रही है, तथा सरकारी और निजी दोनों प्रकार की बसें प्रमुख शहरों और गांवों में नियमित से चलती हैं।
तंजावुर मौसम
तंजावुर में जलवायु, निकट के ज्यादातर अन्य शहरों की तरह ही है, तथा गर्मियों के दौरान, मुख्य रूप से गर्म और आर्द्र रहता है। दक्षिण पश्चिम मानसून में वर्षा, पूर्वोत्तर मानसून के दौरान प्राप्त बारिश की तुलना में अधिक होती है। बाद वाले मौसम की वर्षा इस जिले के लिए सहायक सिद्ध होती है, क्योंकि पश्चिमी घाट इस समय के दौरान कावेरी नदी को भरने में मदद करते हैं।
सरकारी के साथ-साथ निजी उद्यमों के माध्यम से अच्छी तरह से रहने की सुविधा भी शहर में कहीं भी आसानी से उपलब्ध है। तंजावुर में बहुत सारे होटलों में बड़ी संख्या में पर्यटकों तथा तीर्थयात्रियों को पास ही के स्थानों में ठहरने की सुविधा उपलब्ध है, तथा इस प्रकार पर्यटकों को ठहरने की समस्या से भी निजात मिल जाता है।



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