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यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में शामिल भारत के पर्वतीय रेलवे, जहां मिलती है स्वर्ग जैसी अनुभूति

पर्वतीय रेलवे देश का एक ऐसा रेलवे है, जो ना सिर्फ लोगों के यातायात के काम आता है बल्कि पहाड़ों का गौरव भी माना जाता है। इस रास्ते से गुजरने पर आपको ये ट्रेनें अद्भुत पहाड़, सुनहरे झरने और प्राकतिक नजारों का भी परिदृश्य दिखलाती है। यही कारण है कि इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में शामिल किया गया है।

यूनेस्को क्या है

यूनेस्को एक साइट है जिसके अंतर्गत उन स्थानों को संरक्षित किया जाता है, जो अपने सांस्कृतिक, प्राकृतिक, और आध्यात्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। इन साइटों में विश्व स्तर पर पहचान हासिल करने वाले धार्मिक व ऐतिहासिक भवन, पुरातात्विक अवशेष या स्थल, कला और वास्तुकला से परिपूर्ण भवन या संरचना, आदि शामिल है, जो अपने आप में अद्भुत है।

mountain railways

इस आर्टिकल के माध्यम से आज हम भारत के तीन ऐसे पर्वतीय रेलवे के बारे में बताने जा रहे हैं, जो यूनेस्को की विश्व धरोहर के रूप में तो शामिल है ही, इसके अलावा ये देश के सबसे प्रसिद्ध रेलवे भी है, जिसका उल्लेख यहां किया गया है -

1. कालका-शिमला पर्वतीय रेलवे

1. कालका-शिमला पर्वतीय रेलवे

कालका-शिमला रेलवे, उत्तर भारत में चलने वाली एक नैरो गेज (छोटी लाइन- 2.5 फीट) रेलवे है, जो हरियाणा के कालका रेलवे स्टेशन से हिमाचल से शिमला रेलवे स्टेशन तक चलती है। इस बीच ये ट्रेन करीब 96 किमी. का सफर तय करती है। इस रेलवे लाइन के लिए एक पत्रकार ने आइडिया दिया था, जिसकी शुरुआत साल 1903 में हुई थी। इस पूरी दूरी में पर्यटक प्रकृति के शानदार नजारों को देख सकते हैं। इस बीच हिमालय की गोद में बसी प्राकृतिक पहाड़ियां, अद्भुत झरने और बर्फीली से ढके हुए पहाड़ व कटीले वृक्षों की श्रृंखला भी देखने को मिलती है, जो काफी शानदार और खूबसूरत बनाती है। इसे साल 2008 में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में शामिल किया गया था।

2. नीलगिरी पर्वतीय रेलवे

2. नीलगिरी पर्वतीय रेलवे

नीलगिरी पर्वतीय रेलवे, भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित है, जो 46 किमी. तक एक शानदार सफर का अनुभव कराती है। इसकी शुरुआत साल 1908 में की गई थी, जिसका संचालन पहले मद्रास रेलवे द्वारा किया जाता था। इस रेलवे का संचालन आज भी भाप इंजनों द्वारा किया जाता है, जो अपने आप में ही एक रोमांचक भरा है। ये रेलवे लाइन पश्चिमी घाट के शानदार दृश्यों के लिए जानी जाती है। इस दौरान पर्यटकों को चाय के बागान, झरने और प्राकृतिक दृश्यों का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। इस बीच ये रेलवे लाइन करीब 16 टनल्स, 200 से अधिक गुफाएं और 250 से अधिक पुलों (ब्रिज) से होकर गुजरती है। शाहरूख खान की फिल्म 'दिल से' का गाना 'चल छैया-छैया' इस रेलवे लाइन की ट्रेन पर फिल्माया गया था। इसे साल जुलाई 2005 में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में शामिल किया गया था।

3. दार्जिलिंग पर्वतीय रेलवे

3. दार्जिलिंग पर्वतीय रेलवे

दार्जिलिंग पर्वतीय रेलवे, भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल का एक रेलवे लाइन है, जो पर्यटकों (यात्रियों) को एक पहाड़ी यात्रा की सैर कराता है। यह एक नैरो गेज (छोटी लाइन- 2 फीट) रेलवे है, जो करीब 78 किमी. तक न्यू जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग के बीच चलती है। इसकी शुरुआत साल 1881 में किया गया था। यह ट्रेन कुछ खूबसूरत घाटियों से गुजरती है, जो मानसून के समय में प्राकृतिक सुंदरता का एक अद्भुत नजारा दिखाता है, जिससे ना सिर्फ पर्यटक इसकी ओर आकर्षित होते हैं बल्कि बार-बार इस ट्रेन से यात्रा करने की इच्छा भी जाहिर करते हैं। इस दौरान दार्जिलिंग के सुंदर चाय के बागान, खूबसूरत पहाड़ियां और मनोरम नजारों का संगम देखने को मिलता है। इसे साल 1999 में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में शामिल किया गया था।

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