कहा जाता है कि बादामी के पास स्थित बनशंकरी मंदिर का निर्माण 7 वीं शताब्दी में कल्याण के चालुक्यों ने किया था। स्कंद पुराण तथा पदम पुराण के अनुसार इस मंदिर के मुख्य देवता जिन्होंने बनशंकरी में दुर्गमासुर नाम के राक्षस को मारा था, देवी पार्वती का अवतार हैं जो चालुक्यों की कुलदेवी थी।
बनशंकरी मंदिर में देवी की मूर्ति काले पत्थर से बनाई गई है जो सिंह पर बैठी है तथा इनके पैरों के नीचे राक्षस दिखाया गया है। देवी के आठ हाथों में त्रिशूल, घंटा, कमलपत्र, डमरू, खडग – खेता और वेद दिखाए गए हैं। मूल रूप से 7 वीं शताब्दी में बने इस बनशंकरी मंदिर का निर्माण मराठा वंश के एक सरदार परशुराम आगले ने किया था।
यह प्राचीन मंदिर वास्तुकला की द्रविड़ियन शैली को दर्शाता है। पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे जनवरी और फरवरी के महीनों में इस मंदिर की सैर करें क्योंकि स्थानीय लोग पौष के महीने में यहाँ एक उत्सव मनाते हैं। तिलकारन्य जंगल में स्थित इस मंदिर का नाम दो शब्दों बन और शंकरी से मिलकर बना है पहले शब्द का अर्थ है जंगल तथा दूसरे शब्द का अर्थ है भगवान शिव जो देवी पार्वती के पति हैं।



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