यह करनाल से 11 किलोमीटर और तरौरी से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, नारायणा भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। तरौरी में ही शहाब-उद-दीन मुहम्मद घूरी, जिन्हें मोहम्मद बिन सैम कहते थे, को दिल्ली के शासक पृथ्वीराज चौहान ने 1191 ई. में हराया था।
हालांकि वे अगले ही साल वहां से लौट आये थे। संघर्ष विराम का वादा करके पहले उन्होंने राजपूतों को लालाच दिया, ताकि वे ढीले पड़ जायें। फिर उन्होंने उनकी सामान्य दिनचर्या का फायदा लड़ाई में उठाया। राजपूत सैनिक सुबह 3 बजे उठते थे प्रक्षालन प्रदर्शन करते थे फिर स्नान और नाश्ता करते थे।
उसके बाद वे अपने हथियारों को लेकर सूर्योदय से पहले ही मुस्लिम सैन्य बलों से लड़ने के लिये निकल पड़ते थे। मोहम्मद घूरी यह बात जानता था और उसने राजपूत सेना पर सुबह प्रक्षालन के वक्त ही हमला कर दिया। वे खाली पेट थे और हथियार रहित भी। बाकी जो कहते हैं, वह इतिहास है।



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