यह अभयारण्य 31.8 वर्ग किमी. के क्षेत्र में फैला हुआ है जो मनाली का मुख्य आकर्षण केंद्र है। इस सेंचुरी का उद्घाटन 26 फरवरी 1954 में किया गया था। इस अभयारण्य को पंजाब बर्ड और वाइल्ड एनीमलस प्रोटेक्शन एक्ट, 1933 के तहत खोला गया है।
इस अभयारण्य में कई प्रकार की चिडि़यां और जानवर हैं जो देश में काफी दुर्लभ है और सामान्यत: देखने को नहीं मिलते हैं। पर्यटक यहां आकर कश्मीरी उडन गिलहरी, हिमालय काला भालू, उड़ने वाली लोमड़ी, हिमालय का येलो थ्रोटेड मार्टन और हिमालय पाम सिवेट आदि कई प्रकार के जानवर देख सकते हैं जिनका कभी नाम भी नहीं सुना होगा।
इस सेंचुरी में जानवरों के अलावा पक्षी, स्तनधारी जीव, रेपटाइलस और चिडि़यां भी पाई जाती हैं। भारतीय हिरन, मस्क हिरन, स्ट्रिप येना, लियोपार्ड, मोनाल और ब्राउन भालू भी यहां दिख जाते हैं।



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