मुंगेर शहर बिहार में स्थित है तथा शायद यह बिहार का सबसे आकर्षक शहर है। पर्यटकों के लिए मुंगेर की यात्रा एक अच्छा विकल्प है। यहाँ पर्यटन के बहुत से आकर्षण है। यह शहर ऐतिहासिक समय से अपनी उपस्थिति दर्शाता है तथा 1762 में कासिम अली खान के शासन में यह शहर बंगाल की राजधानी था।
मुंगेर शहर के नाम के बारे में कई मतभेद हैं। यह बात ध्यान रखने लायक है कि प्रथम विश्व युद्ध के समय मुंगेर शहर में ही कारतूस बंदूकों का निर्माण किया गया। यहाँ तक कि भारत चीन युद्ध के समय भी इस बंदूक के कारखाने ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मुंगेर शहर सुंदर दृश्यों से परिपूर्ण है क्योंकि यह गंगा नदी के किनारे स्थित है। शहर के निकट स्थित दिव्य घाटों का दृश्य सम्मोहित करता है।
मुंगेर में पर्यटन के प्रमुख आकर्षणों में मुंगेर किला, बिहार स्कूल ऑफ योग, सीता कुंड, खड़गपुर झील, पीर शाह नफाह दरगाह, भीमबंद वन्य जीवन अभयारण्य, श्री कृष्ण वाटिका, शाह मुस्तफ़ा सूफ़ी की कब्र, और दिलवारपुर शामिल हैं। मुंगेर ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक स्थलों से समृद्ध है जिसका अनुभव अवश्य लेना चाहिए।
मुंगेर पर्यटन कई उत्साही पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। यहाँ पर्यटन का मुख्य आकर्षण यहाँ की वास्तुकला के कारण है जैसे मुंगेर का किला जो एक टीले पर बना हुआ है तथा मध्यकालीन युग से यहाँ स्थित है।
बिहार स्कूल ऑफ योग भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है तथा यह संपूर्ण विश्व में योग के निर्देशों के लिए प्रसिद्ध है। इस स्कूल का उद्देश्य योग के द्वारा व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारना है। धार्मिक महत्व के स्थानों में सीता कुंड, खड़गपुर झील, पीर नफाह मस्जिद, रामेश्वर कुंड आदि शामिल है।
मुंगेर लोहे के काम की विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है तथा ढलवां लोहे से बनी हुई वस्तुएं यहाँ की विशेषता है। यहाँ छठ पूजा, दुर्गा पूजा, रक्षा बंधन और क्रिसमस के त्योहार मनाए जाते है।
मुंगेर की यात्रा के लिए उत्तम समय
गर्मियों के मौसम में मुंगेर बहुत गर्म और सूखा तथा ठंड में मौसम में अधिक ठंडा होता है। यहाँ मानसून का मौसम खुशनुमा होता है अत: सितंबर से मार्च के बीच का समय यहाँ की यात्रा के लिए उपयुक्त समय है।
मुंगेर कैसे पहुंचे
यह शहर रास्ते, रेलमार्ग और हवाई मार्ग के द्वारा अच्छे से जुड़ा हुआ है।



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