पालक्कड़ किला, जिसे टीपू के किले के नाम से भी जाना जाता है, पालक्कड़ जिले की लोकप्रिय ऐतिहासिक इमारत है। सन् 1766 में मैसूर के महान राजा हैदर अली द्वारा निर्मित यह किला शहर के केन्द्र में स्थित है और सड़क द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।
मैसूर के राजाओं द्वारा किले का उपयोग महत्वपूर्ण सैनिक गतिविधियों के लिये किया जाता था। किले के पास में एक खुला मैदान स्थित है जिसे स्थानीय लोग कोट्टा मैदानम् या किले का मैदान के नाम से जानते हैं। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार यह मैदान टीपू सुल्तान का अस्तबल था जहाँ पर सेनाओं के जानवर पाले जाते थे। वर्तमान में इस मैदान का प्रयोग सभाओं, खेल प्रतियोगिताओं और प्रदर्शनियों के लिये होता है।
किले के आसपास के क्षेत्र में प्रमुख आकर्षणों में भगवान हनुमान को समर्पित मन्दिर, शहीद स्तम्भ, जिला उपकारागार और भरतीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित एक खुला प्रेक्षागृह शामिल हैं।
समय – प्रातः 9 बजे से साँय 5 बजे तक (सभी दिनों में)



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