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होम » स्थल » चिकमंगलूर » आकर्षण
  • 01माणिक्यधारा जलप्रपात

    अगर समय मिले तो यात्री चिकमंगलूर से 40 किमी दूर केमनहगंडी मार्ग पर बाबा बूदन गिरी हिल्स के नजदीक स्थित स्थमाणिक्यधारा जलप्रपात जा सकते हैं। शोला वन के केन्द्र में स्थित यह जलप्रपात हिन्दुओं के साथ ही मुस्लिमों का भी एक पवित्र स्थल माना जाता है। माणिक्यधारा जिसका...

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  • 02कोदंडा रामास्वामी मंदिर

    चिकमंगलूर आये हुए यात्री कोदंडा मंदिर भी जा सकते हैं। यह मंदिर फरवरी माह में यहां आयोजित होने वाले अपने वार्षिकोत्सव(जात्रा) के लिए लोकप्रिय है। यह विरासत स्मृति स्थल तीन चरणों में पूरा हुआ था। कोदंडा रामास्वामी मंदिर होयसल वास्तुकला शैली का प्रतिनिधित्व करता है,...

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  • 03अय्यनकेरी झील

    अय्यनकेरी झील

    चिकमंगलूर की यात्रा पर आये आगन्तुकों को इस टाउन से 20 किमी दूरी पर स्थित अय्यनकेरी झील देखने की सलाह रहती है। यह झील मलनाड में शांत एवं खूबसूरत वातावरण के मध्य स्थित है तथा कर्नाटक की दूसरे स्थान की सबसे बड़ी झील है।इसे 12वीं सदी में इस इलाके के उपजाऊपन को बनाये...

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  • 04बाबा बूदन गिरि

    चिकमंगलूर की यात्रा में यात्रियों को अपनी वन श्रंखलाओं के लिए मशहूर बाबा बूदन गिरी पहाड़ियों को अवश्य देखना चाहिए। दत्तागिरी पर्वतीय श्रंखला (इनाम दत्तात्रेय पीठ) के नाम से जानी जाने वाला यह स्थान 1895 मीटर की ऊंचाई पर है। यह टाउन से लगभग 28 किलोमीटर की दूरी पर है...

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  • 05मुथोडी वन कैम्प

    मुथोडी वन कैम्प

    समय मिलने पर यात्री मुथोडी फारेस्ट कैम्प देख सकते हैं। इसे भद्रा वन्यजीव अभ्यारण्य का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यह साइट चिकमंगलूर से 32 किमी दूरी पर स्थित है। तानिगबिलू, तक्कावली तथा हेब्बी भद्रा वन्यजीव अभ्यारण्य के अन्य हिस्से हैं।

    मुथोडी...

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  • 06अमरूतेश्वर मंदिर

    चिकमंगलूर की यात्रा के दौरान समय मिलने पर आगन्तुक इस टाउन के उत्तर में 67 किमी दूर स्थित अमरूतेश्वर मंदिर भी देख सकते हैं। यह तीर्थ स्थल 1196 में वीर बल्लाल द्धितीय (होयसल राजा) के शासनकाल के दौरान बनवाया गया था। मंदिर का नामकरण इस मंदिर के शिल्पी, अमरूतेश्वर...

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  • 07मुलायनगिरी श्रंखलाएं

    समय मिलने पर चिकमंगलूर आने वाले आगंतुकों को मुलायनगिरी श्रंखला जो कि कर्नाटक की सबसे ऊंची चोटी है,जरूर देखनी चाहिए। हिमालय से नीलगिरी तक चेम्ब्रा, बनौरा तथा वेलारी माला चोटियों से पीछे मुलायनगिरी को सबसे ऊंची चोटी के रूप में रिकार्ड किया गया है। इस स्थान का तापमान...

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  • 08केन्द्रीय कहवा शोध संस्थान

    केन्द्रीय कहवा शोध संस्थान

    चिकमंगलूर की यात्रा पर गये पर्यटकों को यहां 1915 में स्थापित केन्द्रीय कहवा शोध संस्थान देखना चाहिए। सी.सी.आर.आई की स्थापना कोप्पा प्रयोगशाला में पत्तियों की बीमारी, जो कहवा संयत्र को प्रभावित कर रही थी, को दूर करने के लिए की गई थी। यह संस्थान 130 हेक्टेयर क्षेत्र...

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