जगतसुख गांव जिसे पहले कुल्लू की राजधानी के नाम से जाना जाता था। आज भी इलाके का सबसे बड़ा गांव है। जहाँ आज भी कई सरे धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। ये जगह ख़ास तौर से एक पुराने शिव मंदिर के लिए भी जानी जाती है जो शिखर शैली में बना हुआ हैजो साथ ही पिरामिड नुमा भी है।
इस गाँव में एक अन्य मंदिर भी है जो हिन्दू देवी संध्या देवी को समर्पित है। इस गाँव में शर्वाली देवी का भी एक मंदिर है जिसमें लोगों की गहरी आस्था है। यहाँ मिलने वाले मंदिरों में अगर गौर किया जाये तो पता चलता है की यहाँ के सभी मंदिर सिखर आकृति के हैं और ये भी कहा जाता है की यहाँ के सारे मंदिर 8 वीं सदी में बने थे।



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