पतनमतिटटा – कला, संस्कृति और धर्म की एक झलक

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पतनमतिटटा केरल के दक्षिणी भाग में स्थित है। यह इस ईश्वरीय प्रदेश का सबसे छोटा जिला है। विकास की गति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस जिले को 1 नवम्बर 1982 में बनाया गया था। अब यह तेजी से प्रगति करता हुआ एक व्यावसायिक शहर है। इस जगह का नाम दो शब्दों 'पतनम' और 'तिटटा' से मिलकर बना है। (दोनों शब्दों को सामूहिक अर्थ 'नदी के किनारे दस घरों का समूह')।

पतनमतिटटा के आस पास के स्थल

पतनमतिटटा केरल के दक्षिणी भाग में स्थित है। यह इस ईश्वरीय प्रदेश का सबसे छोटा जिला है। विकास की गति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस जिले को 1 नवम्बर 1982 में बनाया गया था। अब यह तेजी से प्रगति करता हुआ एक व्यावसायिक शहर है। इस जगह का नाम दो शब्दों 'पतनम' और 'तिटटा' से मिलकर बना है। (दोनों शब्दों को सामूहिक अर्थ 'नदी के किनारे दस घरों का समूह')।

पतनमतिटटा अपने नौका दौड़, धार्मिक तीर्थों और सांस्कृति प्रशिक्षण केन्द्रों के कारण प्रमुख पर्यटन केन्द्र है। इस जगह को अक्सर 'केरल का धर्मिक राजधानी' कहा जाता है। अयप्पा देवता का घर सबरीमाला यहीं पर है जहाँ पर प्रति वर्ष समस्त भारत से लाखों भक्त आते हैं। साथ ही यह स्थान कला की परम्पराओं और संस्कृति के मामले में धनी है। इस समृद्ध कला में दस दिवसीय रीतीय नृत्य पदायनी शामिल है। इसे कदमानित्ता देवी मन्दिर में किया जाता है। पतनमतिटटा वास्तुविद्या गुरूकुलम के लिये भी प्रसिद्ध है जिसका उद्देश्य वास्तुविद्या और भित्ति चित्रों का संरक्षण और प्रोत्साहन देना है।

एक अन्य उल्लेखनीय स्थानीय कला का स्वरूप 'अरनमुला कन्नडी' है। इस कला के अन्तर्गत हाथ से धातु-मिश्रण से दर्पण का किया जाता है। दर्पण निर्माण की इस कला को पारिवारिक स्तर पर गुप्त रखा जाता है और केवल एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तान्तरित किया जाता है। सबरीमाला मन्दिर के अलावा आप श्रीवल्लभ मन्दिर, पुरूमाला के रूढिवादी चर्च मलंकरा, कोडूमॉन चिलन्थियम्बलम, पलियक्कारा चर्च, कवियूर महादेव मन्दिर और प्रसिद्ध स्वतन्त्रता सेनानी अदूर वेलू थम्पी देवा की मूर्ति वाले स्थानों में भी जा सकते हैं।

पतनमतिटटा का मौसम और कैसे पहुंचें यहाँ

हालाँकि इस छोटे से शहर में ऊष्णकटिबन्धीय जलवायु मिलती है लेकिन सर्दियों का मौसम यहाँ की यात्रा के लिये सर्वश्रेष्ठ है। आप यहाँ वायु, रेल और सड़क मार्गों से आ सकते हैं। पतनमतिटटा में आप प्रकृति की गोद में आराम करने और यहाँ के मन्दिरों और तीर्थस्थलों में शाँति की तलाश में आ सकते हैं।

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