अमरनाथ यात्रा 2026 को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। जम्मू-कश्मीर के गृह विभाग ने इस साल की यात्रा के लिए सभी हेलीकॉप्टर सेवाओं को सस्पेंड कर दिया है। इसका सीधा मतलब है कि अब श्रद्धालुओं को पवित्र गुफा तक पहुंचने के लिए बालटाल या पहलगाम के रास्तों से पैदल ही चढ़ाई करनी होगी। 3 जुलाई से शुरू हो रही इस यात्रा के लिए श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) ने भक्तों को सलाह दी है कि वे अभी से पैदल यात्रा के लिए खुद को तैयार कर लें।
श्रद्धालु अपनी इस आध्यात्मिक यात्रा के लिए बालटाल या पहलगाम में से कोई भी रास्ता चुन सकते हैं। बालटाल का रास्ता छोटा है, लेकिन यहां चढ़ाई काफी खड़ी है जिससे आप जल्दी पहुंच सकते हैं। वहीं, पहलगाम का रास्ता थोड़ा लंबा है लेकिन यहां चढ़ाई धीरे-धीरे होती है, जिससे 'माउंटेन सिकनेस' का खतरा कम रहता है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के तहत, प्रशासन ने डेली विंडो और होल्डिंग-गेट के लिए सख्त समय सीमा तय की है।

Amarnath Yatra 2026: परमिट और हेल्थ से जुड़े जरूरी नियम
यात्रा पर जाने वाले हर श्रद्धालु के पास अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाणपत्र (CHC) होना जरूरी है। इसके साथ ही, बेस कैंप से रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) टैग लेना भी अनिवार्य कर दिया गया है। इन टैग्स की मदद से ऊंचाई वाले संवेदनशील इलाकों में आपकी लोकेशन ट्रैक की जा सकेगी। ध्यान रहे कि आपकी तय तारीख से ठीक सात दिन पहले परमिट रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया बंद कर दी जाएगी।
नेशनल हाईवे 44 (NH-44) पर सभी वाहनों को सुरक्षा काफिले (convoy) के तय समय का पालन करना होगा। हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध न होने के कारण इस बार खच्चर, पालकी और पोर्टर्स की मांग काफी बढ़ जाएगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बेस कैंप पर इन सेवाओं की दरें पहले से तय कर दी गई हैं ताकि कोई ज्यादा पैसे न वसूल सके। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षाकर्मी इन ट्रांसपोर्ट हब पर लगातार निगरानी रखेंगे।
| खासियत | बालटाल रूट | पहलगाम रूट |
|---|---|---|
| कुल दूरी | 14 किलोमीटर | 32 किलोमीटर |
| कठिनाई का स्तर | ज्यादा और खड़ी चढ़ाई | मध्यम और क्रमिक चढ़ाई |
| यात्रा का समय | 1 पूरा दिन | 3 से 4 दिन |
इस साल बालटाल और नुनवान बेस कैंप में ठहरने की व्यवस्था पर कड़ी नजर रखी जा रही है। पैदल चलने वाले यात्रियों के लिए टेंट और लंगर (सामुदायिक रसोई) की पूरी तैयारी है। चढ़ाई के दौरान किसी भी आपात स्थिति से बचने के लिए अपने साथ जरूरी दवाएं और छोटे ऑक्सीजन सिलेंडर जरूर रखें। यात्रा शुरू करने से पहले मौसम का ताजा अपडेट लेना न भूलें।
ऊंचाई वाले इलाकों में 'एक्यूट माउंटेन सिकनेस' (AMS) का खतरा बना रहता है। पहाड़ों के बदलते मिजाज को देखते हुए अपने साथ भारी ऊनी कपड़े और रेनकोट जरूर रखें। रजिस्ट्रेशन काउंटर पर दी जाने वाली पुलिस एडवाइजरी और मौसम की जानकारी का हमेशा पालन करें। शारीरिक रूप से फिट रहकर ही आप बाबा बर्फानी के दर्शन सुरक्षित और सुखद तरीके से कर पाएंगे। हेलीकॉप्टर सेवा बंद होने से यह यात्रा एक बार फिर अपने पारंपरिक स्वरूप में लौट आई है।



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