वृंदावन रोड स्टेशन और पलवल स्टेशन के बीच कोसीकलां स्टेशन के पास सिग्नल लाल दिखा और 160 किमी की रफ्तार से पटरी पर दौड़ रही वंदे भारत एक्सप्रेस पल भर में खुद-ब-खुद रुक गयी। ट्रेन को रोकने में न तो ड्राईवर ने कुछ किया और न ही ट्रेन के रुकने के बाद वह परेशान हुए।
बल्कि वंदे भारत एक्सप्रेस में इस तरह से खुद ब्रेक लग जाने की वजह से रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों के चेहरे पर एक मुस्कान तैर गयी। हो भी क्यों न...आखिर कवच सिस्टम का सफल ट्रायल जो संपन्न हुआ।

हाल ही में ट्रेनों के सुरक्षित संचालन के लिए रेलवे प्रबंधन द्वारा ट्रेनों में लगायी जाने वाली कवच डिवाइस का वंदे भारत एक्सप्रेस पर ट्रायल किया गया। यह डिवाइस सिर्फ ट्रेन ही नहीं बल्कि सिग्नल के साथ मिलकर भी काम करता है। उत्तर प्रदेश के पलवल से वृंदावन रोड स्टेशनों के बीच सिग्नल पर कवच डिवाइस लगाने का काम पूरा हो चुका है।
माना जा रहा है कि यह डिवाइस ट्रेन दुर्घटनाओं को रोकने में मददगार साबित होगी। रेलवे बोर्ड की अध्यक्ष और सीईओ जया वर्मा सिन्हा ने उत्तर मध्य और उत्तर रेलवे के आला अधिकारियों के साथ वंदे भारत एक्सप्रेस में कवच सिस्टम का निरीक्षण किया।
160 किमी की रफ्तार से दौड़ने वाली 8 कोच की वंदे भारत एक्सप्रेस में सिन्हा स्वयं और रेलवे के अन्य अधिकारी सवार हो गये। वह सुबह 9.15 बजे पलवल स्टेशन से वंदे भारत एक्सप्रेस में सवार हुई। ट्रेन सुबह 9.38 बजे शोलाका स्टेशन पहुंची। ट्रेन में लगे कवच सिस्टम की वजह से ट्रेन को अगले स्टेशन होडल के आउटर पर लाल सिग्नल देख कर खुद से रुकना था। इस समय वंदे भारत एक्सप्रेस 160 किमी की रफ्तार से दौड़ रही थी।
ट्रेन ने जैसे ही सिग्नल लाल देखा तो बिना ड्राईवर के हस्तक्षेप के ही ट्रेन ने लगभग 1300 मीटर की दूरी पर खुद से ब्रेक लगा दिया। ट्रेन न सिर्फ रुकी बल्कि ड्राईवर को सतर्क करने के लिए आवाज भी करने लगी। इस समय ट्रेन में जया वर्मा सिन्हा के अलावा कई अन्य अधिकारी जैसे उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक, उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक, दिल्ली क्षेत्र के प्रधान मुख्य संकेत एवं दूरसंचार इंजीनियर, रेलवे बोर्ड के प्रधान कार्यकारी निदेशक और आगरा के मंडल रेल प्रबंधक आदि भी मौजूद थे।
कैसे काम करता है कवच सिस्टम? जानें यहां -
रेलवे के अधिकारियों ने इस ट्रायल को सफल करार दिया। बताया जाता है कि इस ट्रायल के सफल होने के बाद देश भर में आगरा और दिल्ली के बीच 125 किमी का यह खंड ही पूरे रेलवे नेटवर्क का एकमात्र हिस्सा है जहां ट्रेनें अधिकतम 160 किमी की रफ्तार से दौड़ सकेंगी। बाकी सभी खंडों पर अधिकतम 130 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ती है। बता दें, कवच सिस्टम जीपीएस के माध्यम से काम करता है।
यह ट्रेन के इंजन और सिग्नल दोनों पर लगायी जाती है। इस डिवाइस के माध्यम से ट्रेन के ड्राईवर को लगभग 1 किमी पहले ही सिग्नल के बारे में जानकारी मिल जाती है। यदि किसी कारणवश ड्राईवर इसके संदेशों पर ध्यान नहीं देता है तो सिस्टम सतर्क करने के लिए फिर से संदेश देती है और ट्रेन की गति को भी नियंत्रित करने लगती है। अगर जरूरत हुई तो यह सिस्टम ट्रेन में स्वतः ब्रेक भी लगा देती है।



Click it and Unblock the Notifications














