साल 2013 में भारत में पहली बार सीप्लेन को केरल में लॉन्च किया गया था। हालांकि यह काफी कम समय तक ही चला था, लेकिन इससे भविष्य के भारत की झलक मिल गयी थी। साल 2022 में अहमदाबाद में साबरमती रिवरफ्रंट से द स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (केवड़िया) के बीच नर्मदा नदी में चलने वाला सीप्लेन सबसे ज्यादा चर्चाओं में भी छाया हुआ था। लेकिन अब बारी गोवा की है।
गोवा में कई तरह की वाटर एक्टिविटी होती है। लेकिन अब इन एक्टिविटीज में सीप्लेन सर्विस भी शामिल होने वाला है। सिर्फ गोवा ही नहीं बल्कि जल्द ही पर्यटक हिल स्टेशन पर भी सीप्लेन की सवारी को एंजॉय करने की है। जी हां, अब हिमाचल प्रदेश के सबसे सुन्दर हिल स्टेशन डलहौजी में सीप्लेन सर्विस शुरू होने वाली है।

गोवा जाने के लिए सड़क मार्ग, रेल मार्ग और विमान (एयरपोर्ट) के अलावा भविष्य में जलमार्ग यानी सीप्लेन भी जुड़ने वाला है। तेज रफ्तार से पानी में उतर पाने की क्षमता रखने वाले सीप्लेन अरब सागर में उतरेंगे जिससे होकर गोवा आने-जाने वाले पर्यटकों को काफी सुविधाएं होने वाली हैं। वहीं दूसरी ओर डलहौजी तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को अभी पठानकोट से सड़क मार्ग से होकर डलहौजी तक का सफर पूरा करना पड़ता है।
डलहौजी का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट भी पठानकोट का गग्गल एयरपोर्ट ही है। लेकिन आने वाले सालों में अब आप सीधे डलहौजी जा सकेंगे, क्योंकि भारत सरकार ने डलहौजी को उन जगहों में चिह्नित किया है, जहां सीप्लेन की सेवाएं शुरू की जा सकती हैं। सिर्फ डलहौजी ही नहीं, बल्कि विमानन मंत्रालय (Aviation Ministry) की योजनाओं के मुताबिक भारत के अलग-अलग राज्यों में कुल 21 ऐसी जगहों को चिह्नित किया गया है जहां भविष्य में सीप्लेन की सेवाएं शुरू की जा सकती हैं।
हम उन सभी जगहों के बारे में आगे जरूर बताएंगे लेकिन उससे पहले आपको बताते हैं कि सीप्लेन (Seaplane) होता क्या है?
सीप्लेन (Seaplane) एक फिक्स्ड विंग्ड विमान होता है जिसे खासतौर पर पानी पर ही लैंड और टेकऑफ करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे न सिर्फ समुद्र बल्कि नदियों जैसे साबरमती, गंगा आदि के साथ-साथ बड़ी झीलों या जलाशयों से भी संचालित किया जा सकता है।

हाल ही में लोक सभा के एक सत्र के दौरान तत्कालिन केंद्रीय पर्यटन मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि पर्यटन मंत्रालय झीलों और नदियों में पर्यटन सुविधाओं सहित पर्यटन से संबंधित बुनियादी ढांचे के विकास के लिए राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्र सरकार की एजेंसियों को केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) द्वारा राष्ट्रीय जलमार्गों पर परिवहन के लिए विकसित बुनियादी ढांचे जैसे फेयरवे, टर्मिनल, जेटी और नेविगेशन सहायक उपकरण, का उपयोग नदी पर्यटन ऑपरेटरों द्वारा भी किया जाता है।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने उड़ान-3 परियोजना के तहत जल हवाई अड्डों से सीप्लेन के संचालन के साथ परिवहन का एक नया तरीका पेश किया है। 15 जून, 2021 को नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) और बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) ने भारत में सीप्लेन सेवाओं के विकास के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया।

गुजरात, असम, आंध्र प्रदेश, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा, हिमाचल प्रदेश और लक्षद्वीप की वो 21 जगहें जिन्हे, वाटर एयरोड्रोन (Water Aerodromes) यानी सीप्लेन के लिए चिह्नित किया गया है, के नाम निम्न हैं :
| Sr. No. | राज्य | वाटर एयरोड्रोम/सीप्लेन |
|---|---|---|
| 1 | अंडमान और निकोबार (UT) | स्वराज द्वीप (W) |
| 2 | अंडमान और निकोबार (UT) | लॉन्ग आइलैंड (W) |
| 3 | अंडमान और निकोबार (UT) | मायाबंदर (W) |
| 4 | अंडमान और निकोबार (UT) | शहीद द्वीप (W) |
| 5 | आंध्र प्रदेश | प्रकाशम बैरज (W) |
| 6 | असम | गुवाहाटी रिवरफ्रंट (W) |
| 7 | असम | काज़िरंगा |
| 8 | गोवा | नॉर्थ गोवा |
| 9 | गोवा | साउथ गोवा |
| 10 | गुजरात | द्वारका (W) |
| 11 | गुजरात | साबरमती रिवरफ्रंट (W) |
| 12 | गुजरात | स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (W) |
| 13 | हिमाचल प्रदेश | डलहौजी (W) |
| 14 | लक्षद्वीप | अगात्ती (W) |
| 15 | लक्षद्वीप | मिनीकॉय (W) |
| 16 | लक्षद्वीप | कावारत्ती (W) |
| 17 | लक्षद्वीप | कलपेनी (W) |
| 18 | लक्षद्वीप | बित्रा (W) |
| 19 | लक्षद्वीप | कदमत (W) |
| 20 | लक्षद्वीप | किल्तन (W) |
| 21 | लक्षद्वीप | बंगारम (W) |
*नोट : यहां W का अर्थ निर्माणाधीन (Work in Progress) है।



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