22 मई, 2024 को शाम 5:00 बजे पुणे से उत्तराखंड के लिए मानसखंड एक्सप्रेस की दूसरी यात्रा शुरू हुई, जिसमें 302 पर्यटक सवार थे। यह अनूठा यात्रा अनुभव उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की सुंदरता और सांस्कृतिक समृद्धि को दिखाने के लिए बनाया गया है। यह जगह इतिहास और प्राकृतिक वैभव से भरपूर जगह है, प्राचीन ग्रंथों में इसे मानसखंड के नाम से जाना जाता है।

सिर्फ गंतव्य तक पहुंचने ही नहीं कुमाऊँ का सार ढूंढती है यात्रा
यह ट्रेन योजनाबद्ध तरीके से ही आगे बढ़ती है, जो लोनावला, कल्याण, वसई, वापी, सूरत, वडोदरा, रतलाम और उज्जैन जैसे उल्लेखनीय शहरों से गुजरते हुए 24 मई को अपने अंतिम गंतव्य टनकपुर रेलवे स्टेशन पर पहुंचेगी। मगर रुकिये, यह यात्रा केवल गंतव्य तक पहुँचने के बारे में नहीं है, बल्कि कुमाऊँ क्षेत्र के जीवंत सार की खोज के बारे में है। इस खोज को सहज और समृद्ध बनाने के लिए IRCTC ने एक टूर पैकेज तैयार किया है जिसकी शुरुआती कीमत 28,020/- रुपये है।
यह पैकेज यात्रियों को प्रमुख तथा अनदेखे स्थलों को देखने अवसर प्रदान करता है, जिनमें पूर्णागिरि तथा हाटकलिका मंदिर, कसार देवी, कटारमल, कैंचीधाम, चित्तई गोलू मंदिर, जागेश्वर धाम, शारदा घाट, पाताल भुवनेश्वर मंदिर, नानकमत्ता गुरुद्वारा, भीमताल, नैनीताल, अल्मोड़ा, चकोरी, चंपावत का चाय बागान, बालेश्वर मंदिर तथा मायावती आश्रम शामिल हैं।
संस्कृति और आराम से भरी यात्रा
यह ट्रेन उत्तराखंड की समृद्ध विरासत का प्रमाण है। ट्रेन को राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, वास्तुकला, सांस्कृतिक उत्सव और आध्यात्मिक स्थलों को दर्शाने वाली तस्वीरों से सजाया गया है। ट्रेन में पेंट्री कार की सुविधा उपलब्ध है जो यह सुनिश्चित करता है कि यात्री अपनी पूरी यात्रा के दौरान ऑथेंटिक उत्तराखंडी व्यंजनों का आनंद ले सकें। यात्रा व्यवस्था में आराम को प्राथमिकता दी गई है। 3AC ट्रेन में एक कूप में केवल चार यात्रियों को अनुमति दी गई है, जिससे एक आरामदायक अनुभव सुनिश्चित होता है।
टनकपुर पहुंचने के बाद पर्यटकों को होटलों या होमस्टे में ठहराया जाएगा और वे अपने यात्रा कार्यक्रम के अनुसार स्थानों का दौरा करते हैं। पूरी ट्रिप के दौरान पर्यटकों के लिए टनकपुर, चंपावत/लोहाघाट, चौकोरी, अल्मोड़ा और भीमताल में रात को रुकने की व्यवस्था की जाएगी।
पर्यटन में एक नया अध्याय
उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड के पर्यटन सचिव/मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री सचिन कुर्वे ने इस पहल के प्रति अपना उत्साह व्यक्त करते हुए इसे भारत में एक समर्पित पर्यटक ट्रेन के माध्यम से कम-ज्ञात स्थानों पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक अग्रणी प्रयास बताया। मानसखंड एक्सप्रेस की पहली यात्रा की सफलता, जिसमें 280 पर्यटक शामिल हुए, ने इस अनूठे यात्रा अनुभव को जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करते हुए एक सकारात्मक माहौल बनाया।
ढोल, संगीत वाद्ययंत्र, आरती, तिलक और पुष्प वर्षा के साथ पर्यटकों का पारंपरिक मराठी स्वागत, गर्मजोशी और आतिथ्य को दर्शाता है जो उनका इंतजार कर रहा है। यह यात्रा न केवल एक भ्रमण का वादा करती है, बल्कि कुमाऊं को और भी करीब से देखने और समझने का भी वादा करती है, जो नए गंतव्यों की झलक पेश करती है और उत्तराखंड की शांत सुंदरता के बीच स्थायी यादें बनाने का अवसर प्रदान करती है।



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