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क्या है अहमदाबाद का इतिहास... जानिए कैसे स्थापित हुआ ये शहर

अहमदाबाद को 'भारत का मेनचेस्टर' भी कहा जाता है। बारिश के महीनों के अलावा बात की जाए तो यहां पूरे साल आपको गर्मी का माहौल देखने को मिलेगा। स्वतंत्रता की लड़ाई में भी इस शहर का काफी योगदान रहा है।

अहमदाबाद, भारत के गुजरात राज्य का सबसे बड़ा नगर है, जिसे अमदावाद या कर्णावती भी कहा जाता है। साबरनदी के किनारे पर बसा ये शहर गांधीनगर के पहले गुजरात की राजधानी हुआ करता था। अहमदाबाद को 'भारत का मेनचेस्टर' भी कहा जाता है। बारिश के महीनों के अलावा बात की जाए तो यहां पूरे साल आपको गर्मी का माहौल देखने को मिलेगा। स्वतंत्रता की लड़ाई में भी इस शहर का काफी योगदान रहा है। आजादी के पहले महात्मा गांधी द्वारा यहां साबरमती आश्रम बनाया गया था, जहां से कई स्‍वतंत्रता संघर्ष से जुड़े आंदोलनों की शुरुआत भी हुई है।

Ahmedabad

क्या है अहमदाबाद का इतिहास?

11वीं शाताब्दी में अणहिलवाड़ (आधुनिक पाटन) के शासक सोलंकी राजा कर्णदेव प्रथम के साथ अहमदाबाद का इतिहास शुरू हुआ, जिन्होंने भील राजा अशपल्ल या आशापाल के खिलाफ युद्ध छेड़ा और उनकी जीत के बाद साबरमती के किनारे कर्णावती नामक शहर की स्थापना की। फिर जब 13 वीं शाताब्दी में द्वारका के वाघेला राजवंश के नियंत्रण के अधीन गुजरात आया, तब दिल्ली सल्तनत ने गुजरात जीत उसपर कब्जा जमा लिया।

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15वीं शाताब्दी में शुरू हुआ मुस्लिम शासकों का राज

15वीं शाताब्दी की शुरुआत में यहां मुस्लिम मुज़फ्फरिद राजवंश द्वारा एक स्वतंत्र सल्तनत का शासन स्थापित किया और 1411 ईस्वी में सुल्तान अहमद शाह ने इस शहर का नाम बदलकर अहमदाबाद कर दिया और अपनी राजधानी घोषित कर दी, 1573 ईस्वी तक इस सल्तनत की राजधानी रही। यह शहर साबरमती नदी के किनारे पर बनाया गया था, जो अपनी विकासशील योजनाओं और वास्तुकला के लिए जाना जाता है।

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अकबर के शासन में बना व्यापार का मुख्य केंद्र

1573 ईस्वी में मुगल शासक अकबर द्वारा गुजरात पर कब्जा जमा लिया गया, तब अहमदाबाद व्यापार का मुख्य केंद्र बना और वस्त्र उद्योग की भी शुरुआत हुई। उस समय यहां के वस्त्र यूरोप तक निर्यात किए जाते थे। फिर 1630 ईस्वी में आए एक अकाल ने इस शहर को तबाह कर दिया और इसके बाद 1753 ईस्वी में मराठा जनरल रघुनाथ राव और दामजी गायकवाड़ ने इस शहर पर कब्जा जमाया और अहमदाबाद में मुगल शासन को समाप्त किया।

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अहमदाबाद और बंबई के बीच रेलवे संपर्क की शुरुआत

इसके बाद 1818 ईस्वी का वो दौर आया, जब इस पर ईस्ट इंडिया कंपनी की हुकूमत शुरू हुई और फिर इसे 1824 ईस्वी में एक सैन्य छावनी के रूप में स्थापित की गई। देखते-देखते 1864 ईस्वी का वो दिन आया, जब अहमदाबाद और बंबई (वर्तमान में मुंबई नाम से प्रसिद्ध) के बीच रेलवे संपर्क स्थापित किया गया, जिसके बाद से व्यापार को लेकर अहमदाबाद का विकास और तेजी से शुरू हुआ। फिर 1915 ईस्वी में जब महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका से वापसी की, तब साबरमती के किनारे एक आश्रम की स्थापित की, जिसे साबरमती आश्रम के नाम से जाना गया।

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अहमदाबाद से शुरू हुआ सत्याग्रह आंदोलन

यह आश्रम कई स्वतंत्रता आंदोलनों का केंद्र भी रहा। यही से महात्मा गांधी ने 1930 ईस्वी में नमक सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत किया, यह ब्रिटिश हुकूमत पर नमक कर लगाने के विरोध में किया गया आंदोलन था। यही वो समय था, जब उन्होंने कसम खाई कि जब तक भारत आजाद नहीं होगा, तब तक वे आश्रम नहीं लौटेंगे।

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