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प्यार की 6 खूबसूरत नायाब निशानियाँ जो अमर प्रेम की कहानियां दोहराती हैं

By Khushnuma

''कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता, कहीं जमीं तो कहीं आसमां नहीं मिलता''। प्यार, इश्क़ और मुहब्बत यह महज़ लफ्ज़ नहीं हैं, इन लफ़्ज़ों में छुपे हैं कई ऐसे एहसास जो मीठी-कड़वी यादें बनकर हमारे दिल को उन जज़्बातों से सरा-बोर कर देते हैं, जिनसे चाहते न चाहते हुए भी हम कभी पलकों पर आंसू ले आते हैं तो कभी होंठों पर मुस्कान। क्यूंकि 'इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपते'। जी हाँ दोस्तों आज मैं उन ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों के बारे में बताऊँगी जो अपनी अमर प्रेम गाथाओं से पूरे विश्व में जाने जाते हैं जिनकी कहानियां युगों-युगों से लोगों के बीच दोहराई जाती रही है।

चाहे हनीमून हो या फिर वेलेंटाइन अक्सर कपल्स इसी सोच में रह जाते हैं कि वह इस ख़ास दिन को ओर ख़ास बनाने के लिए कहाँ जाएँ ? आखिर प्यार की बात है और फिर इज़हार-ऐ-मुहब्बत भी करना है तो क्यों न ऐसी जगह जाया जाये जिससे एक पंथ दो काज हो जाएँ। जब-जब चाहत का इज़हार करने की बात आती है तो कई बार शब्द कम पड़ जाते हैं। दरअसल ये खूबसूरत एहसास प्यार में सिमट आते हैं जिन्हें शब्दों में बाँधा नहीं जा सकता। यहाँ आपकी मुश्किलें हल करती हैं यह अमर प्रेम की विशाल इमारतें। तो क्यों न हम उन ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों की सैर करें जो अमर प्रेम की निशानियाँ हैं जिनकी कहानी युगों युगों से दोहराई जाती रही हैं। ऐसे ही अमर प्रेम की गवाह हैं ये सात इमारतें तो कभी फुसत में सुनें आवाज़ इन आलीशान इमारतों के पत्थरों की।

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प्यार की 6 खूबसूरत नायाब निशानियाँ जो अमर प्रेम की कहानियां दोहराती हैं

plaits

बेहद खूबसूरत इमारत जो शाहजहाँ-मुमताज़ की मुहब्बत की गवाह है

ताज महल एक ऐसी इमारत जिसका नाम युगों युगों से अमर प्रेम कहानियों में लिया जाता है।इस मुहब्बत की अद्भुत निशानी को तो रवीन्द्रनाथ टैगोर ने 'अनंत काल के गाल पर आंसू' का नाम दिया है। तो क्यों न अपने पार्टनर के साथ विश्व भर में प्रसिद्ध और दुनिया का आठवां अजूबा कहा जाने वाला इस इमारत की सैर की जाए। प्रेम की ये खूबसूरत सफ़ेद संगमरमर से बनी धरोहर अमर प्रेम की कहानी बयां करता है जिसकी दीवारें प्रेम में डूबे आशिक शाहजहाँ की मुहब्बत को दोहराती हैं। जो आज भी चांदनी रात में शाहजहाँ की आवाज़ में हवाओं के झोंको के साथ अपनी मुहब्बत मुमताज़ को पुकारती हैं। वाकई इस खूबसूरत इमारत को देखकर ये प्रतीत होता है की मुमताज़ कितनी खूबसूरत रही होगी जिसकी मुहब्बत में गिरफ्तार शाहजहाँ ने ये आलिशान मक़बरा बनवाया। बेशक ये मक़बरा उस दर्द को कुरेदता है जिसमे एक आशिक़ तिल-तिल जलकर अपनी माशूका को ढूंढता रहा। इस विशाल इमारत में मुमताज़-शाहजहाँ का मक़बरा है।

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Arian Zwegers

देव और स्त्री के अनोखे मिलन का गवाह है खजुराहो

भारतीय मंदिरों की स्थापत्य कला व शिल्प में खजुराहो की अपनी एक अलग पहचान है। इसकी दो वजह हैं- पहली ये कला व शिल्प की दृष्टि से बे-मिसाल हैं ही और दूसरी ये कि स्थलों पर स्त्री-पुरूष प्रेम की जो आकृतियां गढ़ी हैं ऐसी खूबसूरत आकृतियां पूरे विश्व में कहीं देखने को नहीं मिलतीं। इन मंदिरों के बारे में बहुत से कयास लगाये जाते हैं कहा जाता है कि हेमवती नाम की एक ब्राह्मण कन्या एक रात स्नान कर रही थी तो चंद्रमा उसपर मोहित हो गए। दोनों का प्रेम परवान चढ़ा और देव व स्त्री के प्रेम मिलन से एक पुत्र ने जन्म लिया। बिनब्याही माँ होने के कारण हेमवती को ज़माने भर के तानों का सामना करना पड़ा और इस वजह से उसने घर छोड़ खजुराहो के जंगलों में शरण ली। यहीं उसका पुत्र बड़ा हुआ और राजा बना। चन्द्रमा का पुत्र होने के कारण उसका नाम चंद्रवंशी पड़ा। चंद्रवंशी ने अपनी अपमानित हुई माँ का सपना पूरा करने के लिए मंदिरों का निर्माण करवाया हेमवती ऐसे मंदिर बनवाना चाहती थी, जो इंसान की काम इच्छाओं को उजागर कर सकें। वह मानवीय इच्छाओं के खालीपन के एहसास को दर्शाना चाहती थी। इन मंदिरों का निर्माण तो राजा चंद्रवंशी ने करवाया पर इनको पूरा चंद्रवंशी के बाद आये शासकों ने करवाया। इस वेलेंटाइन को रोमेंटिक बनाने के लिए यहाँ आना एक अच्छा सफर साबित होगा। प्रेम के अनोखे किस्से और प्रेम में कामना का वास यहाँ बहुत खूबसूरती से झलकता है।

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Bgag

मांडू में बज-बहादुर और रानी रूपमती की कहानी आज भी गूंजती है

मांडू मध्यप्रदेश का एक ऐसा पर्यटनस्थल है, जो रानी रूपमती और बादशाह बाज बहादुर के अमर प्रेम का गवाह है। जो आज भी बाज बहादुर और उसकी रानी रूपमती की प्रेम गाथाएं कण-कण में सुनाता है। जहाँ पहुंचकर प्रेम लीन जोड़ों को प्रेम की अनोखी दास्ताँ उत्तेजित करेगी। कहा जाता है की रानी रूपमती नमर्दा की भक्त थीं वह प्रातः सुबह उठकर माँ नमर्दा के दर्शन करके ही अन्न-जल का सेवन करती थीं। जब बाज बहादुर ने रानी रूपमती के आगे विवाह का प्रस्ताव रखा तो रानी रूपमती ने बाज बहादुर के आगे एक शर्त राखी कि वह बाज बहादुर से तब विवाह करेंगी जब वह रूपमती के लिए एक ऐसा महल बनवायेंगे जिससे वो रोज़ाना माँ नमर्दा के दर्शन कर सकें। तब बाज बहादुर ने अपने प्रेम का इज़हार करते हुए रानी रूपमती के लिए एक आलिशान महल बनवाया। हालांकि वर्तमान में यह महल खण्डहर में तब्दील हो चुका है लेकिन आज भी मांडू के यह ऐतिहासिक खंडहर रानी रूपमती की आवाज़ में अपने बाज बहादुर को पुकारते हैं।

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Sachinkadam1

बाजीराव-मस्तानी की ऐतिहासिक इमारत

मुंबई से सड़क रास्ते से पांच घंटे और पुणे से 22 किलोमीटर समुद्रतल से ढाई हज़ार फिट की ऊंचाई पर तक़रीबन 25 एकड़ समतल ज़मीन पर कमल कुमुदिनियों से सुशोभित मीलों तक फैली बेलाताल झील के किनारे खड़े खूबसूरत ऐतिहासिक विशाल जैतपुर किले के भग्नावशेष आज भी पेशवा बाजीराव और उनकी खूबसूरत पत्नी मस्तानी के प्रेम की कहानी बयां करते हैं। बाजीराव-मस्तानी का प्रेम इतिहास की चर्चित प्रेम कहानियों में शुमार है। पेशवा ने विजातीय होते हुए भी मस्तानी को अपनी अन्य पत्नियों की अपेक्षा बे-पनाह मुहब्बत दी। पेशवा ने पूना में मस्तानी के लिए एक अलग महल बनवाया जिससे उसे 'मस्तानी महल' और 'मस्तानी दरवाजा' नाम दिया। जहां लेने से इंकार होता है और देने का आग्रह होता है वहीँ असली प्रेम पनपता है । बाजीराव मस्तानी के प्रेम के मार्ग पर बेशक कांटे बिछे थे फिर भी उन प्रेमियों ने अपने प्रेम का मूल्य अपने बलिदान से चुकाया । बाजीराव मस्तानी के प्रेम की गहराई अपरिमेय है । उनकी अमर प्रेमगाथा युगों युगों तक लोगों के ह्रदय में वास करेगी । पूना से २० मील दूर पाबल गाँव में मस्तानी का मकबरा उनके त्याग दृढ़ता तथा अटूट प्रेम का स्मरण दिलाता है।

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Abhishek727

फ़िरोज़ शाह तुगलक और गुजरी प्रेम को दर्शाता हरियाणा का गुजरी महल

हरियाणा के हिसार किले में स्थित गुजरी महल आज भी सुलतान फ़िरोज़ शाह तुगलक और उसकी प्रेमिका गुज़री की अमर प्रेम कथा गुनगुनाता है। गुजरी महल भले ही आगरा के ताजमहल जैसी भाव इमारत न हो लेकिन दोनों का निर्माण प्रेम धरोहर पर ही हुआ। 1354 में फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ ने अपनी प्रेमिका गूजरी के प्रेम में हिसार का गूजरी महल बनवाया जो महज़ दो साल में बनकर तैयार हो गया। गूजरी महल फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ ने गूजरी के रहने के लिए बनवाया था। जो निहायत ही खूबसूरत काले पत्थरों से बनवाया गया था। सुल्तान फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ और गूजरी की प्रेमगाथा बड़ी रोचक है।

शहज़ादा फ़िरोज़ शिकार खेलते-खेलते अपने घोड़े के साथ यहां आ पहुंचा। उसने गूजर कन्या को डेरे से बाहर निकलते देखा तो उस पर मोहित हो गया। गूजर कन्या भी शहज़ादा फ़िरोज़ से प्रभावित हुए बिना न रह सकी। अब तो फ़िरोज़ का शिकार के बहाने डेरे पर आना एक सिलसिला बन गया। दोनों की कहानी दिन प्रतिदिन परवान चढ़ती गई।

दिल्ली का सम्राट बनंते ही फ़िरोज़ शाह तुगलक ने गुजरी के लिए महल बनवाने की योजना बनाई। वह सोचने लगा की महल हिसार इलाके में महल किले में होना चाहिए जिसमे सुविधा के सारे सामान मौजूद हों और यह सब सोचते हुए उसने अपने प्रेम का इज़हार इस महल के साथ किया जो आज भी फ़िरोज़ शाह तुगलक और उसकी प्रेमिका गुजरी की अमर प्रेम कहानी सुनाता है।

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Lomita

प्रेमिका के प्यार का साक्षी है सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर

जब भी प्यार की निशानी की बात होती है तो ताज महल का नाम ज़हन में आता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत में एक ऐसा मंदिर है जिसे प्यार में डूबी एक रानी ने अपने प्रेमी के लिए बनवाया था। राजधानी से 85 किलोमीटर दूर सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर सिर्फ ऐतिहासिक स्मारक नहीं बल्कि प्रेम की अनोखी शिल्प कला भी है। रानी वैष्णव धर्मावलंबी वासटादेवी ने अपने पति (प्रेमी) की याद में इस विशाल स्मारक का निर्माण करवाया था। लाल ईंटों से बना नारी के मौन प्रेम का साक्षी लक्ष्मण मंदिर बिंदी सी चमक लिए अपने प्रेम का बखान बा-खूबी से करता है।

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