मनाली-लेह हाईवे एक बार फिर ट्रैफिक के लिए खुल गया है। बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) ने आधी रात को चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद इस रास्ते को बहाल कर दिया है। हाल ही में आई अचानक बाढ़ (Flash floods) की वजह से हाईवे के कई अहम हिस्से बंद हो गए थे, जिन्हें बीआरओ की टीमों ने रात भर मलबा हटाकर साफ किया। अब यात्री अटल टनल के रास्ते लाहौल और लद्दाख की अपनी यात्रा फिर से शुरू कर सकते हैं। हालांकि, अधिकारियों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है क्योंकि कुछ जगहों पर सड़क अभी भी संकरी है और वहां दोबारा दिक्कत आ सकती है।
झालमा नाला और दारचा-जिस्पा-सरचू वाले हिस्से में अभी भी ट्रैफिक धीमा है। ऊंचाई वाले इन दर्रों पर लगातार हो रही बारिश की वजह से हालात कभी भी बदल सकते हैं। लाहौल-स्पीति पुलिस ने बेहतर विजिबिलिटी के लिए केवल दिन के समय ही सफर करने की सलाह दी है। रात में सफर करने से बचें, क्योंकि तापमान गिरने के साथ ही विजिबिलिटी भी काफी कम हो जाती है। सुरक्षित सफर के लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा अपडेट्स पर नजर रखना बेहद जरूरी है।

मनाली-लेह हाईवे: कम बजट में ऐसे करें सफर की प्लानिंग
अगर आप बैकपैकर हैं, तो पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल कर इस सफर को 10,000 रुपये से भी कम में पूरा कर सकते हैं। हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (HRTC) की बसें यात्रा का सबसे किफायती जरिया हैं। इसके अलावा कीलोंग या जिस्पा से मिलने वाली शेयरिंग कैब भी 'वैल्यू-फॉर-मनी' ऑप्शन हैं। बजट का ख्याल रखने वाले ज्यादातर यात्री मनाली या कीलोंग में डॉरमेट्री हॉस्टल में रुकना पसंद करते हैं। इससे न केवल पैसे बचते हैं, बल्कि आपको स्थानीय संस्कृति को करीब से जानने का मौका भी मिलता है।
| खर्च का विवरण | अनुमानित लागत |
|---|---|
| ट्रांसपोर्ट (HRTC बस) | लगभग ₹2,800 |
| रुकना (हॉस्टल डॉर्म) | ₹500 प्रति रात |
| खाना (ढाबा मील) | ₹400 प्रतिदिन |
| इमरजेंसी फंड | ₹2,000 |
स्थानीय ढाबों पर खाना खाने से आपका रोजाना का खर्च 500 रुपये से भी कम रहता है। तीन दिन के इस सफर का कुल खर्च आमतौर पर एक सीमित बजट के भीतर ही रहता है। होटल बुकिंग के समय 'फ्री-कैंसिलेशन' वाले विकल्प चुनें, ताकि अचानक रास्ता बंद होने पर आपको आर्थिक नुकसान न हो। ये स्मार्ट ट्रैवल हैक्स हिमालय के इस एडवेंचर को हर किसी की पहुंच में बना देते हैं। सही फाइनेंशियल प्लानिंग से आप रास्ते में होने वाली किसी भी देरी को आसानी से संभाल सकते हैं।
हाईवे खुलने के बाद अब ऐसे प्लान करें अपनी ट्रिप
बेहतर सफर के लिए मनाली से सुबह 5 से 7 बजे के बीच निकलना सबसे अच्छा रहता है। जल्दी शुरुआत करने से रास्ते में होने वाली किसी भी रुकावट के लिए आपके पास पर्याप्त समय रहता है। अपने साथ बारिश से बचने का सामान और पर्याप्त कैश जरूर रखें, क्योंकि पहाड़ों पर नेटवर्क की कमी से UPI फेल हो सकता है। तांदी के बाद पेट्रोल पंप बहुत कम हैं, इसलिए अपनी गाड़ी का टैंक पहले ही फुल करा लें। ऊंचाई वाले दर्रों पर सांस लेने में होने वाली दिक्कत से बचने के लिए पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर साथ रखना समझदारी है।
इस महत्वपूर्ण रास्ते के खुलने से हिमालयी क्षेत्र में पर्यटन एक बार फिर सुरक्षित रूप से शुरू हो गया है। हालांकि सड़कें खुल गई हैं, लेकिन मौसम के मिजाज पर नजर रखना बहुत जरूरी है। अपनी यात्रा को सुगम बनाने के लिए अटल टनल के स्टेटस की लाइव अपडेट चेक करते रहें। अगर आप पूरी तैयारी के साथ निकलते हैं, तो यह रूट आपको बेहद खूबसूरत नजारे पेश करता है। जिम्मेदारी के साथ अपनी यात्रा का आनंद लें और पहाड़ों की संवेदनशीलता का सम्मान करें।



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