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भारत का अनूठा दशहरा, जहां न तो राम हैं और न हीं रावण...

भारत अपनी परम्पराओं और अपनी विविधताओं के लिए जाना जाता है। खासतौर पर देखा जाए तो भारत धर्मों के लिए खास प्रसिद्ध है। यहां कई राज्य है और सभी राज्यों की अपनी अलग-अलग परम्परा है। ऐसे में अगर अश्विन महीने में आने वाले नवरात्रि की बात की जाए तो नवरात्रि में 9 दिन तक मां दुर्गा की पूजा की जाती है और दसवें दिन विजया दशमी मनाई जाती है, जिस दिन रावण के पुतले का दहन किया जाता है। लेकिन इसके विपरीत एक ऐसा भी शहर है, जहां विजया दशमी के दिन रावण के पुतले को दहन नहीं किया जाता है। बल्कि एक अनूठे तरीके से विजया दशमी का ये खास पर्व मनाया जाता है। इस खास पर्व को मैसूर में दसरा (Mysore Dasara) के नाम से जाना जाता है।

दरअसल, हम मैसूर के विश्व-प्रसिद्ध दशहरे की बात कर रहे हैं, जहां पर मनाई जाने वाली विजया दशमी में न तो राम होते हैं और न हीं रावण। इस दिन मैसूर के राजपरिवार (मैसूर पैलेस) की ओर से हाथी पर 750 किलो शुद्ध सोने का अम्बारी (सिंहासन) रखा जाता है, जिस पर माता चामुंडेश्वरी की प्रतिमा रखी जाती है और पूरे शहर में घुमाया जाता है। साल 1970 के पहले इस इस अम्बारी पर मैसूर के राजा बैठा करते थे लेकिन 26वें संविधान संसोधन के बाद साल 1971 से इस पर माता की प्रतिमा विराजित की जाने लगी और तब से लेकर आज तक ये चली आ रही है।

6 किमी का सफर और 600 सालों का इतिहास

6 किमी का सफर और 600 सालों का इतिहास

मैसूर पैलेस की ये परम्परा पिछले 600 सालों से चली आ रही है। इस दौरान आपको पूरा शहर रौशनी से सराबोर सा लगेगा। सोने-चांदी से सजे हुए हाथियों का काफिला और 6 किमी. तक का सफर...यकीन मानिए ऐसा दशहरा न आपने कभी देखा होगा और ना आप कभी देख पाएंगे। क्योंकि ये सिर्फ और सिर्फ मैसूर में ही देखने को मिलता है। ऐसे में अगर आप भी अगले साल के लिए प्लानिंग कर रहे हैं तो कोशिश करें नवरात्रि के एक-दो दिन पहले ही वहां चले जाए और दशहरा तक वहां रूके ताकि आप वहां के कल्चर से रूबरू हो सकें।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन

सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन

विजया दशमी के पर्व को यहां पर काफी ऐतिहासिक तरीके से मनाया जाता है। इस दौरान कई सांस्कृतिक आयोजन भी किए जाते हैं, जिसमें आने वाले पर्यटक कला और संस्कृति के अनूठे समायोजन को देख सकते हैं। वहीं, राजमहल से हाथियों का काफिला निकलने के पहले उन्हें 21 तोपों की सलामी दी जाती है। अगर आप भी इस फेस्टिवल को एंजॉय करना चाहते हैं तो आप नवरात्रि के दिनों में मैसूर जा सकते हैं और वहां पर सेलिब्रेट किए जाने वाले इस 10 दिवसीय त्योहार का हिस्सा बन सकते हैं।

आसपास घूमने की जगह

आसपास घूमने की जगह

मैसूर पर्यटन की दृष्टि से भी काफी खूबसूरत शहर है। यहां पर अगर आप चाहे तो नवरात्रि व दशहरे के बाद भी रुकने की प्लानिंग कर सकते हैं। यहां का मैसूर पैलेस बहुत ही खूबसूरत है, जिसका दीदार आप कर सकेंगे। इसके अलावा यहां पर घूमने के लिए वृंदावन गार्डन, मैसूर चिड़ियाघर, रेल संग्रहालय, चामुंडेश्वरी मंदिर भी है, जहां पर आप अपनों के साथ एक अच्छा समय व्यतीत कर पाएंगे।

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