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इन सर्दियों में नासिक की यात्रा जरुर करें, वरना पछताना पड़ सकता है!

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मुंबई और पुणे से करीबन 200 किमी की दूरी पर बसा हुआ नासिक अंगूर के उत्पादन और भारत में शराब की राजधानी के नाम से प्रख्यात है। नासिक एक ऐसा शहर है, जो ना आपको सिर्फ धर्मिक मन्दिरों की सैर कराता है, बल्कि आप यहां दिल खोलकर एडवेंचर गेम्स ,ट्रैकिंग, वाइन टेस्टिंग का भी लुत्फ उठा सकते हैं।

इस जगह का नाम नासिक क्यों पड़ा, इसके पीछे एक पौराणिक कहानी है , बताया जाता है कि, त्रेता युग में भगवान राम ने अपने वनवास के दौरान तपोवन नामक जगह पर कुछ दिन व्यतीत किये थे।साथ ही इसी जगह भगवान लक्ष्मण ने शूर्पनखा की नाक काटी थी, और इसलिए इस जगह का नाम नासिक पड़ा, जो की एक नाक का ही अनुवाद रूप है। कालिदास, वाल्मीकि ने भी उनकी कृतियों में नासिक की बात की है। 150 ईसा पूर्व के प्रसिद्ध दार्शनिक, प्लोतेमी ने भी नासिक का उल्लेख किया है। नासिक वर्तमान में महाराष्ट्र के सबसे तेजी से बढ़ते शहरों में से है। इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, औद्योगिक, और कई अन्य पहलुओं - में नासिक ने काफी विकास किया है।

आज हम आपको अपने लेख से बतायेंगे कि, आखिर महीने नासिक की यात्रा क्यों करनी जरूरी है?
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कुम्भ मेला

कुम्भ मेला

नासिक का कुंभ मेला विश्व विखाय्त है, यहां हर बढ़ साल में कुम्भ मेले का आयोजन होता है। जिसमे सिर्फ देश ही बल्कि हजारों की तादाद में विदेशी श्रद्धालु भी गोदावरी नदी में डुबकी लगाने पहुंचते हैं । अगला कुंभ मेला वर्ष 2027 में लगेगा।Pc: AnandKatgaonkar

त्रिंबकेश्वर मंदिर

त्रिंबकेश्वर मंदिर

नासिक हिंदुयों के बीच एक लोकप्रिय धार्मिक पर्यटन स्थल है । यहां कई ऐसे मंदिर हैं, जिनका अपना महत्व है।

त्रिंबकेश्वर मंदिर
त्रिम्बकेश्वर भारत के सबसे ज्यादा पवित्र माने गए स्थलों में से एक है। ये जगह इसलिए भी ख़ास मानी गयी है की ये उन 12 जगहों में से एक है जहाँ ज्योतिर्लिंग है। ऐसा माना जाता है कि अगर व्यक्ति त्रिम्बकेश्वर जाये तो उसे मोक्ष कि प्राप्ति हो जाती है। यहाँ आने वालों के लिए रुकने की भी व्यवस्था है यहाँ व्यक्ति को काफी सारे लॉज मिल जाएँगे।
त्रिंबकेश्वर मंदिर नासिक रेलवे स्टेशन से करीबन 40 किमी की दूरी पर स्थित है।Pc: Niraj Suryawanshi

कालाराम मंदिर

कालाराम मंदिर

कालाराम मंदिर नासिक में एक प्रमुख तीर्थ आकर्षण है। 1794 में गोपिकाबाई पेशवा द्वारा निर्मित, कालाराम मंदिर अपने स्थापत्य शैली में त्रिंबकेश्वर मंदिर जैसा दिखता है। कुछ मील दूर एक स्थित महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। यह पूरी तरह से काला पत्थर से बनाया गया है। मंदिर 70 फुट लंबा है और इसका शिखर तांबे का बना है जिस पर सोना चढ़ाया गया है। यह मंदिर भगवान राम, सीता और लक्ष्मण की मूर्तियों से सजा हुआ है। वहाँ भी एक गणपति मंदिर, हनुमान मंदिर और आसपास के क्षेत्र में एक विट्ठल मंदिर मौजूद है।Pc:Akshatha Inamdar

पंचवटी

पंचवटी

कहा जाता है कि, चौदह वर्षों के वनवास के दौरान भगवान राम ,लक्ष्मण और सीता ने पंचवटी में कुछ समय व्यतीत किया था। पंचवटी का नाम वहां स्थित पांच बरगद के पेड़ों से आया है, इस पेड़ के पास एक गुफा है, कहा जाता है कि, वनवास के दौरान माता सीता इसी गुफा में रहा करती थी। इस गुफा में प्रवेश करने के लिए संकरी सीढ़ियों से गुजरना पड़ता है।Pc:Akshatha Inamdar

वाइन का ले स्वाद

वाइन का ले स्वाद

अगर आप ज्यादा धार्मिक नहीं है तो आप यहां स्थित कई विन्यार्ड्स की सैर कर सकते हैं, जो अंगूरों से शराब के उत्पादन के लिए जानी जाती है। आप इन विन्यार्ड्स में आकर शराब कैसे बनती है, देख सकते हैं, साथ ही वाइन को चख भी सकते हैं। नासिक में कई विनयार्ड स्थित है जैसे, सुला विनयार्ड, यॉर्क विनयाद, सोमा वाइन विलेज ,आदि।Pc:Ry8999

पांडवलेनी गुफाएं

पांडवलेनी गुफाएं

त्रिवाष्मी हिल्स के पठार पर बसे, पांडवलेनी गुफाएं 20 से अधिक सदियों पुरानी है। गुफाओं की संख्या चौबीस है और जैन राजाओं द्वारा निर्मित मानी जाती है । जैन संत अम्बिका देवी, मनिभाद्रजी,और तीर्थंकर ऋषभदेव यहाँ रहते थे। जैन शिलालेख और कलाकृतियों के अलावा, यहाँ बुद्ध कि मूर्तियों को भी देखा जा सकता हैं। जटिल पानी के टैंक बड़ी चट्टानों से बाहर नक़्क़ाशीदार बने हुए है। क्षेत्र में कथित तौर पर यह एक पवित्र स्थान है जहां आध्यात्मिक नेताओं से उनके शिष्यों और अनुयायियों ने मुलाकात की थी।Pc:Rashmi.parab

दादा साहेब फाल्के स्मारक

दादा साहेब फाल्के स्मारक

यह स्मारक पांडवल्नी की गुफाओं की तलहटी में स्थित है। दादासाहेब फालके को भारतीय सिनेमा के पिता के रूप में भी जाना जाता है, उनकी याद में यहां एक मकबरा बना हुआ है, जोकि एक ओपन अफीथियेटर और एक संग्रहालय है। यह के बेहतरीन जगह है, जहां आप शाम के समय बैठकर सिनेमा को अच्छे से जान और समझ सकते हैं।

दुगारवाडी झरना

दुगारवाडी झरना

आप नासिक में कई झरनों को भी देख सकते हैं, जो आपके वीकेंड को मजेदार बना सकते हैं। झरों का असली मजा लेना है , तो मानसून के मौसम में यहां की सैर अवश्य करें।

दुगारवाडी झरना
त्रिंबकेश्वर मंदिर से 12 किमी की दूरी पर स्थित दुगारवाडी झरना एक बेहद ही खूबसूरत जगह है, जाहां ट्रैकिंग के जरिये पहुंचा जा सकता है।

Pc:Adwait

अंजनेरी

अंजनेरी

अगर आप नासिक में ट्रैकिंग का मजा लेना चाहते हैं, तो अंजनेरी आपके लिए एक परफेक्ट जगह हो सकती है।Pc: Mahi29

हरिश्चंद्रगढ़

हरिश्चंद्रगढ़

सह्याद्रि में स्थित हरिश्चन्द्रगढ़ ट्रेकर्स के लिए किसी स्वर्ग से कम जगह नहीं है।Pc:Pranav Lawate

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