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क्या है सूरज की रोशनी और अरुणाचल के डोंग के बीच का संबंध ?

किसी विदेशी लेखिका ने अपनी पुस्तक में बड़ी खूबसूरत लाइन लिखी थी, कि अगर आपको प्रकृति के रूप में भगवान का प्यार देखना है, तो सूर्यादय के दर्शन करें। सच में दिन की शुरुआत अगर धरती पर पड़ने वाली पहली सूर्य की किरणों से हो, तो पूरा दिन स्वस्थ और ताजगी भरा बितता है, इसलिए सुबह जल्दी उठ कर सैर करने की सलाह दी जाती है। सूर्य की हल्की रोशनी से उत्पन्न लालिमा जब वातावरण में फैलती है, तब प्रकृति का नजारा देखने लायक होता है। प्रात: सुबह उठकर सूर्य का ध्यान मनुष्य को आंतरिक रूप से स्वस्थ बनाता है।

वैसे आपने कभी सोचा है, कि भारत में सबसे पहले सूर्य की किरणें इस स्थल पर पड़ती ? सवाल अटपटा सा जरूर लग सकता है, लेकिन जानकारी रखने में क्या हर्ज है। आज इस खास लेख में हम आपको भारत के उस अज्ञात स्थल के बारे में बताने जा रहे हैं, जो देश में सबसे पहले सूरज के दर्शन करता है। जी हां, उस स्थल का नाम है, डोंग, जो पूर्वोत्तर भारत के अरुणाचल प्रदेश में स्थित है, जानिए पर्यटन के लिहाज से यह पहाड़ी स्थल आपको किस प्रकार आनंदित कर सकता है।

अरुणाचल का खूबसूरत गांव डोंग

अरुणाचल का खूबसूरत गांव डोंग

समुद्र तल से 1,240 मीटर की ऊंचाई पर स्थित डोंग, भारत के अरुणाचल प्रदेश का एक खूबसूरत गांव है, जो देश में सबसे पहले सूर्य के दर्शन करता है। डोंग एक पहाड़ी गांव है, जो डोंग ब्रह्मपुत्र की एक सहायक लोहित और सती के संगम स्थल पर स्थित है। माना जाता है कि1999 में इस बात का पता चला था कि अरुणाचल के डोंग में सूरज की पहली किरणे पड़ती हैं। उसके बाद से यह एक शानदार पर्यटन केंद्र के रूप में उभरा, जिसे देखने के लिए अब देश-विदेश के पर्यटकों का आवागमन लगा रहता है। सूर्योदय देखने के लिए सैलानियों को 8 कि.मी की पहाड़ी ट्रेकिंग करनी पड़ती है। यह सफर रोमांच के साथ-साथ काफी आनंद से भरा हुआ है। जानकारी के अनुसार यहां सूर्योदय सामान्य दिनों में 4 बजे के आसपास हो जोता है।

आसपास के आकर्षण

आसपास के आकर्षण

डोंग में सूर्योदय देखने के अलावा आप आसपास के निकटवर्ती स्थलों की सैर का प्लान भी बना सकते हैं। आप यहां से वालोंग की सैर का प्लान बना सकते हैं। वालोंग का शाब्दिक अर्थ है, बांस से भरा हुआ स्थान। वालोंग, लोहित नदी के पश्चिमी तट पर समुद्र तल से 1094 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह स्थल अपने प्राकृतिक महत्व के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व के लिए भी जाना जाता है। जानकारी के अनुसार 1962 के भारत-चीन के युद्ध के दौरान यहां बहुत से भारतीय जवान शहीद हए थे। वालोंग से लगभग 20 कि.मी की दूरी पर नमति घाटी में शहीदों की याद के तौर पर एक स्मारक भी बना हुआ है। आप डोंग से तिलम की सैर का प्लान बना सकते हैं। डोंग के आसपास का प्राकृतिक माहौल काफी आकर्षक है, आप यहां जी भर कर कुदरती खूबसूरती का आनंद ले सकते हैं।

आने का सही समय

आने का सही समय

डोंग, अरुणाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले स्थल पर स्थित है, जहां का मौसम साल भर खुशनुमा बना रहता है। चूंकि यह स्थल अपनी विशेष खासियतों के लिए प्रसिद्ध है, इसलिए यहां सालभर सैलानियों का आवागमन लगा रहता है। आप यहां साल की किसी भी महीने में आ सकते हैं। लेकिन डोंग भ्रमण का आदर्श समय अप्रैल से लेकर अक्टूबर के मध्य का है, इस दौरान यहां का मौसम काफी अनुकूल बना रहता है। सर्दियों के दौरान यह स्थल अत्यधिक ठंड प्राप्त करता है।

क्यों आएं डोंग

क्यों आएं डोंग

डोंग का भ्रमण कई उद्देश्यों को पूरा करने के लिए किया जा सकता है। सबसे पहली खासियत कि देश का एकमात्र ऐसा स्थल है, जहां सूर्य की किरणें सबसे पहले पड़ती है। आप यहां सूर्योदय के शानदार दृश्यों को देखने के लिए आ सकते हैं। एक प्रकृति प्रेमी से लेकर एडवेंचर के शौकीन भी यहां आ सकते हैं। कुछ नया जानने में दिलचस्पी रखने वाले जिज्ञासु भी यहां आ सकते हैं, डोंग के आसपास कई ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थल मौजूद हैं। एक फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी यह स्थल काफी ज्यादा मायने रखता है, अगर आप फोटोग्राफी का शौक रखते हैं, तो यहां के शानदार दृश्यों को अपने कैमरे में कैद कर सकते हैं।

कैसे करें प्रवेश

कैसे करें प्रवेश

डोंग, अरुणाचल प्रदेश के अन्जाव जिले में स्थित है, जहां आप परिवहन के तीनों साधनों की मदद से पहुंच सकते हैं, यहां का निकटवर्ती हवाई अड्डा डिब्रूगढ़ एयरपोर्ट है, रेल मार्ग के लिए आप तिनसुकिया रेलवे स्टेशन का सहारा ले सकते हैं। अगर आप चाहें तो यहां सड़क मार्गों से जरिए भी पहुंच सकते हैं, बेहतर सड़क मार्गों से तेजू राज्य के बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है, जहां से आप डोंग आसानी से पहुंच सकते हैं।

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