हिमाचल प्रदेश में आज भारी बारिश को लेकर मौसम विभाग (IMD) ने नया अलर्ट जारी किया है, जिससे लैंडस्लाइड का खतरा बढ़ गया है। अगर आप दिल्ली या चंडीगढ़ से शिमला और मनाली जाने का प्लान बना रहे हैं, तो अपनी ट्रिप को लेकर थोड़ी सावधानी बरतें। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि पहाड़ों में रात के सफर से बचें और सुबह जल्दी निकलें। भारी बारिश की वजह से उत्तर भारत के कई हिल स्टेशंस पर सड़कों का हाल कभी भी बिगड़ सकता है।
मानसून के दौरान पहाड़ों का सफर सुरक्षित बनाने के लिए सही टाइमिंग बहुत जरूरी है। जानकारों का कहना है कि अपनी यात्रा सुबह 5 से 7 बजे के बीच शुरू करना सबसे अच्छा है ताकि घाट वाले हिस्से दिन की रोशनी में ही पार हो जाएं। रात में इन इलाकों में ड्राइविंग करना काफी खतरनाक हो सकता है क्योंकि विजिबिलिटी कम होती है और अचानक मलबा गिरने का डर रहता है। सही प्लानिंग से आप भारी बारिश के दौरान नेशनल हाईवे (NH) पर फंसने से बच सकते हैं।

शिमला और मनाली ट्रिप: इन रास्तों पर बरतें खास सावधानी
आज सफर करने वाले ड्राइवरों और बस यात्रियों को दो रास्तों पर सबसे ज्यादा अलर्ट रहने की जरूरत है। नेशनल हाईवे 5 (NH-5) पर ठियोग और नारकंडा के पास अक्सर लैंडस्लाइड और कीचड़ जमा होने का खतरा रहता है। वहीं, नेशनल हाईवे 3 (NH-3) पर मंडी से कुल्लू वाला हिस्सा भी काफी संवेदनशील है। घर से निकलने से पहले हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (HRTC) के ट्रैफिक अपडेट्स जरूर चेक कर लें।
| रूट / रास्ता | मुख्य खतरा | क्या करें? |
|---|---|---|
| मंडी से कुल्लू | NH-3 पर नदी का बढ़ता जलस्तर | पंडोह डैम से पानी छोड़े जाने पर नजर रखें |
| ठियोग से नारकंडा | NH-5 पर बार-बार लैंडस्लाइड | सूर्यास्त के बाद सफर करने से बचें |
हिमाचल जाने के लिए ट्रेन और बस के बेहतर विकल्प
नई दिल्ली (NDLS) से पहाड़ों की तलहटी तक पहुंचने के लिए ट्रेन अभी भी सबसे सुरक्षित विकल्प है। कालका तक जाने वाली वंदे भारत और शताब्दी एक्सप्रेस काफी भरोसेमंद हैं। हालांकि, भारी बारिश के दौरान कालका-शिमला टॉय ट्रेन अक्सर लेट हो जाती है। अगर आप सड़क मार्ग चुन रहे हैं, तो हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (HRTC) की वोल्वो बसें अच्छा विकल्प हैं। इनके ड्राइवर अनुभवी होते हैं और इन मुश्किल रास्तों पर सुरक्षा के साथ बस चलाते हैं।
शिमला-मनाली में होटल बुकिंग के लिए टिप्स
जुलाई के महीने में हिल स्टेशन जाते समय अपने ट्रैवल प्लान को थोड़ा लचीला रखें। होटल बुकिंग करते समय 'फुल रिफंड' वाली पॉलिसी को प्राथमिकता दें, ताकि रास्ता बंद होने की स्थिति में आपका पैसा न डूबे। लैंडस्लाइड की वजह से होने वाली देरी को देखते हुए एक दिन का 'बफर डे' साथ लेकर चलें। अपने फोन में इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर हमेशा सेव रखें और पहाड़ों की सुरक्षा से जुड़े अपडेट्स के लिए लोकल वेदर पोर्टल चेक करते रहें।
आज के दौर में मानसून ट्रिप का मजा तभी है जब आप सुरक्षा के साथ कोई समझौता न करें। पहाड़ों में सुबह के समय ड्राइविंग करना जोखिम को काफी कम कर देता है। सफर के दौरान हर फैसला भरोसेमंद खबरों और सरकारी वेदर अलर्ट्स के आधार पर ही लें। इन स्टेप्स को फॉलो करके आप अपनी ट्रिप को सुरक्षित और यादगार बना सकते हैं।



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