हिमाचल प्रदेश में आज, 9 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मानसून की इस मार का असर चंबा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सिरमौर जैसे लोकप्रिय टूरिस्ट स्पॉट्स पर सबसे ज्यादा दिख रहा है। अगर आप उत्तर भारत से मनाली या धर्मशाला जाने की सोच रहे हैं, तो अपनी सुरक्षा को सबसे ऊपर रखें। मौसम के इस अचानक बदलाव की वजह से पहाड़ों पर लैंडस्लाइड (भूस्खलन) का खतरा बढ़ गया है, इसलिए गाड़ी बहुत संभलकर चलाएं।
शिमला या मनाली की ओर जाने वाले नेशनल हाईवे 44 (NH 44) पर आज खास सावधानी बरतने की जरूरत है। भारी बारिश के दौरान मंडी और सोलन के पास चट्टानें गिरने (रॉकफॉल) की घटनाएं अक्सर होती हैं। ट्रैवल एक्सपर्ट्स की मानें तो अपना सफर सुबह जल्दी, यानी 5 से 7 बजे के बीच शुरू करना सबसे अच्छा है। दिन की रोशनी में ड्राइविंग करना न केवल आसान होता है, बल्कि खतरनाक मोड़ों पर विजिबिलिटी भी बेहतर रहती है। जाम से बचने के लिए हिमाचल प्रदेश पुलिस के अपडेट्स पर नजर जरूर रखें।

हिमाचल में बारिश के बीच सफर के लिए कुछ स्मार्ट टिप्स
मानसून के दौरान अपनी गाड़ी के बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करना एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है। हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (HRTC) की बसें पहाड़ों के सफर के लिए काफी सुरक्षित और भरोसेमंद मानी जाती हैं। इन बसों के ड्राइवरों को पहाड़ी रास्तों के खतरों का निजी गाड़ी चलाने वालों से कहीं ज्यादा अंदाजा होता है। अगर आप ट्रेन से जा रहे हैं, तो निकलने से पहले कालका-शिमला रेल रूट का स्टेटस जरूर चेक कर लें। वहीं, खराब मौसम की वजह से फ्लाइट्स में भी देरी हो सकती है।
| टूरिस्ट रूट | मुख्य हाईवे | अलर्ट वाले इलाके |
|---|---|---|
| दिल्ली से शिमला | NH 5 | सोलन से शिमला (धुंध) |
| दिल्ली से मनाली | NH 3 | मंडी के लैंडस्लाइड वाले इलाके |
| दिल्ली से धर्मशाला | NH 154 | लोअर कांगड़ा (जलभराव) |
मौसम खराब होने की स्थिति में मुख्य शहरों के अंदर ही रुकना बेहतर है ताकि जरूरी सुविधाएं आसानी से मिल सकें। ऐसे होटल चुनें जहां पार्किंग और पावर बैकअप की अच्छी सुविधा हो, क्योंकि मानसून में बिजली गुल होना आम बात है। अचानक प्लान बदलने की स्थिति से बचने के लिए 'रिफंडेबल' बुकिंग ही कराएं। नदी किनारे बने कैफे या होटलों में रुकने से बचें। अपने साथ UPI के अलावा कैश भी रखें और नेटवर्क की समस्या को देखते हुए ऑफलाइन मैप्स डाउनलोड कर लें।
मानसून में पहाड़ों की हरियाली देखने लायक होती है, लेकिन इस दौरान बेहद सतर्क रहना जरूरी है। पहाड़ी रास्तों पर सफर करते समय कम से कम तीन घंटे का एक्स्ट्रा समय (बफर) लेकर चलें। सरकारी एडवाइजरी का पालन करना आपके और स्थानीय लोगों, दोनों की सुरक्षा के लिए जरूरी है। सही जानकारी और सुरक्षित ट्रांसपोर्ट चुनकर आप हिमाचल की खूबसूरती का लुत्फ उठा सकते हैं। पल-पल की जानकारी के लिए वेदर ऐप्स चेक करते रहें।



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