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भारत के ऐसे मंदिर जहां गैर हिंदुओं के जाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है

भारत को धर्मों का देश कहा जाता है। यहां अनगिनत मंदिर है, जिसमें देश के लोगों को आस्था बसती है। हिंदू धर्म के देवी-देवताओं के करोड़ों मंदिर यहां है, जहां सभी धर्मों का सम्मान किया जाता है और मंदिरों में प्रवेश दिया जाता है। लेकिन भारत के कुछ ऐसे भी मंदिर है, जहां गैर-हिंदू को मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाता। ये भारत के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक भी है। ये ऐसे मंदिर है, जहां जाना हर किसी का सपना होता है।

लिंगराज मंदिर, उड़ीसा

लिंगराज मंदिर, उड़ीसा

लिंगराज मंदिर, उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर में स्थित है, जो इस शहर के मुख्य और प्राचीन मंदिरों में से एक है। यह मंदिर उड़िया और कलिंग शैली बनाया गया है, जो भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण ययाति केशरी ने 11वीं शताब्दी में करवाया था। हालांकि, मंदिर को वर्तमान स्वरूप 12वीं शताब्दी में दी गई, लेकिन मंदिर के कई हिस्से 1500 वर्षों से भी अधिक पुराने हैं।

यह एक ऐसा मंदिर है, जहां गैर-हिंदुओं को प्रवेश नहीं दिया जाता। दरअसल, साल 2012 में एक विदेशी सैलानी ने यहां आकर मंदिर के पूजा-पाठ में विघ्न उत्पन्न की थी, तभी से इस मंदिर में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित कर दिया गया है।

दर्शन करने का समय - सुबह 6:00 से लेकर रात 9:00 बजे तक (दोपहर 12:30 से 3:30 तक बंद रहता है)

जगन्नाथ पुरी मंदिर, उड़ीसा

जगन्नाथ पुरी मंदिर, उड़ीसा

जगन्नाथ मंदिर, उड़ीसा के पुरी शहर में स्थित है, जो एक विश्व प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है। यह मंदिर द्रविड़ और कलिंग शैली में बनाई गई है, जो भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण को समर्पित है। इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के अलावा उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा की भी पूजा की जाती है। इस मंदिर में भगवान की पूरी प्रतिमा नहीं बल्कि आधी-अधूरी प्रतिमा विस्थापित है, जो प्रत्येक 12 वर्षों में बदली जाती है। इस दौरान पूरे शहर की लाइट काट दी जाती है और शहर को एकदम अंधेरा कर दिया जाता है। इस दौरान जो पुजारी प्रतिमाएं बदलते हैं, उनके अलावा गर्भगृह में कोई और मौजूद नहीं होता। और तो और उनके आंखों पर पट्टी बंधी होती है और हाथों में दस्ताने होते हैं।

माना जाता है कि कृष्ण के प्रतिमा एक तरल पदार्थ होता है, जो प्रतिमा बदलते समय पुरानी मूर्ति में से नई मूर्ति में डाला जाता है। हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि यह कुछ और नहीं बल्कि भगवान श्रीकृष्ण का दिल (ह्रदय) है। इस मंदिर में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है। यही कारण है कि जब साल 1984 में भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी यहां दर्शन करने आईं तो उन्हें भी यहां दर्शन करने की अनुमति नहीं मिली थी। यहां दुनिया की सबसे बड़ी रसोई है। जी हां, यहां का महाप्रसाद कभी कम नहीं पड़ता, चाहे कितने भी भक्त क्यों ना आ जाए। जिसे बनाने के लिए करीब 500 लोग रहते हैं और इसके अलावा उनके साथ 300 सहकर्मी भी होते हैं।

दर्शन करने का समय - सुबह 6:00 से लेकर रात 9:00 बजे तक

पद्मनाभ स्वामी मंदिर, केरल

पद्मनाभ स्वामी मंदिर, केरल

पद्मनाभ स्वामी मंदिर, केरल के तिरुअनन्तपुरम में स्थित है, जो कि भारत का सबसे अमीर मंदिर भी है। द्रविड़ शैली में बना यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। इतिहासकारों की मानें तो यह मंदिर करीब 5000 साल पुराना है, जिसका पुनर्निर्माण साल 1733 में त्रावनकोर के राजा मार्तड वर्मा ने करवाया था। यहां भगवान विष्णु शेषनाग पर विश्राम अवस्था में है। यह समुद्र के किनारों और पश्चिमी घाटों के सुंदर पहाड़ियों के मध्य स्थित है, जो इसे और भी खूबसूरत बनाती है। इस मंदिर में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है।

दर्शन करने का समय - सुबह 3:30 से लेकर रात 7:30 बजे तक (दोपहर 12:00 से लेकर 5:00 बजे तक बंद रहता है और त्योहारों पर मंदिर में दर्शन व पूजा का समय बदलता रहता है)

गुरुवायुर मंदिर, केरल

गुरुवायुर मंदिर, केरल

गुरुवायुर मंदिर, केरल के त्रिशुर जिले के गुरुवायुर में स्थित है, जो कि 5000 साल पुराना मंदिर है। इस मंदिर को 'दक्षिण का द्वारका' भी कहा जाता है। केरल वास्तुकला में बना यह मंदिर 14वीं शाताब्दी के आसपास बनकर तैयार हुआ था, जिसका वर्तमान स्वरूप 18वीं शाताब्दी का है। इस मंदिर पर कई बार आक्रमण भी किए जा चुके हैं। यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार गुरुवायुरप्पन (श्रीकृष्ण का बालरूप) को समर्पित है। इस मंदिर में भी गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है।

दर्शन करने का समय - सुबह 3:00 से लेकर रात 9:30 बजे तक (दोपहर 12:30 से लेकर 4:30 बजे तक बंद रहता है)

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