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जानिए पर्यटन के लिए क्यों खास है मणिपुर का चंदेल

By Nripendra Balmiki

मणिपुर की सीमा पर स्थित चंदेल भौगोलिक रूप से एक महत्वपूर्ण शहर है। जो कभी औपनिवेशिक काल के दौरान तेंगनोपाल के नाम से जाना जाता था। यह राज्य का एक बड़ा जिला है, जिसका दक्षिणी भाग म्यान्मार को छूता है और दक्षिण-पश्चिम भाग चुराचांदपुर जिले को। यह शहर राजधानी इम्फाल से लगभग 73 कि.मी की दूरी पर स्थित है।

चुराचांदपुर की तरह ही राज्य का यह जिला अपनी विविध विशेषताओं के लिए जाना जाता है। आप यहां प्राकृतिक आकर्षणों से लेकर मणिपुर की जनजातीय संस्कृति को करीब से देख सकते हैं, और उनके महत्व को समझ सकते हैं। यहां की यात्रा मनोरंजन के साथ-साथ काफी जानवर्धक साबित हो सकती है।

एक संक्षिप्त विवरण

एक संक्षिप्त विवरण

PC- Petekai96

यहां अधिकांश जनजातीय लोग रहते हैं। एनल, पाइत, मारिग, लैमकांग, चौथ, कुकी, मोन्सांग आदि यहां की जनजाति हैं। मणिपुरी लोगों के अलावा यहां मुस्लिम, तमिल, बिहारी और पंजाबी लोग भी रहते हैं। राज्य का चंदेल जिला वन संपदा और जीव जन्तुओं की असंख्य प्रजातियों के लिए भी जाना जाता है। पर्यटन के लिहाज से यह स्थल आपके लिए एक आदर्श विकल्प साबित हो सकता है। इस लेख के माध्यम से जानिए यह शहर आपको किस प्रकार आनंदित कर सकता है।

पर्यटन स्थल - मोरे

पर्यटन स्थल - मोरे

PC-Houruoha

पर्यटन के लिहाज से चंदेल काफी खास माना जाता है, आप यहां के मोरे शहर का भ्रमण कर सकते हैं। मणिपुर-म्यान्मार सीमा पर स्थित मोरे अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा है। मोरे से आप म्यान्मार को आसानी से देखा जा सकता है, इसलिए यह शहर पर्यटकों को काफी ज्यादा अपनी ओर आकर्षित करता है।

मोरे व्यवसासियों के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों के लिए भी काफी ज्यादा मायने रखता है। यह मणिपुर का कमर्शियल हब भी कहा जाता है। आप यहां खरीदारी का भी अनुभव ले सकते हैं। एक शानदार अनुभव के लिए आप यहां की यात्रा कर सकते हैं।

यैंगैंगपोक्पी लोकचाओ वन्यजीव अभयारण्य

यैंगैंगपोक्पी लोकचाओ वन्यजीव अभयारण्य

मोरे के अलावा आप चंदेल के प्रसिद्ध प्राकृतिक स्थलों की सैर भी प्लान बना सकते हैं। यैंगैंगपोक्पी लोकचाओ वन्यजीव अभयारण्य यहां के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में जाना जाता है, जहां आप एक रोमांचक सैर का आनंद उठा सकते हैं। लगभग 185 वर्ग कि.मी में फैला यह अभयारण्य 42 स्तनपाई, 74 प्रक्षी , 29 रेप्टाइल्स, 86 मछली़ और 6 उभयचर प्रजातियों को सुरक्षित आश्रय देने का काम करता है। जंगली जीवों में आप यहां गिबन, अफ्रीकी लंगूर, काला भालू, जंगली भालू, जंगली बिल्ली, गोल्डन कैट आदि के आसानी से देख सकते हैं।

तेंगनोपाल

तेंगनोपाल

उपरोक्त स्थलों के अलावा चंदेल से 22 कि.मी की दूरी पर स्थित तेंगनोपाल पहाड़ी स्थल की सैर का प्लान बना सकते हैं। पर्यटकों के मध्य यह स्थल काफी ज्यादा लोकप्रिय है, यहां से आप मणिपुर की पहाड़ी सौंदर्यता का आनंद आसानी से उठा सकते हैं। यह पहाड़ी स्थल समुद्र तल से 2500 से लेकर 10 हजार फीट की ऊंचाई पर बसा है।

यह स्थल कई स्थानीय और बाहरी शक्तियों के प्रभाव में भी रह चुका है। यहां दो नदियां बराक और मणिपुर यहां उत्तर से दक्षिण की तरफ बहती हैं। इसके अलावा आप यहां कई खूबसूरत झीलों का दीदार भी कर सकते हैं।

कैसे करें प्रवेश

कैसे करें प्रवेश

चंदेल मणिपुर का एक प्रसिद्ध जिला है, जहां आप तीनों मार्गों से आसानी से पहुंच सकते हैं, यहां का नजदीकी हवाईअड्डा इम्फाल हवाईअड्डा है, जो गुवाहाटी,कोलकाता और दिल्ली से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। इंडियन एयरलाइंस गुवाहाटी के माध्यम से इम्फाल से दिल्ली तक नियमित रूप से दैनिक उड़ानें चलाती हैं। चंदेल का निकटतम रेलवे स्टेशन दीमापुर है, जहां चंदेल के लिए बस या कैब लिया जा सकता है।

इसके अलावा आप सड़क मार्ग से भी यहां तक का सफर तय कर सकते हैं, इम्फाल से एनएच 39 के रास्ते आपको नियमित बस सेवा चंदेल के लिए मिल जाएंगी है। चंदेल घूमने का सबसे आदर्श समय फरवरी से दिसंबर के मध्य माना जाता है।

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