भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज, 12 जुलाई को उत्तराखंड के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस चेतावनी के साथ ही पहाड़ी रास्तों पर लैंडस्लाइड (भूस्खलन) का खतरा भी बढ़ गया है। अगर आप दिल्ली या NCR से मसूरी या नैनीताल जाने की सोच रहे हैं, तो अपनी प्लानिंग जरा संभलकर करें। भारी बारिश की वजह से हाईवे और तीर्थ यात्रा के रास्तों पर अचानक रुकावट आ सकती है। इस वीकेंड पहाड़ों का रुख करने वालों को बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है।
फिलहाल नेशनल हाईवे 334 और NH 9 जैसे मुख्य रास्तों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि अपनी यात्रा सुबह 5 से 7 बजे के बीच शुरू करें ताकि रात के समय घाटों पर ड्राइविंग से बचा जा सके। सफर के दौरान ट्रैफिक या सड़क बंद होने की स्थिति से निपटने के लिए कम से कम 3 घंटे का एक्स्ट्रा समय (बफर टाइम) लेकर चलें। कम विजिबिलिटी और बारिश के कारण ढलान वाले रास्तों पर रात में गाड़ी चलाना खतरनाक हो सकता है। घर से निकलने से पहले लोकल ट्रैफिक अपडेट्स जरूर चेक कर लें।

उत्तराखंड में भारी बारिश: सुरक्षित सफर के लिए अपनाएं ये विकल्प
अगर आप खुद गाड़ी चलाकर जाने का रिस्क नहीं लेना चाहते, तो ट्रेन या बस का सफर ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक रहेगा। दिल्ली से देहरादून और काठगोदाम के लिए शताब्दी एक्सप्रेस और वंदे भारत जैसी ट्रेनें बेहतरीन विकल्प हैं। इसके अलावा, कश्मीरी गेट से उत्तराखंड परिवहन निगम (UKRTC) की वॉल्वो बसें भी नियमित रूप से चलती हैं। इन सेवाओं का इस्तेमाल करने से न केवल आप भारी बारिश में फिसलन भरी सड़कों पर ड्राइविंग के तनाव से बचेंगे, बल्कि प्रोफेशनल ड्राइवर्स के साथ आपका सफर भी सुरक्षित रहेगा।
| रूट | साधन | सेफ्टी टिप |
|---|---|---|
| दिल्ली से मसूरी | NH 334 / NH 707A | सिर्फ दिन के उजाले में सफर करें |
| दिल्ली से नैनीताल | नेशनल हाईवे 9 | सूर्यास्त के बाद घाटों पर जाने से बचें |
| देहरादून कनेक्टिविटी | वंदे भारत एक्सप्रेस | सीटें पहले से बुक कर लें |
| लोकल मोबिलिटी | लोकल टैक्सी | खुद गाड़ी चलाने के बजाय टैक्सी को प्राथमिकता दें |
उत्तराखंड यात्रा की तैयारी: इन बातों का रखें खास ख्याल
इस हफ्ते पहाड़ों की यात्रा के लिए रिफंडेबल होटल बुकिंग और फ्लेक्सिबल प्लान बनाना ही समझदारी है। पहाड़ों का मौसम कब बदल जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता, इसलिए पावर बैंक और रेन गियर (बरसाती) साथ रखना न भूलें। खराब मौसम में मोबाइल सिग्नल जा सकते हैं, इसलिए ऑफलाइन मैप्स पहले ही डाउनलोड कर लें। नदी के किनारों या ऐसी जगहों से दूर रहें जहां मिट्टी धंसने का डर हो। सुरक्षा के लिहाज से अपने फोन में लोकल हेल्पलाइन नंबर जरूर सेव रखें।
इन सुरक्षा नियमों का पालन करके आप अपनी मानसून ट्रिप को यादगार बना सकते हैं। उत्तराखंड की हरियाली बेशक दिल जीत लेती है, लेकिन मौसम की चेतावनी को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। मैदानी इलाकों से निकलने से पहले जिला पुलिस के सोशल मीडिया हैंडल से सड़क की स्थिति जरूर वेरिफाई करें। सही समय और सही ट्रांसपोर्ट चुनकर आप बिना किसी जोखिम के पहाड़ों का आनंद ले सकते हैं। याद रखें, आपकी सुरक्षा आपकी तैयारी पर निर्भर करती है।



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