अच्छी नौकरी, बेहतर काम, अच्छी लाइफस्टाइल, नये लोग और नया शहर...काम के सिलसिले में सिलीकॉन सिटी बैंगलोर का रूख करने वाले हर नौकरीपेशा की आंखों में यहीं सपना होता है। कुछ ऐसा ही सपना लेकर बिहार की राजधानी पटना से अभिषेक गुप्ता ने भी बैंगलोर का रूख किया। जिस समय बिहार में अभिषेक का परिवार गर्मी से हैरान-परेशान था, तब फोन पर अभिषेक ने तो बैंगलोर के मौसम की तारीफों के पुल ही बांध दिये।
न उमस, न अधिक गर्मी...हल्की-हल्की बारिश की फुहारों का आनंद उठाता अभिषेक। लेकिन कुछ ही दिनों में उसका यह भ्रम तब टूटा जब बैंगलोर में मानसून ने दस्तक दी। जब गर्मियों में ही बैंगलोर का मौसम सुहावना है तो मानसून कितनी अच्छी होगी। यह सोचकर अभिषेक ने अपने माता-पिता को मानसून के समय ही बैंगलोर बुलवाने का पहले प्लान बना लिया था।

लेकिन मानसून के समय बैंगलोर की हालत देखकर मजबूरन अभिषेक ने अपने परिवार का टिकट कैंसिल करवाया और उनसे मानसून के बाद बैंगलोर आने के लिए कहा।
आइए जरा एक नजर हम भी उन सारी बिन बुलायी मुसीबतों पर डाल देते हैं, जो मानसून के समय बैंगलोर की हालत को खराब कर देती है :
1. बिना बारिश के भी वाटरलॉगिंग
आमतौर पर हमने हर बड़े शहर में देखा है कि तेज बारिश के बाद ही शहर की हालत खराब होती है, जलजमाव जैसी परेशानियां पैदा होती है। लेकिन बैंगलोर तो भई बैंगलोर है। यहां बिना बारिश के भी जलजमाव और वाटरलॉगिंग होने लगती है। कैसे...ड्रेन के ओवरफ्लो होने की वजह से।
जी हां, मानसून के समय जब बैंगलोर के किसी एक हिस्से में तेज बारिश हो रही हो तो बैंगलोर का दूसरा हिस्सा भी वाटरलॉगिंग की समस्या झेलने लगता है। एक हिस्से का पानी ड्रेन के माध्यम से ओवरफ्लो होकर शहर के दूसरे हिस्से में जमा हो जाता है।
2. ट्रैफिक
ट्रैफिक जाम की समस्या बैंगलोर में न सिर्फ स्थायी समस्या है बल्कि यह हर बैंगलोरवासी का सबसे बड़ा सिरदर्द भी है। आम दिनों में ही घंटों लोगों को ट्रैफिक में फंसकर समय बर्बाद करना पड़ जाता है लेकिन मानसून के समय तो यह हालत और भी विकराल हो जाती है। एक तो बारिश की वजह से ट्रैफिक की गति का धीमा पड़ जाना, जलजमाव की वजह से गाड़ियां आगे ही नहीं बढ़ पाती हैं। और नतीजा होता है ट्रैफिक की लंबी कतारें जिनसे निकलने में भी घंटों का समय बर्बाद।

3. निर्माण से उड़ने वाली धूल
बैंगलोर में भले ही बारिश के बाद सड़कों पर से धूल का उड़ना बंद हो जाता हो लेकिन यहां होने वाले निर्माण कार्यों से धूल का उड़ना बंद होने का नाम ही नहीं लेता है। इस वजह से घर और गैरज में खड़ी गाड़ियों पर धूल की मोटी परत का जमना तो साल भर जारी रहता है। और हम सभी जानते हैं, धूल की वजह से कई तरह की बीमारियां, सांस लेने में तकलीफ, दमा आदि की परेशानियां भी शुरू हो सकती हैं।
4. नहीं लगाया मास्क तो चख लें धूल
जी हां, खासतौर पर अगर आप बैंगलोर में बाइक या स्कूटर से आवाजाही करते हैं, तो कम से कम N95 मास्क लगाना तो बनता है। क्यों, क्योंकि अगर आपने अपने चेहरे पर मास्क नहीं लगाया या कोई भी पतला वाला आम सा मास्क लगा लिया तब भी...आपको अपने मुंह में धूल के कणों का स्वाद जरूर आएगा। इसलिए भले ही कितनी भी उमस हो या तेज बारिश...मास्क लगाना बैंगलोर के राइडर्स के लिए अनिवार्य सा बन गया है।

5. बढ़ता डेंगू का खतरा
बैंगलोर में पिछले कुछ दिनों में डेंगू का खतरा काफी तेजी से बढ़ रहा है। बात कहीं न कहीं स्वाभाविक भी है। अगर जलजमाव होगा तो लंबे समय तक जमा पानी में डेंगू मच्छर के लार्वा भी पनपेंगे जो पूरे शहर में डेंगू फैलाने का काम भी करते हैं। इसलिए मानसून के समय बैंगलोर की सबसे बड़ी मुसीबत के रूप में डेंगू भी आ धमकता है।
6. यातायात के लिए गाड़ी नहीं
जी हां, ऐसा हम खासतौर पर उन लोगों के लिए कह रहे हैं जो यातायात के लिए ऑटो या कैब पर ज्यादा भरोसा करते हैं। मानसून की बारिश शुरू हुई नहीं, कि बैंगलोर में कैब या ऑटो मिलना मुहाल हो जाएगा। भले ही बैंगलोर में ऐप आधारित ऑटो से लेकर कैब तक की सुविधा उपलब्ध है। पर कई बार ऐसा भी होता है कि आप घंटों खड़े रह जाते हैं लेकिन आपको एक ऑटो नहीं मिलती। न ही ऐप पर और न ही रनिंग ऑटो। इससे आपका समय और एनर्जी, दोनों बर्बाद।



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