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जलवायु परिवर्तन ने अप्रैल'24 को बनाया भीषण गर्म, हर 30 साल में भारत में आएगा ऐसा हीटवेव, Research

अप्रैल 2024 की गर्मी ने सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि एशिया महादेश के सभी हिस्सों में पिछले सारे रिकॉर्ड्स को तोड़ डाला है। ऐसा लंबे समय बाद हुआ है जब अप्रैल के महीने में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उसके पार गया है। इसकी वजह जलवायु परिवर्तन को माना जा है जिसके लिए किसी और को नहीं बल्कि हम इंसान ही जिम्मेदार हैं।

इस बात का खुलासा World Weather Attribution समूह के पर्यावरणविदों द्वारा किये गये अध्ययन में हुआ है। इस अध्ययन से पता चला है कि अप्रैल में आए हीटवेव ने एशिया में वाले गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के साथ-साथ गाजा के फिलीस्तीन के 17 लाख विस्थापितों का जीवन पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा मुश्किलों से भर दिया है।

summer hot april 2024

इस साल अप्रैल में एशिया के हर हिस्से में हीटवेव ने अपना प्रभाव दिखाया था। दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया, म्यांमार, लाओस, वियेतनाम में तो अप्रैल में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ी थी। वहीं फिलीपिंस ने सर्वाधिक गर्म रातों को महसूस किया था। भारत में अधिकतम तापमान का पारा 46 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया था, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। वहीं पश्चिम एशिया, फिलिस्तीन और इजरायल में भी तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया था। यहां लगातार 11वें महीने में गर्मी का रिकॉर्ड टूटा था।

अप्रैल की हीटवेव ने ले ली कई जान

अप्रैल में पड़ी भीषण गर्मी ने लोगों को सिर्फ परेशान ही नहीं किया है बल्कि इस दौरान पड़ी हीटवेव ने काफी लोगों की जान भी ले ली। रिपोर्ट्स की मानें तो अप्रैल के हीटवेव से बांग्लादेश में कम से कम 28 लोग, भारत में 5 लोग और गाजा में 3 लोगों ने अपनी जान गंवा दी। वहीं थाईलैंड और फिलिपिंस में भी इस साल गर्मी की वजह से मरने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गयी है।

हालांकि गर्मी से मरने वाले लोगों की संख्या और भी ज्यादा बढ़ने की पूरी संभावना है। सिर्फ जान ही नहीं हीटवेव की वजह से फसलों को नुकसान, पानी की कमी, बड़ी संख्या में मछलियों की मृत्यु, स्कूलों को बंद कर देना जैसी परेशानियां भी सामने आयी। इसके साथ ही लोकसभा चुनावों में केरल में हुए कम मतदान की एक प्रमुख वजह भी हीटवेव को ही माना जा रहा है।

hot weather in april 2024

क्यों हो रहा जलवायु परिवर्तन

दुनियाभर में हो रहे जलवायु परिवर्तन की प्रमुख वजह ईंधन जैसे तेल, कोयला और गैस का अत्यधिक जलना, कई मानवीय गतिविधियां जैसे जंगलों की अनियंत्रित कटाई आदि को काफी हद तक जिम्मेदार माना जा रहा है। जलवायु पर इंसानों की गतिविधियों के प्रभाव के बारे में जानने और उन्हें नापने के लिए वैज्ञानिकों ने मौसम डाटा और जलवायु मॉडल का विश्लेषण किया। यह विश्लेषण उस अवधि पर केंद्रित था जब गर्मी दो क्षेत्रों में सबसे खतरनाक थी : पश्चिम एशिया के एक क्षेत्र में अधिकतम दैनिक तापमान का तीन दिन का औसत जिसमें सीरिया, लेबनान, इज़राइल शामिल थे।

और फ़िलिस्तीन व जॉर्डन, और फ़िलीपींस में अधिकतम दैनिक तापमान का 15-दिवसीय औसत। वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक रूप से होने वाले अल नीनो के संभावित प्रभाव का भी विश्लेषण किया। अध्ययन में दक्षिण एशिया के एक क्षेत्र के मौसम डाटा का भी विश्लेषण किया गया जिसमें भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, लाओस, वियतनाम, थाईलैंड और कंबोडिया शामिल हैं। इस क्षेत्र के लिए विश्लेषण, क्योंकि वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन ने 2022 और 2023 में इसी तरह के अध्ययन किए हैं।

heatwave effect in asia

एशिया के अलग-अलग हिस्सों में अप्रैल का हीटवेट

  • अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि पश्चिम एशिया (इरान, तुर्की, इराक, सउदी अरब और यमन) में अप्रैल 2024 के हीटवेव में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने की मुख्य वजह इंसानी गतिविधियां थी। बताया जाता है कि यहां हर 10 साल में ऐसी हीटवेव आने की संभावना है। जलवायु परिवर्तन में गर्मी को लगभग 5 गुना ज्यादा बढ़ा दिया है।

इन देशों में अगर औसत सामान्य तापमान 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है, जिसके साल 2040-2050 तक होने की पूरी संभावना है, तो ऐसा हीटवेव हर 5 साल में आ सकता है, जो तापमान को 1 डिग्री सेल्सियस और बढ़ा देगा। बता दें, पश्चिम एशिया में अधिकतम तापमान पर अल नीनो का प्रभाव नहीं पड़ता है।

  • फिलीपींस में, अल नीनो स्थितियों के दौरान हर 10 साल में लगभग एक बार और अल नीनो के प्रभाव के बिना लगभग हर 20 साल में एक बार इसी तरह की हीटवेव आने की संभावना है। वैज्ञानिकों ने पाया कि मानव-प्रेरित जलवायु परिवर्तन के बिना, अल नीनो स्थितियों में भी ऐसी घटनाएं लगभग असंभव है।

अगर ग्लोबल वार्मिंग इस साल के हीटवेव को 1 डिग्री सेल्सियस भी बढ़ा देता है तो फिलीपींस में ऐसा हीटवेव हर दो या तीन साल में आने की संभावना है जो तापमान को 0.7 डिग्री सेल्सियस और बढ़ा देगा।

  • दक्षिण एशिया, जिसका सबसे बड़ा देश भारत है, में 30 दिनों का ऐसा हीटवेव हर 30 सालों में आने की संभावना है। World Weather Attribution के पूर्व अध्ययन से पता चलता है कि जो इलाके अप्रैल की हीटवेव की प्रमुख वजह बनें, वे 1 डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म और हीटवेव होने की संभावना 10 से 30 गुना ज्यादा बढ़ जाती है। इस अध्ययन में पता चलता है कि अल नीनो की स्थिति में ऐसा हीटवेव आने की संभावना दोगुना बढ़ जाती है।
gaja tent people

अप्रैल की हीटवेव ने गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की परेशानियों को सबसे ज्यादा बढ़ाया है। गाजा में रहने वाले करीब 17 लाख विस्थापितों को टेंट में रहने के मजबूर होना पड़ा, जहां सबसे ज्यादा गर्मी महसूस होती है। उनके पास न तो पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं हैं, न पर्याप्त साफ पेयजल है।

यहां तक की खुद को ठंडा रखने के विकल्प भी ज्यादा नहीं है। इस अध्ययन में World Weather Attribution समूह के 13 अध्ययनकर्ताओं के साथ विभिन्न विश्वविद्यालयों और मलेशिया, स्वीडेन, नीदरलैंड व ब्रिटेन की मौसम एजेंसियों के अधिकारी भी शामिल थे।

अध्ययनकर्ताओं ने कहा

इस समूह की एक अध्ययनकर्ता मरियम ज़शारिया का कहना है कि जलवायु परिवर्तन हर वर्ष एशिया के मौसम को ज्यादा खतरनाक बना रहा है। वहीं एक अन्य अध्ययनकर्ता फ्रेडरिक ओट्टो का कहना है कि अप्रैल की गर्मी से दिल्ली से लेकर गाजा से लेकर मनीला तक में लोग न सिर्फ परेशान हुए बल्कि कई लोगों ने अपनी जान भी गंवा दी। हर साल हीटवेव होता है लेकिन तेल, गैस या कोयले के जलने से उत्पन्न अतिरिक्त गर्मी की वजह से लोगों की मौत हो रही है।

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