सावन के महीने में उत्तर भारत में मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्योहार है हरियाली तीज। हरियाली तीज मुख्य रूप से नवविवाहित महिलाओं के लिए बड़ा ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इस साल हरियाली तीज 7 अगस्त यानी आज मनाया जा रहा है। इस पर्व में महिलाएं माता पार्वती से अपने पति की लंबी आयु और उनके अच्छे स्वास्थ्य का आर्शिवाद मांगती हैं।
इस दिन विवाहित महिलाएं उपवास रखकर माता पार्वती की पूजा करती हैं। सबसे खास बात होती है कि विवाहित महिलाएं करवा चौथ की तरह ही इस दिन पूरे 16 श्रृंगार करके माता पार्वती और महादेव की पूजा करती और उनका आर्शिवाद मांगती हैं।

मुख्य रूप से हरियाली तीज बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में मनाया जाता है। अलग-अलग राज्यों में हरियाली तीज को अलग-अलग नामों से भले ही पुकारा जाता है लेकिन इसका मूल और भावनाएं सभी एक ही समान होती हैं।
बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में हरियाली तीज को मधुश्रावणी तीज के नाम से पुकारा जाता है। मधुश्रावणी तीज आमतौर पर नवविवाहित महिलाएं ही करती हैं। सावन के महीने में 13 दिनों तक इसे मनाया जाता है। इस दौरान नवविवाहित महिलाएं उपवास रखती हैं और केवल सात्विक भोजन ही ग्रहण करती हैं। खास बात है कि इस समय महिलाएं जो खाना खाती हैं उसमें नमक का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं होता है।

राजस्थान में हरियाली तीज के समय माता पार्वती की मूर्ति को बड़े ही आकर्षक ढंग से सजाकर उनकी सवारी निकाली जाती है। इस जुलूस में महिलाएं और पुरुष सभी पूरे भक्तिभाव के साथ शामिल होते हैं। भजन-कीर्तन के साथ माता पार्वती की सवारी, जिसे तीज माता की सवारी भी कहा जाता है, को शहर के हर गली-मुहल्ले में घूमाया जाता है। बड़ी संख्या में लोग इस सवारी का हिस्सा बनते हैं और अपने लिए भगवान का आर्शिवाद मांगते हैं।
महाराष्ट्र में भी हरियाली तीज मनाया जाता है लेकिन वहां इसे हरतालिका तृतिया व्रत के नाम से जाना जाता है। महाराष्ट्र में इसे शादीशुदा महिलाएं जहां अपने पति की लंबी आयु और उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए यह व्रत रखती हैं, वहीं कुमारी युवतियां इस व्रत को अच्छे पति की कामना से इस व्रत को रखती है।

महिलाएं लगभग डेढ़ दिन का निर्जला व्रत रखती हैं, लाल या हरे रंग की नयी साड़ी पहनती, मेंहदी लगाती हैं और सोलह श्रृंगार करके तैयार होती हैं। इसके बाद शादीशुदा महिलाएं मिट्टी से भगवान शिव, माता गौरी, उनकी सखी और भगवान गणेश की मूर्तियां बनाती हैं, कथाएं पढ़ती हैं और पूजा करती हैं। इसके दूसरे दिन महिलाएं अपना व्रत खोलती हैं।
एक प्रकार से कहा जाए तो हरियाली तीज सिर्फ एक व्रत या त्योहार नहीं है, बल्कि यह बीते जमाने से महिलाओं को एक धागे में बांध कर रखने का काम करती आ रही हैं। इन व्रतों और त्योहारों के बहाने महिलाएं एक-दूसरे से मिलती हैं, एक साथ बैठकर भगवान का पूजा-पाठ करती हैं और अपने-अपने पति के लिए लंबी आयु का आर्शिवाद मांगती हैं। अगर आप आज इनमें से किसी भी राज्य की यात्रा पर हैं, तो स्थानीय घरों में महिलाओं को यह पूजा करते हुए जरूर देखें। इससे न सिर्फ आपको अच्छा लगेगा बल्कि अगर महिलाएं अनुमति देती हैं तो यह फोटोग्राफी का भी एक अच्छा मौका हो सकता है।



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