कुछ ही दिनों में केदारनाथ-बद्रीनाथ, गंगोत्री-यमुनोत्री या फिर अमरनाथ यात्रा शुरू होने वाली है। ऊंचे पहाड़ों पर स्थित इन तीर्थ स्थलों की यात्रा शुरू होने से पहले लोग हर तरह की तैयारियां करते हैं, जैसे स्वास्थ्य की जांच करवाना, सुखा खाना पैक करने से लेकर आवश्यक दवाईयां तक लेते हैं। लेकिन जिस बात पर काफी अधिक ध्यान दिया जाना तो चाहिए पर सबसे कम ध्यान दिया जाता है वह है ट्रेकिंग के जूते।
जी हां, सामान्य सर्दियों के मौसम में पहने जाने वाले कपड़ों के जूतों से लेकर स्पोर्स्ट्स शूज आदि को पहनकर इन पहाड़ी रास्तों पर ट्रेकिंग करने की बात भूल जाएं। अगर आप भी अमरनाथ या फिर केदारनाथ धाम के लिए ट्रेकिंग करने की योजना बना रहे हैं तो अपने लिए ट्रेकिंग शूज की एक अच्छी जोड़ी जरूर खरीद लें।

यकिन किजिए...ट्रेकिंग करते वक्त ये आपको इतना सपोर्ट करेंगे कि इन जूतों को खरीदना फिजूलखर्जी नहीं बल्कि आपको यह जरूरी लगने लगेगा।
आइए जानते हैं ट्रेकिंग के लिए जूते खरीदते समय किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए -
जूतों का लचिलापन देखें
पहाड़ों या पत्थरों की उबड़-खाबड़ वाले रास्तों पर चलने के लिए जूतों का लचीला होना बेहद जरूरी है। अगर जूते लचिले नहीं होंगे तो किसी भी ऊंची-नीची जगह पर पैर रखते ही या तो आपके पैर मुड़ जाएंगे, जिससे मोच आने की संभावना बढ़ जाएगी। या फिर जूते पैरों पर इतना अधिक दबाव डालने लगेंगे कि उससे आपका पैर कट या छिल जाएगा।
इससे भी आपको चलने में निश्चित रूप से समस्या होगी। जब ट्रेकिंग के लिए जूते खरीदने जाएं तो जूतों के सोल पर किसी धातु से प्रहार करें। अगर सोल से हल्की और दबी हुई आवाज आती है तो इसका मतलब है जूते का सोल नर्म और काफी लचीला है। लेकिन अगर जूते के सोल से तेज आवाज आती है, तो समझ लिजीए जूते का सोल काफी सख्त है। ऐसे जूते खरीदने से बचे।

जूतों की सोल जांचे, फिसलने वाला न हो
पहाड़ों पर कहीं चिकनाई वाले पत्थर तो कहीं पानी गिरे होने, प्राकृतिक झरना, बारिश या फिर बर्फबारी के कारण फिसलन जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए जब भी अपने लिए ट्रेकिंग जूतें चुने, इस बात को जरूर जांच लें कि उनका सोल फिसलने वाला न हो। जूतों के सोल की ग्रीप अच्छी होनी चाहिए। जूतों के नीचले हिस्से में जितने गहरे निशान बने होंगे, ट्रेकिंग के लिए वो जूते उतने ही आदर्श मानें जाएंगे।
जूते, जो एड़ी को दे समर्थन
सामान्य समय में जूते खरीदते समय हम इस बात का ध्यान रखते हैं, कि जूते पैर के पंजों पर अधिक दबाव न डाल रहा हो। लेकिन जब ट्रेकिंग के लिए जूते खरीदें तो अपने पैरों की एड़ी की तरफ भी ध्यान दें। ट्रेकिंग वाले जूते हमेशा ऐसे होने चाहिए जिनकी एड़ी ऊंची हो।

यहां हम जूतों के हिल की बात नहीं कर रहे हैं और न ही जूतों के सोल की बात कर रहे हैं। एड़ी ऊंची होने का मतलब जूते बुट की तरह आपके पैरों का ऊपरी हिस्सा अधिक ढंकने वाला होना चाहिए। ऐसा इसलिए सलाह दी जाती है, क्योंकि अगर किसी कारणवश पत्थरों पर पैर रखने के बाद अगर आपका पैर मुड़ भी जाता है तो पैरों को ऊंचाई तक सपोर्ट मिलने के कारण मोच या अधिक चोट नहीं आएगी।
सही नाप का होना बेहद जरूरी
ट्रेकिंग के लिए जूते खरीदते समय उसका सही नाप का होना बेहद जरूरी है। क्योंकि पहाड़ों पर चढ़ाई करते समय आप अपने संतुलन की तरफ ध्यान देंगे न कि पैरों को काट रहे या पैरों से खुलकर बाहर निकल जा रहे अपने जूतों की ओर। ट्रेकिंग के जूते हमेशा एक साइज बड़ी लेना सबसे अच्छा होता है, क्योंकि जब आप ऊनी मोजे के साथ इन जूतों को पहनेंगे तो जूते पैरों में कसकर नहीं बैठेंगे। इससे पैरों को काट भी नहीं पाएंगे और न ही पैर छिलेंगे।
वाटरप्रुफ का होना अनिवार्य

ट्रेकिंग के लिए जूते खरीदते समय आप भले ही कितने भी मानदंडों पर ध्यान दें, और देखभाल कर अपने जूते खरीदें। लेकिन अगर आपके जूते वाटरप्रुफ नहीं हैं तो यह वेस्ट ऑफ मनी ही कहलाएगा। हम सभी जानते हैं, केदारनाथ हो या फिर अमरनाथ की चढ़ाई, यात्रा के दौरान कई बार बारिश होने लगती है। रास्ते में प्राकृतिक झरने मिलते हैं, जिनके नीचे से होकर गुजरना पड़ता है।
बर्फबारी का होना तो आम बात है। ऐसे में अगर जूते भींग गये तो उसकी वजह से आपके मोजे भी भीगेंगे और इसका सीधा असर आपके स्वास्थ्य पर पड़ेगा। इसलिए रास्ते में अगर बीमार नहीं पड़ना चाहते और अपनी तीर्थ यात्रा को अधुरा छोड़कर वापस नहीं लौटना चाहते हैं तो हमेशा वाटरप्रुफ जूते ही खरीदें।



Click it and Unblock the Notifications














