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कोलकाता में अप्रैल की गर्मी ने तोड़ा 50 सालों का रिकॉर्ड - बन चुका है Heat आईलैंड, क्यों?

दिन में आग उगलती धूप और रात को उमस वाली गर्मी। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में इन दिनों मौसम का यहीं हाल है। अप्रैल 2024 की गर्मी ने तो अपना ही 50 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ डाला है। पश्चिम बंगाल का ही एक कस्बा कलाईकुंडा इन दिनों देशभर की सुर्खियों में छाया हुआ है।

कलाईकुंडा न सिर्फ राज्य में बल्कि देशभर में सबसे अधिक गर्म है, जिसका तापमान अप्रैल के महीने में ही 47 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है। मौसम विभाग ने भी गर्मी की शुरुआत में ही भविष्यवाणी कर दी थी कि इस साल राज्य और कोलकाता का न्यूनतम तापमान नयी ऊंचाई पर पहुंच जाएगा। इसका उदाहरण 30 अप्रैल को महानगर ने देख भी लिया जब पिछले सारे रिकॉर्ड्स को तोड़ते हुए अप्रैल में तापमान 43° सेल्सियस पर पहुंच गया।

kolkata weather

यह साल के इस समय रहने वाले सामान्य तापमान से लगभग 7 डिग्री सेल्सियस अधिक था। इससे पहले अप्रैल में कोलकाता के अधिकतम तापमान का रिकॉर्ड 25 अप्रैल 1980 के नाम पर दर्ज है जब तापमान 41.7 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचा था। 30 अप्रैल 2024 को कोलकाता का न्यूनतम तापमान 29.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इससे पहले महानगर में रात के समय इतनी अधिक गर्मी साल 1987 में पड़ी थी। पर क्या कोलकाता में पड़ रही गर्मी की एकमात्र वजह प्रकृति ही है या फिर इंसान भी इस भयानक गर्मी का कारण हैं?

मौसम विशेषज्ञों की मानें तो कोलकाता में तापमान बढ़ने की वजह प्रकृति से कहीं ज्यादा इंसानों की गलतियां है। यहीं कारण है कि आज के समय में कोलकाता को 'Heat आईलैंड' करार दिया जा चुका है।

सिर्फ कोलकाता ही नहीं आसपास के क्षेत्र भी हो रहे हैं गर्म -

30 अप्रैल को दमदम इलाके का अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। 30 अप्रैल को दमदम का न्यूनतम तापमान 30.4 डिग्री सेल्सियस था। अप्रैल के महीने में संभवतः ऐसा पहली बार हुआ है जब दमदम में रात के समय न्यूनतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस या उसके आसपास पहुंचा है। इससे पहले 11 अप्रैल 2016 को दमदम का न्यूनतम तापमान 29.5 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचा था।

kolkata summer 2024 april

क्यों कोलकाता में अनियंत्रित हो रही है गर्मी?

अगर 50-60 साल पहले की बात की जाए तो कोलकाता का तापमान इतना ज्यादा नहीं जाता था। लेकिन हाल के वर्षों में कोलकाता में गर्मी अनियंत्रित रूप से बढ़ती जाती है। इसकी वजह प्राकृतिक और मानव निर्मित दोनों ही बतायी जा रही है।

1. प्राकृतिक वजह
दिन के समय ही कोलकाता में तापमान काफी ऊपर चला जा रहा है। इस वजह से रात के वक्त तापमान कम नहीं हो पा रहा है। दिन के समय सामान्य की तुलना में तापमान 6-7 डिग्री सेल्सियस अधिक रह रहा है और न्यूनतम तापमान भी उतनी ही तेजी से अब बढ़ रहा है। तटवर्तीय जिलों में शाम के समय जलवाष्प समुद्र से स्थल भाग में प्रवेश करता है जिस कारण आसमान में हल्के बादल भी बनते हैं।

इस कारण दिन के समय जब तापमान बढ़ता है तो रात को आसमान में छाये बादल गर्मी को पूरी तरह से बाहर निकलने से रोक देते हैं। हवा में नमी और जलवाष्प गर्मी को ज्यादा पकड़ कर रखने की क्षमता भी रखते हैं। जिस कारण महानगर का तापमान दिन-प्रति-दिन बढ़ता ही जा रहा है।

2. मानव निर्मित वजहें
कोलकाता पर हमेशा से ही अनियंत्रित शहरीकरण का आरोप लगता रहा है। महानगर पूरी तरह से कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो चुका है। कंक्रीट में भी गर्मी को सोख कर रखने की क्षमता होती है। इसलिए सूर्य ढलने के बाद भी शहर का वातावरण ठंडा नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा तालाबों को भरकर वहां निर्माण करना, पेड़ों को काट देना या पेड़ न लगाना आदि भी वजहें हैं, जिसका प्रभाव कोलकाता के तापमान को बढ़ा रहा है।

लेकिन सबसे अधिक नुकसान एयर कंडिशनर (एसी) पहुंचा रहे हैं। एसी घर या कमरे को तो ठंडा कर देता है लेकिन उससे निकलने वाली गर्म हवा महानगर के तापमान को बढ़ा देती है। नतीजा होता है कि महानगर में मौसम को ठंडा होने का मौका ही नहीं मिल पा रहा है।

kolkata broke record of 50 years in april summer 2024

पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त!

कोलकाता में तापमान और हीट वेव का जो पैटर्न चल रहा है, उसे देखकर यह स्पष्ट हो चुका है कि यह तो मात्र ट्रेलर है। आने वाले सालों में हीट वेव पूरी पिक्चर दिखाएगी। यूनाइटेड नेशन की मौसम पर वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि कोलकाता का तापमान अप्रैल के महीने में 49.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। ऐसा साल 2081 से 2100 के बीच होने की पूरी संभावना है।

मौसम वैज्ञानिकों ने भविष्यवाणी की है कि वर्ष 2081-2100 के दौरान कोलकाता का सामान्य तापमान ही 4.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा। कलकत्ता विश्वविद्यालय (Calcutta University) के पर्यावरण विज्ञान के प्रोफेसर अनिरुद्ध मुखर्जी ने इस रिपोर्ट के बारे में बताया कि महानगर में 1850 से 2081 के बीच तापमान में सर्वाधिक वृद्धि हुई है और इस वृद्धि का लगभग 91 प्रतिशत हिस्सा 1995-2081 के बीच ही हुआ है अथवा होगा।

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