21 मार्च को यूनाइटेड देशों ने पहला विश्व ग्लेशियर दिवस (World Day for Glacier) मनाया। इस दिन को अंतरराष्ट्रीय ग्लेशियर रक्षा वर्ष (International Year of Glacier's Preservation) के तहत मनाया गया। इस मौके पर भारत की प्रमुख पृथ्वी अवलोकन और विश्लेषण कंपनी सुहोरा (Suhora) ने हिमालयी क्षेत्रों में पिघल रही ग्लेशियरों और इसकी वजह से झीलों के आकार में हो रही वृद्धि के बारे में एक रिपोर्ट जारी की।
इस रिपोर्ट में खासतौर पर लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और सिक्किम राज्यों के उन ग्लेशियरों का उल्लेख किया गया है, जो ग्लोबल वॉर्मिंग की मार झेल रहे हैं और नियमित गति की तुलना में काफी तेजी से पिघल रहे हैं। इस वजह से इन राज्यों के कई प्रसिद्ध झीलों के आकार बढ़ने के साथ ही जलस्तर में भी पिछले कई सालों के मुकाबले तेजी से वृद्धि देखी जा रही है।

सुहोरा ने अपनी रिपोर्ट में सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों की घाटी में भारत और आसपास के क्षेत्रों में फैले हिमालय के पर्वतीय इलाकों में मौजूद करीब 33000 ग्लेशियर और नॉन-ग्लेशियल झीलों के साथ-साथ सुपरग्लेशियल झीलों का भी उल्लेख किया है, जो 630 ग्लेशियरों की वजह से बनते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि ये सभी झीलें नहीं फैल रही हैं, लेकिन इनमें से कुछ झीलें बड़ी तेजी से फैल रही हैं।

इसलिए इन झीलों पर नजरें बनाए रखने और खास देखरेख करने की जरूरत है। मौसम परिवर्तन की वजह से पिछले कुछ सालों में ग्लेशियरों के पिघलने की गति में तेजी आने की वजह से ऊंचाई पर मौजूद झीलों का आकार ज्यादा बड़ा हुआ है। इस वजह से न सिर्फ इन झीलों में बाढ़ आने का खतरा भी बढ़ गया है बल्कि ग्लेशियर भी तेजी से पीछे की तरफ हटते जा रहे हैं और उनका आकार भी घट रहा है।

ग्लेशियरों के आकार में परिवर्तन, उनका छोटा होना और साल-दर-साल लगातार पीछे की तरफ हटने की प्रक्रिया को एक चेतावनी के तौर पर लेने और इन्हें रोकन की जरूरत है। ताकि किसी भी बड़ी दुर्घटना को घटने से पहले ही रोका जा सकें। इसके तहत ही विभिन्न एजेंसियां सैटेलाइट इटेलिजेंस, सेंसर मॉनिटरिंग से लेकर अन्य कई उपाय कर रही हैं।
पिछले कुछ सालों में जिन झीलों के आकार में वृद्धि दर्ज हुई है -
| झील का नाम | राज्य | वर्ष | आकार में परिवर्तन |
| दक्षिण लोनाक झील | सिक्किम | 1967 | 12 Ha |
| 2024 | 768 Ha | ||
| घेपन घाट झील | हिमाचल प्रदेश | 2016 | 89.9 Ha |
| 2020 | 94 Ha | ||
| 2024 | 105 Ha | ||
| पानीखार झील | लद्दाख | 2016 | 33.8 Ha |
| 2020 | 41.4 Ha | ||
| 2024 | 53.1 Ha | ||
| मसर ताल, टिहरी गढ़वाल | उत्तराखंड | 2011 | 23.2 Ha |
| 2017 | 29.7 Ha | ||
| 2020 | 33.4 Ha | ||
| 2024 | 37.9 Ha |

इसके अलावा उत्तराखंड के यांगती घाटी में भी दो झीलें हैं, जो ग्लेशियर से बनती हैं। इन दोनों झीलों के आकार में भी पिछले कुछ सालों में काफी परिवर्तन हुआ है -
| वर्ष | झील 1 | झील 2 |
| 2013 | 10.3 Ha | 1.11 Ha |
| 2016 | 11.5 Ha | 1.32 Ha |
| 2020 | 14.24 Ha | 1.53 Ha |
| 2024 | 17 Ha | 1.7 Ha |



Click it and Unblock the Notifications













