चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है और इसके साथ ही 51 शक्तिपीठों के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी वृद्धि होगी। इस साल गुजरात में अहमदाबाद के पास मौजूद अंबाजी शक्तिपीठ के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को कुछ खास दिखने वाला है। दरअसल, काशी विश्वनाथ और उज्जैन में काल भैरव कॉरिडोर की तर्ज पर ही अब अंबाजी शक्तिपीठ मंदिर परिसर के आसपास के क्षेत्र में विकास कार्य किये जाएंगे।
इन विकास कार्यों के तहत ही अंबाजी शक्ति कॉरिडोर के पहले चरण का काम पिछले साल से ही शुरू हो चुका है। बताया जाता है कि इन निर्माण कार्यों का मुख्य उद्देश्य अंबाजी शक्तिपीठ कॉरिडोर को आधुनिक बनाने के साथ ही यहां की अध्यात्मिक और सांस्कृतिक तत्वों को संरक्षित करना है।

Ahmedabad mirror की मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दिनों गुजरात विधानसभा में अपने भाषण के दौरान मंत्रिमंडल के सदस्य रुषिकेश पटेल ने बताया कि पहले चरण के तहत मुख्य तौर पर अंबाजी माता मंदिर से गब्बर पहाड़ी तक के स्ट्रेच का विकास करने पर अधिक ध्यान दिया जाएगा।
बताया जाता है कि इस कॉरिडोर के विकास में करीब ₹1191 करोड़ का खर्च आएगा। इससे पहले अंबाजी मंदिर के चारों तरफ के लगभग 8.94 हेक्टेयर के क्षेत्र में भूमि खंडों का पुनर्गठन किया जा चुका है, ताकि मंदिर के विकास को सुनिश्चित किया जा चुके।
अंबाजी मंदिर के विकास कार्यों के पहले चरण के तहत मंदिर के आसपास की जमीन पर हुए किसी तरह की सरकारी निर्माणों को ढहाने की प्रक्रिया को शुरू किया गया है। इस जगह पर एक अंडरपास वॉकवे का निर्माण करने की योजना है, जिसका उपयोग श्रद्धालु 51 शक्तिपीठ सर्किल से गब्बर सर्किल तक आने-जाने के लिए कर सकते हैं।
बताया जाता है कि इस नए अंडरपास के बन जाने से मंदिर तक मात्र 20 मिनट में ही पहुंचा जा सकेगा। बताया जाता है कि अगले लगभग 5 सालों के अंदर अंबाजी मंदिर परिसर को विकसित करने की इस परियोजना का काम योजनाबद्ध और चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।

पहले चरण के तहत जो प्रमुख कार्यों को पूरा किए जाएंगे, उनमें शामिल हैं -
- गब्बर पर्वत पर ज्योत और मंदिर के बीच आवाजाही और यातायात संपर्क को आसान बनाना, जिसके लिए अंडरपास वॉकवे का निर्माण करने की योजना है।
- छाछर चौक और गब्बर मंदिर के आसपास के इलाकों का सौन्दर्यीकरण। इसके तहत इन इलाकों को कलात्मक मूर्तियों आदि से सजाया जाएगा, जिसमें स्थानीय संस्कृति और इतिहास की झलक दिखेगी।
- दिव्य दर्शनी चौक का विकास किया जाएगा। यहां बैठने के लिए बेंच आदि लगाना, हरियाली को बढ़ाने के लिए पेड़-पौधे रोपना, मंदिर के इतिहास व स्थानीय संस्कृति की जानकारी देता हुआ कियॉस्क लगाना और दुकानदारों के बैठने की व्यवस्था करना आदि शामिल है।
- मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जनवरी 2027 तक अंबा जी मंदिर के विकास कार्य की इस परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य बनाया गया है। इसके तहत ही सबसे पहले शक्ति द्वार से गब्बर पहाड़ी तक अंडरपास वॉकवे का निर्माण किया जाएगा।



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