बाबा अमरनाथ की गुफा के पास शुक्रवार को बादल फटने की घटना के बाद अमरनाथ यात्रा को अस्थाई रूप से स्थगित कर दिया गया है। इस घटना में अब तक 15 लोगों के मारे जाने की खबर है, वहीं 50 से अधिक श्रद्धालु लापता हैं। हालांकि सरकारी सूत्रों के अनुसार शनिवार को यात्रा फिर से बहाल की जा सकती है।
शुक्रवार की शाम करीब साढ़े पांच बजे बादल फटने की वजह से पहाड़ से जल सैलाब सीधे गुफा के पास स्थित शिविरों तक आ पहुंचा। इस वजह से वहां हाहाकार मच गया। मौके पर पहले से ही तैनात एनडीआरएफ की टीम ने तुरंत बचाव कार्य शुरू कर दिया। स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन मूसलाधार बारिश के चलते बचाव कार्य में बाधाएं आ रही हैं। वहीं बचाव कार्य में भारतीय सेना के जवान भी जुटे हुए हैं।

25 शिविर तबाह
पहाड़ के ऊपर से आये जल सैलाब में एक ही झटके में करीब 25 शिविर बह गये। साथ ही तीन सामुदायिक रसोईयां भी पूरी तरह नष्ट हो गईं। ये वो सामुदायिक रसोईयां थीं, जहां पर श्रद्धालुओं के लिए भोजन की व्यवस्था की जाती थी।

बचाव कार्य जारी
आईटीबीपी के प्रवक्ता विवेक कुमार पांडे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने की हर संभव कोशिश की जा रही है। एनडीआरएफ के साथ साथ एसडीआरएफ और आर्मी के बचाव दल मौके पर बचाव कार्य में जुटे हुए हैं।

कल यात्रा शुरू होने की आशा
एक अधिकारी ने बताया कि अमरनाथ यात्रा को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। जब तक स्थिति पूरी तरह से अनुकूल नहीं हो जाती है, तब तक अगले जत्थे को आगे नहीं भेजा जाएगा। हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि कल यात्रा शुरू होने के आसार दिख रहे हैं।

कल यात्रा शुरू होने की आशा
वहीं एक अधिकारी ने बताया कि अमरनाथ यात्रा को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। जब तक स्थिति पूरी तरह से अनुकूल नहीं हो जाती है, तब तक अगले जत्थे को आगे नहीं भेजा जाएगा। हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि कल यात्रा शुरू होने के आसार दिख रहे हैं।

1996 में भी आयी थी प्राकृतिक आपदा
इससे पहले 1996 में में अमरनाथ यात्रा के दौरान एक प्राकृतिक आपदा ने कुल 242 लोगों की जान ले ली थी। जी हां उस दौरान अचानक बर्फबारी की वजह से ढाई सौ लोगों की ठंड से मौत हो गई थी।



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