बैंगलोर में प्रस्तावित दूसरे एयरपोर्ट ने उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की महत्वकांक्षी परियोजना स्काईडेक के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी है। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार बेंगलुरु के प्रस्तावित दूसरे एयरपोर्ट के लिए स्थान बनाने के लिए स्काई डेक परियोजना को दक्षिण बेंगलुरु से हटाकर किसी और स्थान पर ले जाया जा सकता है।
बता दें, स्काई डेक परियोजना कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री शिवकुमार की महत्वकांक्षी परियोजना है, जिसके बारे में दावा किया जाता है कि निर्माण के बाद यह भारत की सबसे ऊंची संरचना होगी जो पेरिस के एफिल टावर से प्रतिद्वंद्विता करेगी।

उपमुख्यमंत्री ऑफ कनकपुरा रोड पर हेम्मीगेपुरा में 250 मीटर ऊंचे स्काई डेक के लिए 25 एकड़ की भूमि अधिग्रहण की योजना भी बना रहे थे। दावा किया जा रहा था कि इस स्काईडेक के निर्माण के बाद यहां से टेक्नोपॉलिस का शानदार नजारा दिखाई देगा, जो लोगों को बहुत पसंद आता। इस बारे में times now की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उपमुख्यमंत्री ने काफी सोच-विचार करने के बाद ही स्काई डेक के लिए ऑफ कनकपुरा रोड पर हेम्मीगेपुरा में 25 एकड़ की भूमि का चुनाव किया था।
बताया जाता है कि स्काई डेक के लिए जिस जमीन का अधिग्रहण करने की योजना बनायी गयी थी वह नंदी इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर एंटरप्राइज (NICE) की है। इस भूमि को अधिग्रहित करने का प्रस्ताव मंत्रिमंडल में जमा की जा चुकी है।
वहीं दूसरी ओर पिछले गुरुवार को मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने बेंगलुरु में प्रस्तावित दूसरे एयरपोर्ट के बारे में विचार-विमर्श करने के लिए बैठक बुलायी। बैठक में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) को प्रस्ताव सौंपने से पहले उन सभी सातों संभावित स्थानों को लेकर चर्चा की, जिन्हें दूसरे एयरपोर्ट के लिए चिह्नित किया गया है।
क्या है स्काई डेक बनाने के रास्ते में मुश्किल
मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर उपमुख्यमंत्री शिवकुमार के गृह जिला रामनगर को दूसरा एयरपोर्ट के लिए चुना जाता है तो यहां दो संभावित जगहें हैं जहां बैंगलोर का दूसरा एयरपोर्ट बन सकता है - बिदादी, जो रामनगर से 20 किमी की दूरी पर है और हरोहल्ली - जो कनकपुरा विधानसभा केंद्र के पास है।
अगर इनमें से किसी भी स्थान का चुनाव दूसरे एयरपोर्ट के लिए किया जाता है तो हेम्मीगेपुरा में स्काई डेक का निर्माण नहीं हो सकेगा क्योंकि यह नये एयरपोर्ट के एयर ट्रैफिक ज़ोन में आएगा जहां किसी भी संरचना की ऊंचाई सुरक्षा कारणों से 180 मीटर से ज्यादा नहीं हो सकती है।
बता दें, पहले स्काईडेक बनाने की योजना बैयाप्पनहल्ली में न्यू गर्वर्नमेंट इलेक्ट्रिक फैक्ट्री (NGEF) परिसर में थी लेकिन AAI ने इसकी अनुमति हाल एयरपोर्ट की वजह से नहीं दी थी। बृहत बेंगलुरु नगर पालिका ने ज्नाना भारती परिसर में इसे बनाने का प्रस्ताव दिया था लेकिन यह बेंगलुरु विश्वविद्यालय के शैक्षणिक परिवेश को प्रभावित करता। वहीं हेम्मीगेपुरा या कंगरी में स्थित कोम्मघाटा का भी चयन किया गया था लेकिन दोनों स्थान ही एयर ट्रैफिक ज़ोन में आ जाएंगे अगर बिदायी या हारोहल्ली में बेंगलुरु का दूसरा एयरपोर्ट बनता है।
7 जगहें जिन्हें बेंगलुरु के दूसरे एयरपोर्ट के लिए चिह्नित किया गया है -
- दबस्पेट
- कुनीगल
- कोराटागेरे
- हुलीयूरुदुर्गा (टुमकुरु जिला)
- मलवल्ली (मंड्या जिला)
- बिदायी
- हारोहल्ली



Click it and Unblock the Notifications














