6 जनवरी (सोमवार) को बेंगलुरु के नम्मा मेट्रो की यलो लाइन के लिए पहली ट्रेन टीटागढ़ रेल सिस्टम लिमिटेड के उत्तरपाड़ा प्लांट, पश्चिम बंगाल से बेंगलुरु के लिए रवाना हुई। सड़क मार्ग से इस ट्रेन को बेंगलुरु के लिए रवाना किया गया है। संभावना जतायी जा रही है कि 20 जनवरी तक या उससे पहले यह ट्रेन बेंगलुरु पहुंच जाएगी। नम्मा मेट्रो का पहला ड्राईवरलेस ट्रेन है, जो पूरी तरह से Made in India है।
इस ट्रेन का संचालन बेंगलुरु मेट्रो की यलो लाइन पर किया जाएगा। इस मौके पर टीटागढ़ में बेंगलुरु दक्षिण के सांसद तेजस्वी सूर्या भी मौजूद थे। इसके साथ ही बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) के उच्चाधिकारी भी मौजूद रहे।
पर इनके बीच एक सवाल जो सबके मन में घूम रहा है कि आखिर कब से बेंगलुरु मेट्रो के यलो लाइन को शुरू किया जाएगा?
सोमवार को टीटागढ़ रेल फैक्ट्री (TRSL) ने भारत में निर्मित पहली ड्राईवरलेस मेट्रो को BMRCL को सौंप दिया। जैसा कि पहले से ही निर्धारित है कि इस मेट्रो का संचालन बेंगलुरु मेट्रो की यलो लाइन यानी आरवी रोड से बोम्मसांद्रा रूट पर 16 स्टेशनों के बीच 19.15 किमी की दूरी में किया जाएगा। दावा किया जाता है कि इस मेट्रो लाइन के शुरू होने के बाद हर दिन इस मेट्रो लाइन से होकर करीब 2.5 लाख यात्री यातायात करेंगे।
इसके साथ ही TRSL ने इस मौके पर यह घोषणा भी कर दी कि वह यलो लाइन के लिए दो और ट्रेन सेट अप्रैल 2025 तक डिलिवर कर देगा। सितंबर तक वह हर महीने दो ट्रेन सेट डिलिवर करने का लक्ष्य बना रहा है। बता दें, इस वक्त TRSL साल 2019 में चीन की कंपनी CRRC के साथ हुए ₹1,578 करोड़ के समझौते के तहत 36 में 34 ट्रेनों का निर्माण कर रही है।
इनमें से 15 ट्रेनों का संचालन बेंगलुरु मेट्रो के यलो लाइन और बाकी का संचालन पर्पल और ग्रीन लाइन पर किया जाएगा। इसके अलावा फरवरी 2024 में चीन से एक प्रोटोटाइप मेट्रो ट्रेन बेंगलुरु पहुंच चुकी है, जिसका ट्रायल रन यलो लाइन पर किया जा रहा है। इसी महीने के अंत तक ग्रीन और पर्पल लाइन के लिए प्रोटोटाइप ट्रेन बेंगलुरु पहुंच सकती है।
क्या कहा BMRCL ने?
BMRCL के मैनेजिंग डायरेक्ट एम. महेश्वर राव ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि 6 कोच की ड्राईवरलेस ट्रेन सोमवार को टीटागढ़ से बेंगलुरु के लिए रवाना हुई, जो सड़क मार्ग से 20 जनवरी या उससे पहले बेंगलुरु पहुंच जाएगी। इस ट्रेन का उपयोग प्रोटोटाइप ट्रेन के साथ ही सिग्नलिंग टेस्ट के लिए किया जाएगा, जिसमें लगभग 2 सप्ताह का समय लगेगा। राव ने बताया कि इसका जो रिजल्ट निकलेगा, उसके आधार पर ही यलो लाइन की जांच करने के लिए कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) को आमंत्रित किया जाएगा।
कब तक शुरू हो सकता है यलो लाइन?
Deccan Herald से बात करते हुए एम. महेश्वर राव ने कहा, "हमें विश्वास है कि हम 3 से 5 ट्रेनों के साथ यलो लाइन का संचालन शुरू कर सकते हैं। लेकिन 3 ट्रेनों के साथ संचालन शुरू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इससे दो ट्रेनों के बीच का अंतराल ज्यादा होगा, नतीजा ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ होगी।"
उन्होंने आगे कहा कि अगर TRSL अप्रैल के शुरुआत तक 3 ट्रेनों को डिलिवर करने में सक्षम हो जाती है, तो हमारे पास कुल 4 ट्रेनें होंगी। इनके साथ यलो लाइन को शुरू किया जा सकता है। इस बीच हमें सभी क्लीयरेंस मिल जाएगा। सुरक्षा जांच के बाद हम शुरू होने की तारीखों की घोषणा कर सकेंगे।
बताया जाता है कि BMRCL पीक आवर के दौरान हर घंटे लगभग 15000 यात्रियों को लाने-ले जाने का काम करने का लक्ष्य निर्धारित कर रही है, जिसे मात्र 3 ट्रेनों के साथ पूरा करना मुश्किल होगा। इस बारे में राव ने बताया कि 3 ट्रेनें में प्रति घंटा मात्र 6000 यात्री ही यातायात कर सकेंगे।
हम इस बात की गणना कर रहे हैं कि कैसे 6000 से 15000 यात्रियों को सुविधा प्रदान की जाए। साथ ही राव ने थोड़ी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि हम उम्मीद कर रहे हैं कि मई या जून से हमें हर महीने 1 ट्रेन मिलेगी लेकिन TRSL अगर सितंबर से दो ट्रेन सप्लाई करने का लक्ष्य बना रही है तो थोड़ा विलंब भी हो सकता है।



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