जल्द ही कर्नाटक में बैंगलोर-मैसूर एक्सप्रेसवे पर GNSS यानी ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम को टोल फीस वसूलने के लिए लागू किया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार इस तकनीक को पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस एक्सप्रेसवे पर लागू किया जा रहा है।
ऐसे में लोगों के मन में और खासतौर पर बैंगलोर-मैसूर एक्सप्रेसवे से होकर आवाजाही करने वाले लोगों के मन में यह सवाल जरूर आ रहा है कि क्या GNSS के लागू होने के बाद FasTag काम नहीं करेगा? या टोल शुल्क जमा करने के लिए FasTag को बंद कर दिया जाएगा?

Times Now की एक रिपोर्ट के अनुसार GNSS को FasTag के साथ ही लागू किया जाएगा। बताया जाता है कि GNSS को मूल रूप से इसकी उपयोगिता आदि का पता लगाने के लिए प्रयोगात्मक रूप से ही लागू किया जा रहा है। इसका संतोषजनक परिणाम मिल जाने के बाद प्रबंधन इसे दूसरी जगहों पर भी लागू करेगी। बता दें, इस एक्सप्रेसवे से होकर आवाजाही करने पर बैंगलोर से मैसूर पहुंचने में मात्र 75 मिनट का समय ही लगता है।
और किन जगहों पर लागू होगा GNSS सिस्टम
मिली जानकारी के अनुसार बैंगलोर-मैसूर एक्सप्रेसवे के अलावा NH-27, हरियाणा के NH-709 में पानीपत-हिसार वाला सेक्शन पर भी इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जा रहा है। इन दोनों हाईवे के अलावा और किसी भी हाईवे पर टोल शुल्क वसूलने के लिए GNSS को लागू नहीं किया जा रहा है।
बता दें, GNSS सिस्टम पूरी तरह से सैटेलाइट पर आधारित एक तकनीक है, जिसमें वाहन का लोकेशन के आधार पर टोल शूल्क को कैलकुलेट किया जाता है। इसे वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम FasTag के एक विकल्प के तौर पर विकसित किया जा रहा है।



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