देश के अन्य हिस्सों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और राजधानी कोलकाता भी भीषण गर्मी की चपेट में है। आसमान से सूरज आग के गोले बरसा रहा है। लेकिन इसे नजरंदाज कर राज्य के लोग बंगाली नववर्ष 'पोएला वैशाख' पूरे उत्साह के साथ मना रहे हैं।

'पोएला वैशाख' के मौके पर हर साल की तरह ही इस साल भी ऐतिहासिक कालीघाट मंदिर और दक्षिणेश्वर मंदिर में लोगों की भारी भीड़ इकट्ठा हुआ। पसीने से तरबतर होते हुए महिलाएं और पुरुष सभी पारंपरिक परिधानों में तैयार होकर पारंपरिक रूप से दोनों मंदिरों में 'हाल खाता' (बहीखाता) की पूजा करने पहुंचे।

महिलाएं और पुरुषों ने प्रभात फेरी में हिस्सा लिया और कविगुरू रवीन्द्र नाथ टैगोर रचित गीत 'हे नोतून देखा दिक आबार' (फिर से नयी उम्मीद दिखाई दे), लोकगीत, बाउल गीत आदि परफॉर्म किया। जो बंगाल के गांवों (ग्राम बांग्ला) की झलक दिखाता है। देश के गृहमंत्री अमित शाह ने भी 'पोएला वैशाख' से दिन पहले दक्षिणेश्वर की भवतारिणी कालीमंदिर में मां काली का दर्शन कर पूजा-अर्चना की।
विभिन्न दुर्गापूजा कमेटियों जैसे राज डांगा उदय संघ, ठाकुरपुकुर एस. बी. पार्क सार्वजनिन आदि ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जिसमें महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। महानगर के गोलपार्क और रासबिहारी एवीन्यू इलाकों से होकर कई रैलियां गुजरी जिसमें लाल पार वाली सफेद पारंपरिक साड़ियों में सजी महिलाएं रवीन्द्रनाथ टैगोर रचित 'एशो हे वैशाख एशो हे' गुनगुनाती नजर आयी।
बंगाली नववर्ष 1430 के पहले दिन 'पोएला वैशाख' पर दुर्गापूजा कमेटी ठाकुरपुकुर एस. बी. पार्क सार्वजनिन ने खुंटी पूजा की। यहां बता दें, खुंटी पूजा दुर्गा पूजा के पंडाल के पहले बांस को गाड़कर उसकी पारंपरिक तौर पर की गयी पूजा होती है।

राज्य के निवासियों को दिये गये शुभकामना संदेश में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, "पोएला वैशाख के मौके पर मैं राज्यवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देती हूं।" उन्होंने कहा, "मैं प्रार्थना करती हूं कि नववर्ष की सुबह आपके जीवन में नई आशाएं, खुशीयां और अच्छा स्वास्थ्य लेकर आए। आइए समाज के विकास के लिए प्रतिबद्ध हों। शुभो नववर्ष।"
वहीं राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने 'पोएला वैशाख' के मौके पर राजभवन के कुछ हिस्सों में लोगों को 'हेरिटेज वॉक' के लिए आने की अनुमति दी। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के आधिकारिक निवास स्थान राजभवन का निर्माण ब्रिटिशकाल में वर्ष 1803 में किया गया था। ऐसा पहली बार हुआ है जब आम लोगों को राजभवन के अंदर घूमने जाने की अनुमति दी गयी।

बंगाली नये साल के पहले दिन विभिन्न दुकानों, ज्वेलर्स, कपड़ों के दुकानों, मिठाई की दुकानों पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। वहीं तेज धूप और तपती गर्मी की परवाह किये बिना लोगों ने कई प्रमुख रेस्तरां में पारंपरिक बंगाली खाने जैसे भेटकी पातुरी, भापा इलिश, डाब चिंगरी, गंधराज चिकेन, दोई मुर्गी, दोई इलिश, मटन डाकबंग्लो, धोकार डालना आदि का स्वाद चखने में भी कोई कमी नहीं छोड़ी।
पिछले 2-3 सालों से कोरोना के प्रकोप की वजह से सभी पर्व व त्योहारों की रोनक फीकी पड़ गयी थी, जो अब धीरे-धीरे लौट रही है। नववर्ष से ठीक एक रात पहले यानी चैत्र माह के अंतिम दिन प्रसिद्ध चंदननगर की लाइट्स से महानगर के कई इलाकों को जगमगाया गया था।



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